
न्यायालय के आदेश के बाद आरटीआई से मिली जानकारी में हुआ खुलासा
डिंडौरी. जिला पंचायत में सहायक परियोजना अधिकारी पर कूट रचित और फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी पाने के आरोप लग रहे है। सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेज से यह खुलासा हुआ है कि सहायक परियोजना अधिकारी ने नियम विरूद्ध तरीके से दस्तावेज तैयार करवा कर सरकारी नौकरी प्राप्त की है। वर्ष 2008 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत सहायक परियोजना अधिकारी की संविदा नियुक्ति जिला पंचायत में हुई थी। लगभग 16 साल से जिले में सेवा दे रहे सहायक परियोजना अधिकारी के फर्जीवाड़े की पोल तब खुली जब सूचना के अधिकार के तहत इनकी नियुक्ति संबंधी दस्तावेज मांगे गए। हालांकि जिले में पूर्व में भी डिप्टी कलेक्टर, पुरातत्व अधिकारी सहित अन्य कर्मचारी फर्जी तरीके से नौकरी कर चुके है। सच सामने आने के बाद भले प्रशासन ने कार्रवाई की हो लेकिन आदिवासी बाहुल्य जिला ऐसे अधिकारियों के लिए प्रयोग शाला और चारागाह साबित हुआ है।
न्यायालय जाने के बाद मिली जानकारी
सहायक परियोजना अधिकारी की नियुक्ति संबंधी दस्तावेज प्राप्त करने आवेदनकर्ता अनिल पटेल को लंबा इंतजार करना पडा। आवेदक ने 11 अक्टूूबर 2021 को सूचना के अधिकार के तहत जिला पंचायत में पदस्थ सहायक परियोजना अधिकारी के नियुक्ति संबंधी दस्तावेज की मांग की थी, लेकिन लोक सूचना अधिकारी द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और इस संबंध में आवेदक से पत्राचार करना भी उचित नहीं समझा गया। आवेदक ने 20 दिसंबर 2021 को प्रथम अपीलीय अधिकारी कलेक्टर को अपील प्रस्तुत की और जानकारी प्रदान करने की मांग की गई। न्यायालय अपर कलेक्टर डिंडौरी ने प्रस्तुत प्रकरण की सुनवाई का क्षेत्र अधिकार जिला पंचायत होने का हवाला देते हुए प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया। अपीलार्थी ने राज्य सूचना आयोग भोपाल की शरण लेते हुए 17 फरवरी 2022 को द्वितीय अपील दायर की, जिसकी सुनवाई 14 सितंबर 2022 को करते हुए आयुक्त मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग भोपाल ने व्यक्तिगत जानकारी होने से निजता का हनन का हवाला देने के साथ न्यायालय द्वारा पूर्व में लिए गए निर्णय और विभिन्न दृष्टांत का उल्लेख करते हुए अपीलार्थी की अपील को खारिज कर दिया। इसके बाद आवेदक ने उच्च न्यायालय की शरण ली और एक जनहित याचिका दायर करत जानकारी उपलब्ध कराने आग्रह किया। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायधीश विवेक अग्रवाल की न्यायालय ने 18 अगस्त 2023 को आदेश पारित करते हुए 15 दिवस में आवेदक को जानकारी दिए जाने आदेशित किया। इसके बाद लोक सूचना अधिकारी जिला पंचायत डिंडौरी ने सहायक परियोजना अधिकारी के नियुक्ति आदेश सहित संलग्न दस्तावेज उपलब्ध कराए।
प्रमाण पत्र जारी करने उल्लेख नहीं
तहसीलदार शुजालपुर ने उल्लेख किया है वर्ष 1996-97 की दायरा पंजियों का आवलोकन किया गया। आवेदन में उल्लेखित 14 अक्टूबर 1996 को संबंधित नाम का कोई प्रकरण पंजीकृत होना नहीं पाया गया। इस पत्र के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सहायक परियोजना अधिकारी द्वारा कूट रचित दस्तावेजो के सहारे नौकरी हासिल की गई है। जानकारों का कहना है कि उस दौरान दूसरे प्रदेश का मूल निवासी होने के लिए कम से कम तीन वर्ष का निवासी होना अनिवार्य था, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा भी मूल निवासी के लिए प्रदेश में ही अनिवार्य थी। सरकारी नौकरी को लेकर प्रावधान है कि व्यक्ति दूसरे प्रदेश में नौकरी के लिए आवेदन करता है तो वह एससी, एसटी, ओबीसी का केडर बदलकर सामान्य श्रेणी का माना जाएगा। और उसी पात्रता के आधार पर सरकारी नौकरी मिलेगी। लेकिन सहायक परियोजना अधिकारी की सरकारी नौकरी शासन के नियम निर्देशों पर भारी है।
मूल निवासी एवं जाति प्रमाण पत्र में भिन्नता
सहायक परियोजना अधिकारी के नियुक्ति आदेश व अन्य दस्तावेज प्राप्त होने के बाद उनका अवलोकन करने पर मूल निवासी एवं जाति प्रमाण पत्र में भिन्नता पाई गई। सहायक परियोजना अधिकारी द्वारा सरकारी नौकरी पाने के लिए जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें उल्लेख है कि वह पिछडे वर्ग से वास्ता रखते हैं। इनका निवास स्थान लखनपुर पोस्ट ऑफिस बुधगेरे जिला गया बिहार दर्शाया गया है। जाति प्रमाण पत्र 18 जून 1996 को डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट सदर गया बिहार द्वारा जारी किया गया हैं। वहीं मध्यप्रदेश मूल निवासी प्रमाण पत्र 14 अक्टूबर 1996 को तहसीलदार शुजालपुर जिला शाजापुर मध्यप्रदेश के द्वारा जारी किया गया है। महज चार माह के अंतराल में बिहार से मध्यप्रदेश का निवासी दर्शाने पर संदेह हुआ और आरटीआई कार्यकर्ता अनिल पटेल ने 11 मार्च 2024 को कलेक्टर डिंडौरी को एक आवेदन प्रस्तुत कर सूक्ष्मता से जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होने तहसीलदार शुजालपुर जिला शाजापुर को आरटीआई के माध्यम से सहायक परियोजना अधिकारी को जारी मूल निवासी प्रमाण पत्र के संबंध में प्रस्तुत दस्तावेज और शासन के दिशा निर्देश की मांग की थीं। वहीं कलेक्टर ने प्राप्त आवेदन के विरूद्ध जांच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) डिंडौरी को सौंप दी है।
Published on:
23 Jul 2024 12:10 pm

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