scriptVehicle operators are not paying attention to installing high security | हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट लगाने को लेकर वाहन संचालक नहीं दे रहे ध्यान | Patrika News

हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट लगाने को लेकर वाहन संचालक नहीं दे रहे ध्यान

locationछतरपुरPublished: Jan 31, 2024 07:37:20 pm

Submitted by:

Unnat Pachauri

नए नियम के अनुसार नम्बर प्लेट नहीं होने पर की जाएगी चालानी कार्रवाई, हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट लगाने आसान होगी चोरी के वाहन की पहचान

कार से हटाई नम्बर प्लेट
कार से हटाई नम्बर प्लेट
छतरपुर. देश में 1 अप्रैल 2019 से सभी नए वाहनों पर हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट लगाई जाएगी। ये प्लेट वाहन डीलर ही लगाकर देंगे। पुराने वाहनों में वाहन मालिक आरटीओ और वाहन एजेंसी में सम्पर्क कर ये लगवा सकते हैं। पहली बार दो पहिया से बड़े सभी वाहनों पर तीसरी नंबर प्लेट भी लगाई जाएगी। यह स्टीकर के रूप में वाहनों के विंड स्क्रीन पर लेफ्ट साइड में लगाई जाएगी, जिस पर वाहन की जानकारी दर्ज होगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नोटिफिकेशन के बाद शासन ने इसके लिए प्रक्रिया और फॉर्मेट जारी किया है। इसके तहत वाहन निर्माता को वाहन के साथ ही नंबर प्लेट भी देना होगी, जिस पर होलोग्राम और विशेष अंक भी दर्ज होंगे। इसी पर वाहन डीलर द्वारा आरटीओ से मिलने वाले रजिस्ट्रेशन नंबर को एम्ब्रोस और प्रिंट करना होगा। इसके लिए वाहन मालिक से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। बल्कि यह गाड़ी की कीमत के साथ ही शामिल होगा। वाहन डीलर को प्लेट की एम्ब्रोसिंग और प्रिंटिंग के लिए अपने शोरूम पर ही सेटअप स्थापित करना होगा। हालांकि पुराने वाहनों के बारे में अभी कुछ खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन पुराने वाहनों में मप्र में १५ जनवरी से पहले तक लगवाने की तारीख तय की थी। पर अभी तक बड़ी संख्या में वाहनों में एचएसआरपी नम्बर प्लेट नहीं लगवाई है।
पहले भी किए गए थे प्रयास

मप्र में फरवरी 2012 से उत्सव लिंक कंपनी द्वारा वाहनों में हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट लगाने का काम शुरू किया गया था। बाद में कई शिकायतों के चलते शासन ने कंपनी का ठेका निरस्त कर दिया गया था। इसके चलते प्रदेश में 18 अक्टूबर 2014 के बाद से वाहनों पर एचएसआरपी लगना बंद कर दिया था।
इस प्लेट में स्नैप लॉक सिस्टम भी है

ये एक तरह का पिन है जो कि वाहन के हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट को आपके वाहन से जोड़ता है, इसे विभाग द्वारा ही लगाया जाएगा। यह किसी स्क्रू या फिर नट-बोल्ट की तरह नहीं है, जिसे आप स्क्रू ड्राईवर या फिर पाने से खोल सकेंगे। ये पिन एक बार आपके वाहन से प्लेट को पकड़ लेगा तो यह दोनों ही तरफ से लॉक होगा। जो कि किसी से भी नहीं खुलेगा या किसी के द्वारा खोला नहीं जा सकेगा।
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के फायदे

- हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट काफी फायदेमंद साबित होगी, इससे वारदातों और हादसों पर लगाम लगेगी. क्योंकि इस प्लेट में क्रोमियम होलोग्राम वाले हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट में ७ डिजिट का लेजर कोड यूनिक नंबर है। इस नंबर के जरिए किसी भी हादसे या आपराधिक वारदात होने की स्थिति में वाहन और इसके मालिक के बारे में तमाम जानकारियां उपलब्ध हो सकेंगी।
- इन नंबर प्लेट पर आईएनडी लिखा होगा, साथ ही क्रोमियम प्लेटेड नंबर और इंबॉस होने के कारण इस नंबर प्लेट को रात के वक्त भी वाहनों पर कैमरे के जरिए नजर रखना संभव होगा।
- पहले अपराधी वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ छेड़छाड़ करके भी फायदा उठा लेते थे, लेकिन अब इन नंबर प्लेट या सिक्योरिटी नंबर प्लेट पर ऐसा करना संभव नहीं होगा।

- इन नंबर प्लेट पर लेजर डिटेक्टर कैमरा लगा होगा, जिससे किसी भी वाहन के बारे में कभी भी आसानी से पता लगाया जा सकेगा।
- देश भर में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने के साथ ही इंजन, चेसिस नंबर सहित तमाम यूनीक जानकारियां भी नेशनल डाटाबेस में होंगी, इससे पूरे देश के वाहनों का एक सेंट्रलाइज्ड रिकॉर्ड होगा।
- किसी हादसे या दुर्घटना के दौरान वाहन जल जाते हैं, इस दौरान सबसे बड़ी समस्या ये होती है कि वाहन की नंबर प्लेट भी जल जाती है। लेकिन इस हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट के साथ ऐसा नहीं होगा। वाहन कितना भी बुरी तरह जल जाए लेकिन इस प्लेट पर उभरे हुए अंकों और अक्षरों को छू कर अंदाजा लगाया जा सकेगा कि वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर क्या है।
इनका कहना है

हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट व तीसरी नंबर का स्टीकर के कई फायदे होंगे। इसमें नंबर के साथ ही राज्य का नाम, प्रथम रजिस्ट्रेशन का वर्ष और होलोग्राम भी लगा होगा। ये 100 बाय 60 एमएम साइज का सेल्फ डिस्ट्रक्टिव होलोग्राम स्टीकर होगा। जिसे निकाला नहीं जा सकेगा। इस स्टीकर के कारण चोरी के वाहन भी पकड़े जा सकेंगे। हम जल्द से जल्द सभी वाहनों में इन प्लेटों को लगवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद कार्रवाई शुरू की जाएगी।
विक्रमजीत सिंह कंग, आरटीओ, छतरपुर

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