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विज्ञान जिसने बसा दी एक नई दुनिया

विज्ञान ने मानव का इतिहास बदल दिया और इसी का नतीजा है कि दुनिया का हर आदमी आगे निकलने की होड़ में लगा है। शेला जैसनॉफ की किताब ‘कैन साइंस मेक सेंस ऑफ लाइफ’ इसी पर केंद्रित है जिसमें बताया है कि 16वीं सदी में विज्ञान की दुनिया में क्रांति हुई जिसने मानव के 500 साल पुराने इतिहास को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।

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विज्ञान जिसने बसा दी एक नई दुनिया

विज्ञान ने मानव का इतिहास बदल दिया और इसी का नतीजा है कि दुनिया का हर आदमी आगे निकलने की होड़ में लगा है। शेला जैसनॉफ की किताब ‘कैन साइंस मेक सेंस ऑफ लाइफ’ इसी पर केंद्रित है जिसमें बताया है कि 16वीं सदी में विज्ञान की दुनिया में क्रांति हुई जिसने मानव के 500 साल पुराने इतिहास को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।

सैन्य ताकत, अर्थव्यवस्था, तकनीक, सामाजिक व सांस्कृतिक बदलाव ने दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का काम किया तो विज्ञान ने आधुनिक दुनिया को बसाने का काम किया है जिससे लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है। प्राकृतिक संसाधनों पर तकनीक के इस्तेमाल से एक नई दुनिया देखने को मिल रही है। इसी का नतीजा है कि आज स्मार्टफोन, रॉकेट, रोबोट, कार, दवा और अन्य चीजें आज सभी के पास उपलब्ध हैं।

हालांकि विज्ञान के विकास का लाभ सभी को बराबर रूप में नहीं मिला है। विज्ञान से कुछ नुकसान भी हुए हैं जैसे खाद्य पदार्थों में पेस्टीसाइड, परमाणु ऊर्जा और भविष्य के नाम पर गोपनीयता की भावना से मानव को ही नुकसान हुआ है। फायदे और नुकसान को लेकर बहस जारी है। विज्ञान कुछ सच्चाई को छुपाकर रखना चाहता है और उसी आधार पर कुछ नया कर अपनी शक्ति बढ़ाना चाहता है।

20वीं सदी में मानव की सबसे गुप्त बात डीएनए को विज्ञान ने दुनिया के सामने रख दिया है। आइवीएफ तकनीक पर सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या भविष्य का मनुष्य तैयार करने की ये नई तकनीक है? इसमें कोई दो राय नहीं की इससे लोगों को संतान सुख मिल रहा है पर क्या इस पर सोचने की जरूरत नहीं है? क्या विज्ञान अकेले जीवन का सार बन सकता है? ऐसा संभव नहीं है। मानव और विज्ञान के बीच संतुलन जरूरी है जिससे ये तय हो कि हम कहां से आए हैं और क्या कर रहे हैं।

डोरोन वेबर, पुस्तक विश्लेषक, वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत