28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अब राह हुई आसान- हिंदी में करें एमबीए की पढ़ाई

वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय हिंदी में एमबीए की शुरूआत करने वाला देश का दूसरा विश्वविद्यालय है

2 min read
Google source verification

image

Vikas Gupta

Aug 23, 2015

Mahatma Gandhi International Hindi University, War

Mahatma Gandhi International Hindi University, Wardha

आम तौरपर भारतीय स्टूडेंट्स
की समस्या होती कि अंग्रेजी भाषा पर उनकी पकड़ कमजोर है। जिसके कारण उनको विभिन्न
शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में भाषा समझने में परेशानी होती है। आज के दौर में दिन-ब-दिन
हिंदी के बढ़ते महत्व को देखते हुए हिंदी भाषा पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।
इसको देखते हुए महाराष्ट्र में हिंदी में मैनेजमेंट इन बिजनस ऎडमिनिस्ट्रेशन
(एमबीए) की पढ़ाई शुरू की गई है। इसकी अवधि दो वर्षीय है । यह पूर्णकालिक कोर्स है।
इस कोर्स के शुरू होने से न सिर्फ हिंदी भाषी युवाओं को लाभ मिलेगा, बल्कि हिंदी के
इतर दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं को जानने वाले भी एमबीए कर सकते हैं।

वर्धा
स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय हिंदी में एमबीए की शुरूआत
करने वाला देश का दूसरा विश्वविद्यालय है इससे पहले बनारस का संपूर्णानंद संस्कृत
विश्वविद्यालय में हिंदी में एमबीए पढ़ाया जाता है। वर्धा में एमबीए कोर्स की
औपचारिक शुरूआत 12 अगस्त को की गई। इसको लेकर प्रतिकुलपति प्रो. चित्तरंजन मिश्र ने
कहा कि हिंदी में एमबीए की शुरूआत होने से हिंदी पढ़ने वाले या हिंदी में रूचि रखने
वाले विद्यार्थियों को काफी लाभ मिलेगा। उनके करियर का विकास होगा और उन्हें आगे
बढ़ने का अच्छा मौका मिलेगा, क्योंकि हम ज्ञान और विज्ञान, दोनों को हिंदी भाषा में
रख सकेंगे। इससे हिंदी भाषा का विकास भी होगा और हम अपनी आधुनिकता को हिंदी में भी
बता सकेंगे।

इस कोर्स से गैर हिंदी भाषी छात्र-छात्राओं को भी एमबीए करने
से काफी लाभ होगा। इस कोर्स को करने से विद्यार्थियों का विकास होगा और वे हिंदी के
जरिए ज्ञान-विज्ञान और व्यापार के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। विश्वविद्यालय की
इस पहल के बारे में शिक्षाविद् का कहना है कि हिंदी में एमबीए की शुरूआत एक अच्छी
पहल है। अंग्रेजी भाषा देश के हर कोने में पहुंच कर हिंदी को लुप्त करती जा रही है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा अंग्रेजी बोलने वाला देश भारत है, जहां की
राष्ट्रभाषा हिंदी मानी जाती है। हिंदी में एमबीए लाने की पहल से हिंदी को आगे
बढ़ाया जा सकता है।

ये भी पढ़ें

image