11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

प्रतिबंध के बाद भी नदियों के अंदर से कर रहे रेत का उत्खनन, नहीं हो रही कार्रवाई

जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी मंडरा रहा खतराबजाग. रेत की खदानों पर प्रतिबंध लागू होने के बाद भी रेत का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। गोरखपुर से रूसा तक नदियों से रेत का उत्खनन कर परिवहन किया जा रहा है। नर्मदा नदी पर भी रेत का अवैध उत्खनन जोरों से चल रहा है। […]

less than 1 minute read
Google source verification

जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी मंडरा रहा खतरा
बजाग. रेत की खदानों पर प्रतिबंध लागू होने के बाद भी रेत का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। गोरखपुर से रूसा तक नदियों से रेत का उत्खनन कर परिवहन किया जा रहा है। नर्मदा नदी पर भी रेत का अवैध उत्खनन जोरों से चल रहा है। रेत कारोबारी हर रोज बड़े बड़े वाहनों से रेत निकाल कर नदी का सीना छलनी कर रहे हंै। बारिश के दिनों में नदी के अंदर से रेत का उत्खनन करने से जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। करंजिया विकासखंड के गोरखपुर से लेकर रूसा के आसपास तक लगभग बीस किमी. के दायरे में नर्मदा नदी के घाट-घाट से रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर व अन्य बड़े वाहनों से रेत की निकासी की जा रही है। चर्चा यह भी है कि विभाग और रेत के पूर्व ठेकेदार के आपसी गठजोड़ के चलते रेत चोरी करने वालो पर कार्रवाई नहीं की जा राही है। ग्राम पाटन में मुख्यमार्ग पर नाका बनाया गया है जो की प्रतिबंध के पहले इस पर से रेत ले जा रहे वाहनों की चेकिंग के लिए बनाया गया था, लेकिन रेत खदान पर प्रतिबंध लग जाने के बावजूद भी यह नाका पूर्व की तरह विधिवत चालू है। इस नाके से रोजाना दर्जनों वाहन रेत भरकर पार हो रहे हैं जिसकों लेकर विभाग अंजान बना हुआ है।