script राजाखेड़ा अस्पताल में एक साल में 1 भी ऑपरेशन नहीं | Not even a single operation in Rajkheda hospital in a year | Patrika News

राजाखेड़ा अस्पताल में एक साल में 1 भी ऑपरेशन नहीं

locationधौलपुरPublished: Dec 24, 2023 12:00:15 pm

Submitted by:

rohit sharma

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं चला रखी हैं। जिससे गरीब वर्ग के लोगों को बिना पैसे खर्च किए उनके ही क्षेत्र में बेहतर इलाज मिल सके।

राजाखेड़ा अस्पताल में एक साल में 1 भी ऑपरेशन नहीं
राजाखेड़ा अस्पताल में एक साल में 1 भी ऑपरेशन नहीं
धौलपुर. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं चला रखी हैं। जिससे गरीब वर्ग के लोगों को बिना पैसे खर्च किए उनके ही क्षेत्र में बेहतर इलाज मिल सके। जिले के राजाखेड़ा में बना सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र 60 बेड का था लेकिन अब उप जिला अस्पताल होने पर 100 बेड का कर दिया गया है। इन दिनों यहअस्पताल वेंटिलेटर पर है। अस्पताल में व्यवस्थाएं नहीं होने से मरीज दूसरे अस्पतालों में पहुंच रहे है।
राजाखेडा़ उप जिला अस्पताल अब केवल रैफरल अस्पताल बना हुआ है। यहां केवल सर्दी, जुखाम और बुखार के मरीजों का उपचार किया जाता है। अन्य गंभीर मरीज व दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों वह जटिल प्रसव वाली गर्भवती महिलाओं को प्राथमिक उपचार के बाद इनको रैफर कर दिया जाता है। इसके कारण मरीजों व गर्भवती महिलाओं के परिजनों को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। जबकि सरकार ने इसके लिए कई योजनाओं के माध्यम से लोगों को इलाज की सुविधा दे रखी हैं। लेकिन यहां मरीजों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
एक साल से नहीं हुआ कोई ऑपरेशन

चिकित्सालय में लगभग एक साल से कोई ऑपरेशन नहीं हुआ है। अस्पताल में कोई जनरल सर्जन चिकित्सक व एनेस्थीसिया नहीं मिलने से यहां पर ऑपरेशन होना बंद हैं। राजाखेड़ा अस्पताल में नंवबर 2022 से लेकर अभी तक एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ है। गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन भी नहीं होते। अस्पताल में गयनेकोलॉजिस्ट विशेषज्ञ महिलाओं को उपचार करते है। लेकिन ओटी ऑपरेशन नहीं होते हंै।
ओटी पर लगा है ताला

जहां एक और राज्य सरकार संस्थागत प्रसव कराने के लिए कई माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जाता है। अस्पताल में महिलाओं को सुविधा मिलें। इसके लिए यहां पर ऑपरेशन थियेटर राज्य सरकार ने लगभग बीस लाख रुपए की लागत से खोला था। लेकिन यह थियेटर केवल कभी-कभार होने वाले नसंबदी ऑपरेशनों के ही काम आ रहा है। अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ प्रशिक्षित स्टाफ नहीं होने की हालात में ऑपरेशन योग्य मरीजों को जिला मुख्यालय पर रैफर करने का सिलसिला बना हुआ है। इससे जिला मुख्यालय पर भार पड़ रहा है। गरीब गर्भवती महिलाओं को मजबूरी में उन्हें निजी चिकित्सालयों में प्रसव करवाने पड़ रहे हंै। इसके कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में केवल नसबंदी ऑपरेशन

उप जिला अस्पताल में बना ऑपरेशन थियेटर का उपयोग कभी कभार होने वाले नसंबदी ऑपरेशनों के दौरान ही होता है। बाकी समय में यह थियेटर में बड़ी लागत के उपकरण बंद पड़े हैं। जिससे मरीजों को होने वाली परेशानी वह 35 किलो मीटर दूर जिला अस्पताल लेकर पहुंचती है। नसबंदी के समय जिले से चिकित्सकों की टीम पहुंचती है। स्थानीय ओटी का उपयोग नहीं होने से यहां उपकरण खराब हो रहे हैं। साथ ही क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

विभागीय अधिकारी भी लापरवाह

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के जिला स्तर के आला अधिकारी भी कम जिम्मेदार नहीं है। जिले के साथ बड़े कस्बों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं को लेकर अधिकारी केवल बैठकों में ही जानकारी देकर इतिश्री कर लेते हैं। सरकार की ओर भवन निर्माण और उपकरणों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन इसके बाद भी इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। हालांकि, अस्पताल में संविदा के नाम पर फौज भरने में अधिकारी कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। जिला अस्पताल में ये खूब दिख जाएगा।

अस्पताल में सामान्य प्रसव होते हंै। ऑपरेशन करने के लिए एनेस्थीसिया व सोनोग्राफी के लिए चिकित्सक नहीं होने से इन्हें जिला अस्पताल भेज दिया जाता है। ऑपरेशन थियेटर चालू हो जाएगा। इससे गर्भवती महिलाओं को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
- डॉ.रामनरेश कुमार, बीसीएमओ, राजाखेड़ा

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