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इस बीमारी से जूझ रहे हैं ‘अटल’, याददाश्त कमजोर होने के साथ बर्ताव में आते हैं ये बदलाव

अटल बिहारी वाजपेयी को एम्स में कराया गया है भर्ती, हालत बेहद नाजुक

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पिछले कुछ सालों से अस्वस्थ थे। कल उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई जिसके चलते उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया है। यहां उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया है। उन्हें डिमेंशिया नामक बीमारी हो गई है। इसके अलावा छाती में जकड़न,(किडनी) नली एवं मूत्रनली में संक्रमण आदि बीमारियां हो गई है।

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डिमेंशिया को हिंदी में मनोभ्रंश कहते हैं। ये दरअसल बीमारी के लक्ष्णों के समूह को कहते हैं। इसके तहत दिमाग प्रभावित होता है। इस बीमारी में व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है। जिसके चलते वो रोजमर्रा के काम भी ठीक से नहीं कर पाता है।

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इस बीमारी में व्यक्ति को चलना, बोलना, खाना खाना जैसे साधारण काम करने में भी दिक्कतें आने लगती है। ऐसे में वो दूसरों पर निर्भर हो जाता है। इस स्थिति से बाहर निकलना बहुत ही मुश्किल होता है।

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डिमेंशिया की बीमारी में व्यक्ति की जुबांन लड़खड़ाने लगती है, उसके मुंह से शब्द नहीं निकलते हैं। कई बार व्यक्ति सामने वाले को उलटा—सीधा भी बोल देता है तो वहीं एक पल में पहचानने से इंकार कर देता है।

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इस रोग में मस्तिष्क की कोशिकाएं नष्ट हो जाती है। इससे मस्तिष्क के भागों को जोड़ने वाले वेन्स को भी नष्ट करता है। बीमारी के चलते ब्रेन की कोशिकाएं सिकुड़ जाती हैं। कुछ लोगों में ये बीमार 40 से 50 साल की उम्र में ही हो जाती है।

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डब्ल्यूएसओ(वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन) के मुताबिक 65 साल से कम उम्र में होने वाला डिमेंशिया कि जल्दी पहचान नहीं हो पाती है। इसे यंग आॅनसेट डिमेंशिया के नाम से भी जाना जाता है।

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डिंमेशिया के पहले चरण में सबसे पहले ब्रेन अल्जाइमर रोग होता है। इसके तहत दिमाग के तंत्रिका तंत्र और प्रोटीन का कुछ अंश क्षतिग्रस्त हो जाता है। करीब 60 से 80 प्रतिशत लोगों में ये बीमारी देखने को मिली है। इस बीमारी के होने के बाद व्यक्ति 4 से 8 सालों तक जीवित रह सकता है।

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बीमारी के दूसरे चरण में वेस्कुलर डिमेंशिया का खतरा रहता है। इसके तहत ब्लड की नलियां चोक हो जाती हैं। इसमें ब्रेन को आॅक्सीजन और ब्लड कम मिलने लगता है। ये लक्ष्ण करीब 10 प्रतिशत मरीजों में पाया जाता है।

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डिमेंशिया का एक और स्वरूप है जिसका नाम फ्रंटोटेम्पोरल है। इसमें मस्तिष्क के सामने का हिस्सा प्रभावित होता है। इस बीमारी से ग्रसित होने पर व्यक्ति उदास रहने लगता है, वो तनावग्रस्त,नीरस एवं चिड़चिड़ा हो जाता है। इससे बोलने में दिक्कत और मेमोरी लॉस होती है।