बूंदी में हो रही संक्रमण से मौत पर शवों की बेकद्री

बूंदी में संक्रमण से मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए शवों की बेकद्री होना शुरू हो गई। ऐसा ही एक और वाकया शुक्रवार को सामने आया। जब नगर परिषद के कर्मचारी हाथ खड़े करते दिखे तो एम्बुलेंस चालक शव को मुक्तिधाम से कंट्रोल रूम ले गया। जब अधिकारियों को इसकी जानकारी लगी तो हडक़ंप मच गया, कर्मचारियों को भेजकर ढाई घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार कराया गया।

By: pankaj joshi

Published: 08 May 2021, 10:01 PM IST

बूंदी में हो रही संक्रमण से मौत पर शवों की बेकद्री
सूचना के बाद भी नगर परिषद कर्मचारी मुक्तिधाम नहीं पहुंचे तो एम्बुलेंस चालक शव लेकर कंट्रोल रूम पहुंच गया
शव को लेकर सवा दो घंटे भटकता रहा एम्बुलेंस चालक
बूंदी. बूंदी में संक्रमण से मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए शवों की बेकद्री होना शुरू हो गई। ऐसा ही एक और वाकया शुक्रवार को सामने आया। जब नगर परिषद के कर्मचारी हाथ खड़े करते दिखे तो एम्बुलेंस चालक शव को मुक्तिधाम से कंट्रोल रूम ले गया। जब अधिकारियों को इसकी जानकारी लगी तो हडक़ंप मच गया, कर्मचारियों को भेजकर ढाई घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार कराया गया। हुआ यों कि श्योपुरिया की बावड़ी निवासी महिला की दोपहर को इलाज के दौरान मौत हो गई। इसकी सूचना नगर परिषद को देकर एम्बुलेंस से शव अंतिम संस्कार के लिए दोपहर 12.40 बजे बूंदी के रोटरी मुक्तिधाम के लिए भेज दिया।
एम्बुलेंस चालक डेढ़ घंटे तक मुक्तिधाम पर खड़ा रहा। जब तक कोई नहीं आया। इस दौरान चालक और अन्य संस्थाओं के लोगों ने सभी को जानकारी दी। जब कोई आता नहीं दिखा तो एम्बुलेंस चालक शव को मुक्तिधाम से लेकर अहिंसा सर्किल के निकट स्थित नगर परिषद के कंट्रोल रूम पर पहुंच गया।
शव रखी एम्बुलेंस को यहां कंट्रोल रूम के बाहर गेट पर खड़ा कर दिया। चालक ने कंट्रोल रूम पर मौजूद कर्मचारियों से शव का अंतिम संस्कार कराने की गुहार लगाई। सूचना पर विहिप कार्यकर्ता भी कंट्रोल रूम पहुंचे और जानकारी उच्चाधिकारियों को दी, तब हडक़ंप मचा और शव को मुक्तिधाम भेजा। करीब ढाई घंटे बाद शव का अंतिम संस्कार कराया जा सका।
हाथ खड़े करने लगे कर्मचारी
नगर परिषद के कर्मचारी अब कोरोना से मरने वालों का अंतिम संस्कार कराने से हाथ खड़े करने लग गए। इसके पीछे उन्हें मिल रहे संसाधनों को वह हल्का बता रहे। कर्मचारियों का तर्क है कि सरकार ने सिर्फ नगर परिषद को यह जिम्मा सौंप दिया, लेकिन संसाधन गुणवत्ता वाले नहीं मिल रहे।
रिश्तेदार भी बनाने लगे दूरिया
महामारी से मौत के बाद अब अंतिम संस्कार में रिश्तेदार भी दूरिया बनाने लग गए। शुक्रवार को भी ऐसा ही हुआ। मृतका के बेटा नहीं होने से सिर्फ बेटियों के छोटे बच्चे ही मुक्तिधाम पहुंचे, जिन्हें दूर रखा।
तब भी हुई थी बूंदी शर्मसार
27 अप्रेल 2021 को भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था। जिसमें 17 वर्षीय मासूम को किसी के नहीं आने पर डेढ़ घंटे बाद घर की महिलाओं के साथ अपने पिता का स्वयं अंतिम संस्कार करना पड़ा था।
ऐसा कभी नहीं सोचा था। नगर परिषद के कर्मचारी संक्रमितों का अंतिम संस्कार कराने से हाथ खड़े करने लग गए। जबकि राज्य सरकार उन्हें लाखों रुपये के संसाधन उपलब्ध करा रही। इस मामले में उच्चाधिकारियों को गंभीरता दिखानी चाहिए।
महेश जिंदल, जिला उपाध्यक्ष (संक्रमितों का दाह संस्कार करा रहे), विहिप बूंदी
कर्मचारियों को अंतिम संस्कार के लिए जो सामग्री दी गई उस पर उनका कुछ ऐतराज था। बाद में उन्होंने पहुंचकर कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार करा दिया। मुक्तिधाम पर पहुंचकर सारी जानकारी जुटाई थी, सब संतुष्ट थे।
महावीर सिंह सिसोदिया, आयुक्त, नगर परिषद, बूंदी

 

4 घंटे तक खुले मैदान में अपने पिता के शव को गांव पहुंचाने की एम्बुलेंस चालकों से गुहार लगाता रहा बेबस बेटा
बूंदी से देई जाने के किसी ने मांगे 7 तो किसी ने मांगे 5 हजार रुपये
बूंदी. अपनी आंखों में आंसू लेकर एक बेबस व लाचार बेटा बूंदी चिकित्सालय के बाहर खुले मैदान में अपने पिता की दिवंगत देह के साथ बुधवार रात 4 घंटे से अधिक समय तक एंबुलेंस चालकों व उपस्थित लोगों से गांव पहुंचाने की भीख मांगता रहा, लेकिन संवेदनाएं जैसे मर गयी हो। किसी एंबुलेंस चालक ने उससे 7 हजार रुपये मांगे तो किसी ने 5 हजार रुपये मांगे। वह अपने पिता के शव के साथ गिड़गिड़ाता रहा कि एक दिन पहले वह अपने बीमार पिता को गांव से 15 सौ रुपए में किराए के वाहन में बूंदी लाया था, अब 2 हजार ले लो लेकिन आपदा में अवसर देखने वाले लालची एंबुलेंस चालकों ने एक नहीं सुनी। दु:खी बेटा अपना फोन डिस्चार्ज होने से घर पर भी परिजनों को सूचना नहीं कर पाया। बूंदी चिकित्सालय के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती देई के पास डेलपुरा गांव निवासी नानका मीणा की बुधवार रात मृत्यु हुई तो उनके साथ आए बेटे लड्डू मीणा पर भी जैसे दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा।
बेटे की बेबसी की सूचना पर कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा व सामाजिक कार्यकर्ता मनीष मीणा रात को ही चिकित्सालय पहुंचे और बेबस बेटे की पीड़ा सुनकर उन्होंने कोविड-19 जिला कलक्ट्रेट कंट्रोल रूम जाकर दिवंगत देह को गांव भेजने की व्यवस्था का आग्रह किया। जिला कलक्ट्रेट कंट्रोल रूम वालों ने एक बार तो हां कर ली, वहां से सीएमएचओ कंट्रोल रूम और नगर परिषद के कंट्रोल रूम को निर्देश भी दिए लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। वापस चिकित्सालय आकर कांग्रेस नेता शर्मा ने एंबुलेंस चालक से ढाई हजार रुपये में छोडऩे को कहा और उपस्थित रात्रि ड्यूटी डॉक्टर डॉ. रघुवीर मीणा ने भी मानवता की दुहाई दी तो चालक ने एक बार हां करली लेकिन अगले ही क्षण वह नजर चुराकर चिकित्सालय से एंबुलेंस लेकर ही भाग गया। वहां उपस्थित लोगों ने भी कुछ एंबुलेंस चालकों को फोन किया लेकिन मनमाने पैसे नहीं मिलने की आशंका में कोई तैयार नहीं हुआ। बाद में रात 1 बजे निजी वाहन की व्यवस्था कर उसे गांव भेजा।
जवान बेटे के शव के साथ परेशान हुए पिता
इधर, एक बेटा अपने पिता के शव के साथ खुले मैदान में रो रहा था। उधर कोविड वार्ड में जयपुर निवासी राजस्थान पुलिस के सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर के 33 वर्षीय बेटे की मृत्यु हो गयी। अपने बेटे के शव को जयपुर लेकर जाने के लिए वाहन की व्यवस्था के लिये मदद के लिए उन्होंने कलक्ट्रेट व नगर परिषद कंट्रोल रूम में भी सूचना दी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। बेबस पिता रात को 2 बजे मदद के लिये पार्षद टीकम जैन के पास पहुंचे। फिर एंबुलेंस चालक आदिल के सहयोग से बिजोलिया से एंबुलेंस मंगवाई और तडक़े 4 बजे शव को जयपुर के लिए रवाना किया।

pankaj joshi Photographer
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