CM SIR… हजारों की जलीं चिताएं सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं... फिर कैसे मिलेगी पेंशन

मुख्यमंत्री की पांच हजार रुपए की घोषणा पर प्रतिक्रिया, आंकड़ों के खेल से ज्यादातर शोक संतप्त परिवारों को नहीं मिल पाएगा लाभ

By: prabha shankar

Published: 14 May 2021, 11:36 AM IST

छिंदवाड़ा। अप्रैल से लेकर मई तक सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान हजारों की संख्या में कोरोना संक्रमण से ग्रस्त लोग चल बसे और श्मशान घाट में उनके आंकड़े भी दर्ज हुए, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में केवल 114 मृतक ही आ पाए।
इसका सर्वाधिक नुकसान कोरोना संदिग्ध के नाम पर मृत लोगों के परिवारों को उठाना होगा।
यह आम प्रतिक्रिया गुरुवार को तब सामने आई, जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना मृतकों के अनाथ परिवारों को पांच हजार रुपए भरण पोषण के लिए देने की घोषणा की है।
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में अप्रैल से मई तक पूरे जिले के अधिकांश शोक संतप्त परिवारों में किसी ने बच्चों के पिता एवं अभिभावक को खोया तो कोई बुजुर्गों के बुढ़ापे की लाठी युवा बेटे-बेटियों को असमय दुनिया से जाते देखता रहा। संक्रमण की इस आपाधापी में किसी के आरटीपीसीआर टेस्ट हो पाए तो अधिकांश सरकारी आंकड़ों के खेल को समझ नहीं पाए। किसी के परिजन को जब तक ये ध्यान आ पाता, तब तक लोग स्वर्ग सिधार गए। इसके चलते जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में मृत लोग तक संदिग्ध श्रेणी में आ गए। निजी अस्पतालों के हाल को समझा जा सकता है। इन सबका अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया। परतला, देवर्धा मोक्षधाम और कब्रस्तान में इसके गवाह मिल जाएंगे लेकिन दुर्भाग्य से स्वास्थ्य विभाग के मृत्यु प्रमाणपत्र में यह लिखा नहीं होगा।
ये सब इसलिए याद आ रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ने ऐसे अनाथ परिवारों के लिए पांच हजार रुपए महीने की पेंशन की घोषणा की है। इस घोषणा का जब क्रियान्वयन होगा, तब क्या जिम्मेदार अधिकारी मृत्यु प्रमाणपत्र में कोरोना नहीं मांगेंगे। इसके बिना क्या ये पेंशन मिल पाएगी?
यह सवाल हर किसी के मन में आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की भेंट ऐसे हजारों परिवार पेंशन से वंचित हो जाएंगे।


चले गए 130 शिक्षक, 21 वन कर्मचारी
सरकारी मौत के आंकड़ों के खेल को समझें तो शिक्षक संघ खुद गांव-शहर की जानकारी एकत्र कर दे चुका है कि उनके विभाग के 130 शिक्षक अकेले कोरोना से मृत हो गए तो वन विभाग के पास 21 कर्मचारियों का रिकॉर्ड है। इसके अलावा सहकारिता में कम से कम नौ कर्मचारी ऐसे बताए गए। फिर नगर निगम समेत अन्य दूसरे विभागों के कर्मचारी भी ले लीजिए तो कम से कम दो सौ कर्मचारी तो सरकारी विभाग के मिल जाएंगे। इनमें से अधिकांश के रिकॉर्ड में भी कोरोना पॉजीटिव नहीं मिलेगा। फिर आम आदमी तो दूर की बात है।

जिन्होंने परिजनों को खोया, वे सामने आकर लड़ें
अप्रैल से मई तक जिले के जिन परिवारों ने अपने परिजनों को खोया और उनके घर परिवार में खाने कमानेवाला कोई नहीं है, वे मुख्यमंत्री की पेंशन योजना के पात्र समझते हैं, उन परिवारों को अपने हक की लड़ाई के लिए आगे आना होगा। जिले के जनप्रतिनिधि खासकर विपक्ष के विधायकों को ये सवाल भी उठाना होगा कि जिनके मृत्युु प्रमाणपत्र में कोरोना पॉजिटिव न हो तो वे कैसे सीएम की इस योजना का लाभ ले सकते हैं। ऐसा ही चलता रहा तो केंद्र सरकार की ऐसे मृतकों के लिए कोई योजना आई तो 114 में से पात्र को ही लाभ होगा।

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