1000 पुरुष, 900 महिलाओं को डायबीटिज, तेजी से बढ़ रहे मरीज

ranjeet pardeshi

Publish: Nov, 14 2017 12:21:12 (IST)

Burhanpur, Madhya Pradesh, India
1000 पुरुष, 900 महिलाओं को डायबीटिज, तेजी से बढ़ रहे मरीज

- मधुमेह दिवस

बुरहानपुर. मधुमेह यानी डायबीटिज के मरीज। यह बीमारी का नाम सुनकर ही शरीर में कांटे आने लगते हैं। इसके बाद भी लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर सचेत नहीं है। यही वजह है कि बुरहानपुर में तेजी से डायबीटिज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। रिकॉर्ड अनुसार तो 1 हजार पुरुष और 900 महिलाएं उपचारत है, लेकिन ऐसे कई निजी अस्पताल भी जहां पर ऐसे मरीजों का इलाज चलता है। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी की रोकथाम के लिए जागरुकता रैली भी निकाली।
वर्तमान जीवन शैली में अत्याधिक तनाव के कारण मधुमेह के रोगी बढ़ते जा रहे हैं। देश में हर छटवा व्यक्ति मधुमेह रोग से पीडि़त है। इस बीमारी से बुरहानपुर के लेाग भी घिरे हुए हैं। डॉक्टर का कहना है कि जीवन शैली में परिवर्तन और संतुलित आहार से बीमारी से बचा जा सकता है। सिविल सर्जन डॉक्टर शकील अहमद खान के अनुसार मधुमेह पुरानी बीमारी है, जो व्यक्ति के साथ आजीवन रहती है। इसके कारण शरीर में इंसुलिन का कम उत्पादन होता है। या इंसुलिन रहता ही नहीं है। बीमारी को दो श्रेणियों में रखा है। टाइप १ मधुमेह का मतलब है शरीर का इंसुलिन ना बन पाना और टाइप २ का मतलब है शरीर में इंसुलिन की मात्रा काफी न होना या मौजूद इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल न हो पाना। जिसके कारण ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जाता है और रक्त में उसकी मात्रा बढ़ जाती है।
३६२ की जांच में १९ नए मरीज मिले
मधुमेह दिवस के उपलक्ष्य में जब लायंस क्लब द्वारा बस स्टैंड, निमाड़ अस्पताल, डाकवाड़ी, किरण पैथोलॉजी में शिविर लगाया तो कुल ३६२ मरीजों की जांच की गई। इसमें २७ पुराने मरीज और नए १९ मीज पाए गए।
शहर में तेजी से बढ़ रही बीमारी
महिलाओं में बढ़ते मधुमेह को लेकर किए गए शोध के मुताबिक यह शहरी इलाकों की महिलाओं में 17 फीसदी और ग्रामीण में 10 फीसदी की दर से बढ़ रहा है।
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा मधुमेह मरीज वाला दूसरा देश है। जहां मरीज करीब 70 मिलियन ७ करोड़। पहले नंबर में चीन 110 मिलियन है।
देशभर में चल रहे प्रयोग
अच्छी खबर
नेशनल बोटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट एंड सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एरोमेटिक मेडिशिनल एरोमेटिक प्लांट एक आयुर्वेदिक दवा पर ट्रायल कर रही है। जिसका सफलता प्रतिशत 67 फीसदी बताया जा रहा है। इससे मरीजों पर आ रहे दवाइयों का खर्च भी कम होगा।

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