अगर आप भी करते हैं ज्यादा चीनी का सेवन, तो जानें इससे जुड़ी खास बातें

अगर आप भी करते हैं ज्यादा चीनी का सेवन, तो जानें इससे जुड़ी खास बातें

Vikas Gupta | Updated: 14 Jul 2019, 03:52:23 PM (IST) डाइट-फिटनेस

अधिक चीनी सेहत को नुकसान पहुंचाती है, पर बेवजह डरने की बात नहीं है। कई ऐसे भ्रम भी हैं, जिसकी सच्चाई को जानना जरूरी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लोगों को अपने खाने में मीठे की मात्रा कुल कैलोरी के दस फीसदी से अधिक नहीं रखनी चाहिए व बढ़ती उम्र के साथ इसे पांच प्रतिशत तक कर देना चाहिए। वर्तमान में मिठास के तौर पर हम पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा चीनी यानी शर्करा खा रहे हैं। मीठे के नाम पर चीनी सेहत बिगाड़ती है, क्योंकि यह प्राकृतिक न होकर कृत्रिम होती है। अधिक चीनी से होने वाले नुकसान को जानने से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर शक्कर है क्या-

क्या है शक्कर -
चीनी एक तरह की कार्बोहाइड्रेट है, जो कई रूप में होती है। यह मुख्यतः दो तरह की होती है। पहली प्राकृतिक जिसे मोनोसैक्कैराइड भी कहते हैं। इसमें ग्लूकोज, फ्रक्टोज, गैलेक्टोज होता है। दूसरी डाईसैक्कैराइड है जिसे रिफाइंड शुगर भी कहते हैं। यह कंपाउंड शुगर भी कहलाती है। इसमें लैक्टोज, माल्टोज और सुक्रोज जैसे तत्त्व होते हैं। ये अलग-अलग चीजों से प्राप्त किए जाते हैं।

फ्रक्टोज को फ्रूट शुगर भी कहते हैं जो फल, जमीन में उगने वाली सब्जियोंं, गन्ने और शहद में पाया जाता है।
गैलेक्टोज की अकेले के रूप में पहचान नहीं है लेकिन यह लैक्टोज के साथ मिलकर काम करता है।
ग्लूकोज पौधों व फलों में होता है जो शरीर में जाकर ऊर्जा में बदल जाता है।
लैक्टोज को मिल्क शुगर भी कहते हैं जो दूध या दूध से बनी चीजों में पाया जाता है।
माल्टोज कई अनाजों में पाया जाता है। खासतौर पर जौ में यह ज्यादा होता है।
सुक्रोज गन्ने के तने और चुकंदर की जड़ों में पाया जाता है। साथ ही यह कुछ फलों और पौधों में ग्लूकोज के साथ होता है।

प्राकृतिक और रिफाइंड में अंतर
प्राकृतिक रूप से मीठा जो साबुत अनाज फल, सब्जियां, बींस, मेवे से मिलता है सेहत के लिए फायदेमंद है। इनमें मौजूद विटामिन, मिनरल व खासकर फाइबर शरीर में शुगर की मात्रा को सीमित रखकर ब्लड शुगर सही रखते हैं। असल समस्या सेहत को उस चीनी से है, जो फैक्ट्री में प्रोसेसिंग के बाद मार्केट में उपलब्ध होती है या मीठे का स्वाद बढ़ाने के लिए अलग से मिलाई जाती है। इसे रिफाइंड शुगर कहते हैं।

ऐसे प्रभावित होते अंग...
कई प्रमुख जर्नल और शोधों की मानें तो नमक से ज्यादा शुगर खासतौर पर सफेद शक्कर सेहत पर भारी पड़ती है। इसका विभिन्न अंगों पर असर होता है।

लिवर -
शुगर खाने के दौरान हमारा लिवर इसमें मौजूद फ्रक्टोज को चर्बी में बदल देता है। ऐसे में कुछ चर्बी तो बाहर निकल जाती है, लेकिन कुछ हिस्सा लिवर में ही रह जाता है। अधिक मात्रा में चीनी खाने से धीरे-धीरे चर्बी लिवर में बढ़ती है जिससे नॉन एल्कोहॉलिक लिवर, सिरोसिस व लिवर कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।

कैंसर - कैंसर विश्वभर में गंभीर रोग बनता जा रहा है। इसमें कोशिकाएं अनियमित रूप से विकसित होने लगती हैं। इस प्रकार की वृद्धि को रोकने में इंसुलिन हॉर्मोन को प्रमुख माना जाता है। इसी कारण शुगर का लगातार बढ़ा हुआ स्तर कैंसर का कारण बन सकता है।

मस्तिष्क -
अधिक मात्रा में शक्कर खाने से शरीर में इंसुलिन सीमा से अधिक बढ़ने लगता है। नतीजतन, मस्तिष्क का वह हिस्सा जल्दी से सक्रिय हो जाता है जिसके असर से हृदय की गति तेज होने लगती है। यही स्थिति हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का कारण बनती है।

दांतों में सड़न -
दांतों की सड़न के लिए भी शुगर जिम्मेदार है क्योंकि मीठा दांतों के कीटाणुओं की प्रिय खुराक है। ये कीटाणु विशेष एसिड छोड़ते हैं जो दांतों में कीड़ा लगने व दांतों के खोखले होने का कारण हैं। ऐसे में दांतों में चिपकने वाली मीठी चीजें, कार्बोहाइड्रेटयुक्त रोटी या अन्य पदार्थ संक्रमण का कारण हैं।

डायबिटीज -
ज्यादा मात्रा में चीनी, शराब व तंबाकू की तरह ही नशा है। जिन्हें मधुमेह नहीं, उनमें चीनी के जरिए आया मोटापा शरीर में कई मेटाबॉलिक व हार्मोनल बदलाव करता है। यह स्थिति इंसुलिन के निर्माण को रोककर पेन्क्रियाज की सेल्स को निष्क्रिय करती है। इससे मधुमेह की आशंका दोगुना हो जाती है।

मिथक : चीनी वजन बढ़ाती है।
तथ्य : एक ग्रा. चीनी में 4 कैलोरी जबकि एक ग्रा. वसा में 9 कैलोरी होती है। चीनी की तुलना में वसा से मोटापा बढ़ता है। संतुलित मात्रा में चीनी शरीर में आसानी से पच जाती है। लेकिन चिकनाईयुक्त चीजें वजन बढ़ा सकती हैं।

मिथक : शुगर खाने से दांत सड़ जाते हैं।
तथ्य : कार्बोहाइड्रेट वाली मीठी चीजें जब दांतों के इनेमल पर चिपकती हैं तो उसे सड़ाना शुरू करती हैं। इसलिए जरूरी है कि खाने के बाद कुल्ला जरूर करें। सोने से पहले ब्रश करें।

मिथक : चीनी खाने से होती है डायबिटीज।
तथ्य : चीनी डायबिटीज का एकमात्र कारण नहीं। टाइप-1 डायबिटीज आनुवांशिक व टाइप-2 जीवनशैली से जुड़े कारकों से होती है। शुगरयुक्त ड्रिंक्स से मधुमेह का सीधा संबंध है।

मिथक : गुड़ और ब्राउन शुगर नहीं, सिर्फ सफेद चीनी ही हानिकारक है।
तथ्य : सफेद चीनी में 99.96 त्न सुक्रोज है। ब्राउन शुगर भी आंशिक रूप से रिफाइंड ही है। इसमें सुक्रोज की मात्रा 97% तक होती है। रसायन रहित गुड़ चीनी का स्वस्थ विकल्प है।

मिथक : शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स हैं अच्छे।
तथ्य : ऐसा नहीं है। शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स भी सेहत के लिए नुकसानदायक है। अमरीकी शोध के अनुसार डाइट कोला हृदय रोगों, मोटापा व मधुमेह की आशंका बढ़ाती है। डाइट सोडा पीने वालों में मेटाबॉलिक सिंड्रोम होता है।

इतनी काफी है मात्रा -
फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन और अमरीकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार सेहतमंद पुरुष प्रतिदिन १५० कैलोरी यानी ९ चम्मच और महिला 100 कैलोरी यानी 6 चम्मच शुगर ले सकते हैं।

चीनी के विकल्प -
प्राकृतिक
विशेषज्ञ डाइट में कम चीनी लेने की सलाह देते हैं। लेकिन जो लोग बिना चीनी खाए नहीं रह पाते वे नेचुरल मीठी चीजें जैसे शहद, गुड़, अंजीर, गाजर, सेब, संतरा, किशमिश, शकरकंद, अनानास आदि खा सकते हैं।

कृत्रिम शुगर -
चीनी के कृत्रिम विकल्पों में आर्टिफिशियल स्वीटनर हैं। जो च्विंगम, कफ सिरप, केक, कुकीज़, चॉकलेट, आइसक्रीम, माउथवॉश, सॉफ्ट ड्रिंक्स व शुगर-फ्री चाय आदि में है। ये अधिक मीठे होते हैं जिन्हें सीमित लें।

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