Video : राजस्थान का एक ऐसा शिवालय जहां आठ माह तक जल समाधि में रहते हैं महादेव

दो नदियों के संगम से पड़ा संगमेश्वर महादेव नाम

By: Ashish vajpayee

Published: 09 Feb 2018, 09:55 PM IST

डूंगरपुर. हमारे देश में कई शिवालय ऐसे भी हैं जो हर किसी को आश्चर्यचकित कर देते हैं। इन शिवालयों के वर्ष भर दर्शन नहीं किए जा सकते हैं। राजस्थान के दक्षिणांचल में एक संगमेश्वर शिवालय ऐसा है जहां पर भगवान भोलेनाथ जल में समाधि लिए हुए है। यहां मंदिर वर्ष में आठ माह पानी में डूबा रहता है। लेकिन आस्था इतनी है कि इसके दर्शनार्थ व एक झलक पाने के लिए भक्त नाव में बैठकर जाते हैं।

सूर्यमुखी मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग

संगमेश्वर महादेव मंदिर सूर्यमुखी है। यहां पर स्वयंभू शिवलिंग है। मंदिर के बाहर साधुओं की समाधियां बनी हुई है। मंदिर ईट व पत्थरों से बना है। इस पर कलात्मक कलाकृतियां उकेरी गई है। कहा जाता है कि इस मंदिर में मांगी जाने वाली मनोकामना अवश्य पूरी होती है। कड़ाणा बांध के बेकवाटर का जलस्तर 400 फीट से कम होने पर मंदिर दर्शन के लिए खुल जाता है।

नदियों के संगम पर स्थित है शिवालय

बांसवाड़ा-डूंगरपुर जिले के सरहद पर अनास व माही नंदी के संगम पर चीखली-आनंदपुरी के मध्य बेडूआ गांव के पास संगमेश्वर महादेव मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण परमार वंश के बांसवाड़ा जिले के गढ़ी राव हिम्मतसिंह द्वारा कराया गया था।

पानी में रहने के कारण मंदिर हो गए क्षतिग्रस्त

कहा जाता है कि तट पर बने कई अन्य मंदिर वर्ष भर पानी में डूबे रहने के कारण क्षतिग्रस्त हो गए लेकिन संगमेश्वर महादेव मंदिर की सुदंरता समय के साथ निखरती जा रही है। यह स्थान प्राकृतिक दृष्टि से बहुत ही सुदंर स्थान जाना जाता है।

कडाणा बांध बनने से डूब गया यह स्थल

वर्ष 1970 में गुजरात सरकार ने कड़ाणा बांध बनाया। इस बांध के बनने से यह स्थल डूब गया। यहां पर होली के पूर्व हर वर्ष मेला लगता था। संगम स्थल के डूबने के कारण मेला भी बंद हो गया। इस मेले में शामिल होने के लिए राजस्थान के अलावा मध्यप्रदेश एवं गुजरात से भक्त आते थे। यह स्थान डूब क्षेत्र में शामिल हो गया है। जब कडाणा बांध से पानी छोड़ा जाता है तो जलराशि का विहंगम दृश्य देखने को मिलता है। इस दौरान लोगों को नाव से सफर के लिए मना किया जाता है।

दो नदियों के संगम से बना संगमेश्वर

यह मंदिर अनास व माही दो नदियों के संगम पर होने के कारण इसे संगमेश्वर शिवालय के नाम से जाना जाता है। दो नदी संगम के गांवों से जुड़े लोग आज भी आवागमन के लिए नाव का सफर करते हैं। यहां दूर-दूर तक सिर्फ पानी ही दिखाई देता है। नाव से आवाजाही करने वाले लोगों का मंदिर को देखकर सहज ही सिर श्रद्धा से झुक जाता है।

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