scriptMany villages of Madhya Pradesh still do not have mobile network, vill | मध्यप्रदेश के कई गांवों में आज भी मोबाइल नेटवर्क नहीं, योजनाओं से वंचित हैं ग्रामीण | Patrika News

मध्यप्रदेश के कई गांवों में आज भी मोबाइल नेटवर्क नहीं, योजनाओं से वंचित हैं ग्रामीण

locationडिंडोरीPublished: Feb 01, 2024 01:41:10 pm

Submitted by:

shubham singh

संचार मंत्री व राष्ट्रीय मंत्री को एडवोकेट सम्यक जैन ने लिखा पत्र

Mobile tower : नशे में युवक मोबाइल टॉवर पर चढ़ा, मां रो-रोकर बेहाल हुई
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डिंडौरी. जिले के दूरस्थ अंचल में कई ऐसे गांव है जहां मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी की सुविधा नहीं मिल पाई है। इससे ग्रामीणों को शासन की ऑनलाइन योजनाओं और सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसे लेकर एडवोकेट सम्यक जैन ने भारत सरकार के संचार एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव व राष्ट्रीय मंत्री व शाहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे को पत्र लिख आमजनों की परेशानी एवं आवश्यकता को देखते हुए जिले के संचार विहीन क्षेत्रो को दूर संचार सेवा से जोडऩे के लिए सार्थक प्रयास करने उल्लेख किया है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडौरी अपनी 25 वी वर्ष गांठ मना रहा है परंतु आज भी हमारे क्षेत्र के ग्रामीण बुनियादी सुविधा के साथ मोबाइल नेटवर्क की कनेक्टिविटी नहीं मिलने से परेशान है। सोशल मीडिया और संचार क्रांति के इस दौर में मोबाइल नेटवर्क के अभाव में शासन की ऑनलाइन योजनाओं और सुविधाओं का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। जननी एक्सप्रेस, 108 एंबुलेंस और 100 डायल की जरूरत पडऩे पर ग्रामीणों को नेटवर्क की तलाश में भटकना पड़ता है। बीएसएनएल और निजी कंपनी का टावर भी आए दिन बंद होने से उपभोक्ता परेशान होते है। आधुनिकता के इस दौर में गांव-गांव मोबाइल नेटवर्क पहुंचाने के दावे यहां खोखले साबित हो रहे है। ग्राम पंचायतों में भी नेट की सुविधा नहीं होने से ऑनलाइन योजनाओं के लाभ से ग्रामीण वंचित है। डिंडोरी सहित अन्य गांव पहाड़ी क्षेत्र से घिरे होने के कारण दूर-दूर तक मोबाइल टॉवर नहीं मिलता है। एक ओर जहां सरकार ऑनलाइन प्रक्रिया को बढ़ावा दे रही है वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल और नेटवर्क ही नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत है कि दिन के समय अगर किसी को बहुत जरूरी बात करनी हो तो पहाड़ी पर जाना पड़ता है। रात के समय कोई इमरजेंसी होने पर सुबह का इंतजार करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए जननी एक्सप्रेस और एंबुलेंस बुलाने में आती है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर ऐसे हालात रहे तो डिजिटल इंडिया का सपना कैसे पूरा होगा। क्षेत्र के ग्रामीण रामनारायण बनवासी, मनोज धाकड़, सतीश मेहरा ने बताया कि सडक़ किनारे तो बीएसएनएल सहित अन्य कंपनियों का नेटवर्क मिलता है लेकिन कई गांवों में इन कंपनियों के मोबाइल धारकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी नेटवर्क आ जाता है तो कभी बिल्कुल नेटवर्क नहीं मिलता है। केंद्र और राज्य की अनेक योजनाओं में मिलने वाली सब्सिडी से लेकर समर्थन मूल्य पर बेची जाने वाली उपज आदि की जानकारी के लिए मोबाइल पर ओटीपी और मैसेज आते है। क्षेत्र में नेटवर्क नहीं मिलने से हितग्राहियों और ग्रामीणों को परेशानी होती है। परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन फार्म भरने में परेशानी विभिन्न परीक्षाओं और योजनाओं की प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है। जिले के अधिकांश अंचलों में नेट नहीं चलने से एमपी ऑनलाइन सेंटर भी नहीं चल पा रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन बैकिंग, बिजली के बिल जमा करने सहित अन्य जरूरी कार्य नहीं हो पा रहे है। साथ ही युवाओं को रोजगार के अवसर भी नहीं मिल पा रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि इन क्षेत्रों में लगे टावरों की कनेक्टिविटी बढ़ाई जानी चाहिए। क्षेत्र में लगे प्राइवेट कंपनियों के टावरों की कनेक्टिविटी नहीं होने से असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

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