चार बगीचों का शहर, मात्र एक ही उपयोगी

दो बगीचे जीर्णशीर्ण, एक बगीचे में दुकान निर्माण

इंदिरा गार्डन के हालात अधिक खराब

 

राजेंद्र धोका

बदनावर. लगभग 30 हजार की आबादी के शहर में चार बगीचे हैं, लेकिन इनमें से उपयोगी केवल एक ही है। दो बगीचे जीर्णशीर्ण होकर अनुपयोगी हो गए हैं। चारों बगीचे नगर परिषद के अधीन है। एक बगीचा दुकान निर्माण की भेंट चड़ गया है।
किला दरवाजा स्थित हरिसिंह उद्यान ही अब लोगों के परिवारों के लिए कुछ समय बिताने का स्थान बचा है। नागेश्वर रोड स्थित इंदिरा गार्डन के हालात अधिक खराब है। नियमित रखरखाव के अभाव में झूले चकरी सड़ गए हैं, बैठने की बेंचे भी गायब हो गई है। बड़ी चौपाटी इंदिरा कालोनी के गार्डन के हाल भी कुछ ऐसे ही है। परिसर में गाजर घास पनप जाने से बैठना दुभर हो जाता है। बलवंती तट स्थित लक्ष्मीबाई बालोद्यान दुकान निर्माण की भेंट चड़ जाने से लोगों से यह सुविधा छिन गई है। अब बस गणेश मंदिर स्थित गार्डन ही लोगों के लिए दो पल सुकुन के बिताने का साधन बचा है। नगर की भौगोलिक स्थिति का आकलन किया जाए तो बड़ी चौपाटी, नागेश्वर रोड, बलवंती तट के पास एवं किला दरवाजा पर बने गार्डन क्षेत्र को चार भागों में बांटने से उस क्षेत्र के लिए लोगों को नजदीक ही गार्डन की सुविधा थी।

हादसे हो रहे
सुबह शाम तफरी करने वालों को मजबूरी में टू वे रोड, फोरलेन या स्टेट हाई वे पर वाकिंग करना पड़ रही है। तेज गति से गुजरते वाहनों की चपेट में आने का अंदेशा बना रहता है। लोगों का कहना है, जैसी व्यवस्था हरिसिंह गार्डन में है वैसे ही अन्य गार्डन को भी विकसीत किया जाना चाहिए। बुजुर्ग, बीमार एवं बच्चों को इससे लाभ मिल सकेगा।

shyam awasthi Desk
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