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पुलिस के संरक्षण में लिफ्टर लगाकर रेत खोद रहे दबंगों ने कर दिया कत्ल

- ईशानगर क्षेत्र के सीगोन गांव में बीती रात हुई हत्या, दो गुटों में 22 साल से चल रही खूनी रंजिश

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Chhatarpur

Chhatarpur,

छतरपुर। ईशानगर पुलिस के संरक्षण में इन दिनों ग्राम दिदौल के समीप धसान नदी पर लिफ्टर लगाकर रेत का अवैध कारोबार धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसी कारोबार में लिप्त कुछ दबंगों के द्वारा पुरानी रंजिश के चलते अपने ही गांव के एक 33 वषीज़्य युवक को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया है। ग्राम सीगोन में सामने आई कत्ल की यह घटना पुलिस के लिए इसलिए बड़ा फेलियर है क्योंकि हत्या करने वाले और मृतक का परिवार दोनों के बीच ही कई वषोज़्ं से रंजिश चल रही थी। मृतक खुद हत्या के मामले का एक आरोपी था जबकि जिन लोगों ने हत्या की वे भी कई मुकदमों में आरोपी हैं। अपराधियों के बीच खुलकर चल रहे इस गैंगवार पर ईशानगर थाना प्रभारी रूपनारायण पटैरिया का कोई नियंत्रण न होने के कारण उक्त आपराधिक घटना सामने आई है।
यह है पूरा मामला :
जानकारी के मुताबिक ग्राम सीगोन निवासी भोपाल सिंह की गांव के ही लगभग आधा दर्जन लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक के भाई जयपाल सिंह ने आरोप लगाए हैं कि गांव के रानू राजा, शानू राजा, प्रताप राजा और प्रीतम राजा सहित दो अन्य लोगों ने बीती रात करीब 9 बजे उसके बड़े भाई भोपाल सिंह को उस वक्त गोली मार दी जब वह ट्रेक्टर लेकर अपने खेत पर जा रहा था। हत्यारोपियों ने अपने चाचा महेन्द्र सिंह की हत्या का बदला लेने के लिए उक्त वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस ने बहरहाल सभी के खिलाफ हत्या का मामला दजज़् कर लिया है।
बदले की आग में 22 साल से झुलस रहा सीगोन, अब तक तीन हत्याएं :
ईशानगर थाना क्षेत्र का ग्राम सीगोन पिछले 22 सालों से दुश्मनी और बदले की आग में झुलस रहा है। इस गांव में दो पक्षों के बीच पिछले 22 वषोज़्ं में हत्या की तीन वारदातों, हत्या के प्रयास के तीन मामले और छोटी मारपीट के अनगिनत मामले सामने आ चुके हैं। 90 के दशक में इस गांव में सबसे पहले जंगलराज की शुरूआत हुई थी जब सीगोन निवासी महेन्द्र सिंह ने महेन्द्र गुप्ता को धमकी दी थी। इसके बाद महेन्द्र गुप्ता ने महेन्द्र सिंह की हत्या की योजना बनाई और 20 जनवरी 1997 को दोपहर साढ़े तीन बजे बस स्टेण्ड ईशानगर पर महेन्द्र सिंह को गोली मार दी गई थी। इस मामले में महेन्द्र गुप्ता पर धारा 307 का मुकदमा दजज़् हुआ और उसे सात साल की सजा हुई। बदले की भावना में महेन्द्र सिंह सीगोन और उसके रिश्तेदारों ने 21 दिसम्बर 1998 की शाम साढ़े 7 बजे महेन्द्र गुप्ता के भाई जीतेन्द्र गुप्ता की गदज़्न काटकर नृशंस हत्या की थी। इधर सात साल की जेल काटने के बाद महेन्द्र गुप्ता बाहर आया तो उसने अपने भाई जीतेन्द्र गुप्ता की हत्या का बदला 2004 में लिया। महेन्द्र गुप्ता ने खुद को शराब के एक केस में जेल में बंद कराया और फिर सीगोन के ही ठाकुरों के माध्यम से उसी ईशानगर चौराहे पर महेन्द्र सिंह सीगोन की 7 गोलियां मारकर हत्या करा दी। हत्या के इस मामले में भोपाल सिंह, महेश लुहार, लाखन सिंह, सुरेन्द्र सिंह, अरूण गुप्ता, महेन्द्र गुप्ता एवं आनंद असाटी पर आरोप लगा था। मृतक भोपाल सिंह इसी मामले में हत्या का आरोपी था। अब महेन्द्र सिंह की हत्या का बदला लेने के लिए उसके हत्यारोपी भोपाल सिंह को मौत के घाट उतारा गया है और हत्या की इस वारदात को महेन्द्र सिंह के परिवार के लोगों ने अंजाम दिया है। ग्राम सीगोन में 22 साल से यही खूनी खेल चल रहा है। जिन लोगों ने कल हुई हत्या की वारदात को अंजाम दिया है वे सभी पुलिस की नजर में निगरानीशुदा हैं फिर भी उन्हें पुलिस संरक्षण में ही रेत का कारोबार करने की इजाजत दी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि ईशानगर थाना पुलिस के संरक्षण में फलफूल रहा यह जंगलराज आखिर कब तक चलेगा?

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