44 गांवों के हजारों लोगों के सूखे हैं कंठ, सात साल से चल रहा काम अब तक नहीं मिला पानी

सैपऊ. उपखंड के 44 गांव के ग्रामीणों के लिए स्वीकृत की गई क्षेत्रीय ऑफसेट योजना का काम पूरा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। पिछले लगभग 7 वर्ष से कछुआ चाल की गति से परियोजना का काम चल रहा है। ऐसे में हजारों ग्रामीणों के कंठ पानी का इंतजार कर रहे हैं। सरकारी अधिकारी एवं परियोजना का काम कर रही फर्म की लापरवाही के कारण परियोजना का काम लगातार पिछड़ रहा है।

By: Naresh

Updated: 22 Nov 2020, 12:45 PM IST

44 गांवों के हजारों लोगों के सूखे हैं कंठ, सात साल से चल रहा काम अब तक नहीं मिला पानी

- सैपऊ में 44 गांवों की पेयजल योजना की कछुआ चाल
सैपऊ. उपखंड के 44 गांव के ग्रामीणों के लिए स्वीकृत की गई क्षेत्रीय ऑफसेट योजना का काम पूरा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। पिछले लगभग 7 वर्ष से कछुआ चाल की गति से परियोजना का काम चल रहा है। ऐसे में हजारों ग्रामीणों के कंठ पानी का इंतजार कर रहे हैं। सरकारी अधिकारी एवं परियोजना का काम कर रही फर्म की लापरवाही के कारण परियोजना का काम लगातार पिछड़ रहा है। जिसके कारण उपखंड के 44 गांव के ग्रामीणों के कंठ पानी से अभी भी सूखे हैं। ग्रामीण एक एक बूंद पानी की जद्दोजहद कर गुजर बसर कर रहे हैं। लेकिन सिस्टम एवं उसके जिम्मेदार कुंभकरण की नींद में सोए हुए हैं। वर्ष 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने क्षेत्रीय ऑफसेट योजना को सवा 32 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति जारी कर हरी झंडी दी थी। जिसकी जिम्मेदारी चेन्नई की फर्म में श्रीराम ईपीसी को दी गई थी। लेकिन फर्म की लेटलतीफी के कारण परियोजना अधर में लटक रही है।

खारे पानी की समस्या से मिलती निजात
गौरतलब है कि वर्ष 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने विधानसभा के अंतिम सत्र में सैपऊ उपखंड के 44 गांव के ग्रामीणों को खारे पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए चंबल लिफ्ट योजना से क्षेत्रीय ऑफसेट योजना को जोडऩे की हरी झंडी दी थी। सरकार ने सवा 32 करोड़ के टेंडर जारी कर चेन्नई की फर्म मैसर्स श्रीराम ईपीसी को परियोजना का काम करने का जिम्मा दिया था। जलदाय विभाग ने जुलाई 2015 में पानी सप्लाई शुरू करने के निर्देश भी दिए थे। वर्ष 2013 से अब तक परियोजना का काम कछुआ चाल से भी धीमी गति से चल रहा है। लगभग 7 वर्ष का समय गुजर जाने के बाद भी परियोजना का काम धरातल पर पूरा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। उपखंड इलाके के 44 गांव में खारे पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। खारे पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार ने योजना को हरी झंडी दी थी, लेकिन सिस्टम की नाकामी के कारण 44 गांव के ग्रामीणों के कंठ सूखे हैं। हालांकि जलदाय विभाग का दावा है कि परियोजना का काम अंतिम चरण में चल रहा है, लेकिन धरातल पर परियोजना की शुरुआत कब होगी, इसका जवाब किसी के भी पास नहीं है। उधर उपखंड इलाके के ग्रामीणों में प्रशासन एवं सिस्टम के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 7 वर्ष से परियोजना का काम चल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर परियोजना का काम पूरा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। सिस्टम की नाकामी की बात की जाए तो अभी तक आधा दर्जन गांव में टंकियों तक का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में समय पर पानी की सप्लाई शुरू होना ग्रामीणों के लिए सपने के समान साबित हो रहा है।

परौआ टंकी का निर्माण कार्य बंद
परियोजना में टंकियों का निर्माण कार्य कराया जाना था। जिसमें से कई टंकियों का लगभग काम पूर्ण हो चुका है, लेकिन परौआ टंकी का निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा और बंद पड़ा है। इस बारे में विभागीय अधिकारियों से बात की तो बताया दो ठेकेदार काम को अधूरा छोड़ कर चले गए हैं और अन्य से काम करवाएंगे।

इनका कहना है
मैं अभी एक माह पूर्व ही आया हूं। मुझे इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन जल्द ही परियोजना का काम पूरा किया जाएगा। जिससे ग्रामीणों को पानी मिल सके।
-सुभाष यादव , अधिशासी अभियंता, चंबल परियोजना धौलपुर।

इनका कहना है
कैथरी ग्राम पंचायत के कई गांवों में पानी की समस्या है और लंबे समय से चंबल परियोजना के पानी का इंतजार कर रहे हैं। इस बारे में प्रशासनिक अधिकारियों और विभागीय अधिकारियों से बात की है, लेकिन 7 वर्ष बीतने के बाद भी परियोजना का काम पूरा नहीं हुआ है। ऐसे ठेकेदार के खिलाफ ब्लैक लिस्ट की कार्रवाई होनी चाहिए।

-अजय कांत शर्मा, सरपंच, कैथरी
इनका कहना है
कूकरा माकरा गांव में पेयजल आपूर्ति हेडपंप के भरोसे है और कई जगह पानी की समस्या भी है। लंबे समय से लोग चंबल परियोजना के पानी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यह सपना पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है। ऐसे ठेकेदार के खिलाफ आज तक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।

-केके शर्मा, सरपंच कूकरा-माकरा

इनका कहना है
- कस्बे में पेयजल की एक गंभीर समस्या है। यहां के पानी में फ्लोराइड अधिक होने के कारण लंबे समय से लोग चंबल परियोजना के पानी का इंतजार कर रहे हैं, ताकि फ्लोराइड युक्त पानी से राहत मिल सके। लेकिन 7 वर्ष बीतने के बाद भी चंबल का पानी कस्बे वासियों को नहीं मिल पाया है। ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती।
- अर्जुन कुशवाह, सरपंच सैपऊ।

इनका कहना है
गांव तसीमो कई मोहल्लों में पेयजल की गंभीर समस्या है। इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है। लोग पेयजल संकट से जुड़े हैं। लोगों की उम्मीद 44 गांव की चंबल परियोजना से जुड़ी हुई है। केवल पानी मिलेगा। जिससे लोगों का पेयजल संकट दूर होगा। यह सपना 7 साल बीतने के बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। जलदाय विभाग से शिकायत करने के बाद भी पेयजल संकट का समाधान नहीं हुआ है। चंबल परियोजना के पानी से ही उम्मीद है।

- रामोतार फौजी, सरपंच प्रतिनिधि, तसीमो।

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