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District Hospital: दवा के खेल में मरीज परेशान, प्रबंधन बेपरवाह

locationछिंदवाड़ाPublished: Nov 24, 2023 11:20:41 am

Submitted by:

prabha shankar

स्टोर में पर्याप्त स्टॉक, लेकिन दवा वितरण केंद्र में दवाइयां नहीं मिलने से मरीज परेशान

Patients troubled in medicine game
Patients troubled in medicine game

छिंदवाड़ा। जिला अस्पताल प्रबंधन दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। जिला अस्पताल के दवा स्टोर में ओपीडी के लिए शासन से स्वीकृत 186 प्रकार की दवाइयों में से उपलब्धता तकरीबन 160 दवाइयों की है। जिला अस्पताल की ओपीडी संभालने वाले जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का अलग-अलग दिन तय है, जो मरीजों को देखते तथा दवाएं लिखते हैं। दवा वितरण पर पहुंचने पर पर्ची में लिखी कई दवाइयां उन्हें नहीं मिलती हैं। इससे उन्हें बाहर निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं।


दवाइयां खरीद रहे बाहर से

ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की बात की जाए तो उन्हें कई प्रकार की दवाइयां दवा वितरण केंद्र से नहीं मिल पा रही हैं। वहां से एंटीबायोटिक, शुगर, बीपी, खांसी की सीरप, बच्चों की एंटीवायटिक, दर्द व सूजन की दवा, उल्टी, एंटी एलर्जी, हायर एंटीवायटिक, महिलाओं का प्रोटीन पाउडर, ताकत का सीरप, आयरन का सीरप, हार्ट की दवाइयां, गला इंफेक्शन की दवाइयां नहीं मिल रही हैं, जिससे वे बाहर से दवाइयां खरीद रहे हंै। सूत्रों की मानें तो दवा वितरण केंद्र में 75 प्रतिशत दवाइयों का टोटा बना हुआ है, जिसे प्रबंधन सिरे से नकार रहा है।


बाहर की दवाएं ना लिखने के निर्देश

स्वास्थ्य विभाग के निर्देश की बात की जाए तो जिला अस्पताल की ओपीडी में बैठे डॉक्टरों को मरीजों को बाहर की दवाइयां नहीं लिखनी हैं, लेकिन फिर भी डॉक्टर बाहर की दवाइयां लिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि डॉक्टर जो दवाइयां लिख रहे हैं, उसकी कई प्रकार की दवाइयों में से कुछ जिला अस्पताल के दवा वितरण केंद्र में उपलब्ध हैं। ज्यादातर उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें वह दवाइयां लिखनी पड़ रही हैं, ताकि मरीज जल्दी ठीक हो जाए। जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीज टिटनेस इंजेक्शन के लिए भी परेशान होते हैं।


जिला अस्पताल
में दवाइयों की कोई कमी नहीं है। जितनी उपलब्धता होती है उतनी दवाइयों स्टोर में उपलब्ध है। टिटनेस इंजेक्शन की बात की जाए तो उसकी सप्लाई शासन की ओर से नहीं हो रही है। कई बार स्थानीय स्तर पर खरीदी की जाती है।
डॉ एमके सोनिया, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, छिंदवाड़ा

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