25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस झील में दफ़्न है अरबों का खजाना, फिर भी इसे निकालने से खौफ खाते है लोग, जानें इससे जुड़ी 10 चौंकाने वाली बातें

महाभारत काल के योद्धा कमरूनाग बाबा इस खजाने की कर रहे हैं रक्षा

3 min read
Google source verification
kamrunaag jheel

नोटबंदी के बाद तो आपने अक्सर नदियों और तालाबों में हजारों नोट तैरते देखे होंगे, लेकिन देश में एक ऐसी झील है जिस पर सालों साल नोट तैरते रहते हैं। यहां पानी के अंदर अरबों का खजाना भी दफ़्न है। मगर हैरत की बात यह है कि यहां से कोई भी एक रुपए तक को हाथ नहीं लगाता है। तो क्या है इस झील में मौजूद अकूत दौलत का रहस्य आइए जानते हैं।

kamrunaag jheel

हिमाचल की हरी—भरी वादियों में स्थित इस झील का नाम कमरूनाग है। ये मंडी से लगभग 60 किलोमीटर दूर रोहांडा के पास स्थित है। इस झील में नोटों के तैरने का सिलसिला आज से नहीं बल्कि सदियों पहले से चला आ रहा है।

kamrunaag jheel

इस झील के पास एक मंदिर भी है। इसे कमरूनाथ बाबा का मंदिर कहते हैं। मान्यता है कि पानी में मौजूद खजाने की रक्षा आज भी बाबा और उनके प्रहरी कर रहे हैं।

kamrunaag jheel

कमरुनाग बाबा का जिक्र महाभारत काल के ग्रंथों में देखने का मिलता है। उन्हें बबरुभान के नाम से भी जाना जाता था। उन्हें धरती का सबसे शक्तिशाली योद्धा माना जाता था। हालांकि वे कृष्ण नीति के आगे हार गए थे।

kamrunaag jheel

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस झील का निर्माण भीम ने किया था। मगर इसके पीछे की नीत भगवान श्रीकृष्ण की थी। दरअसल कमरुनाग बाबा के बल से कृष्ण जी भी भयभीत थे। उन्हें डर था कि इनके कौरवों का साथ देने से पांडव हार न जाए इसलिए उन्होंने बबरुनाथ बाबा को एक शर्त रखकर उन्हें हरा दिया था और इसके बदले उनसे उनका सिर मांग लिया था।

kamrunaag jheel

कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने उनके कटे हुए सिर को हिमालय के शिखर पर रख दिया, लेकिन बताया जाता है कि जिस ओर बबरुनाथ का शीष जाएगा विजय उनकी ओर के लोगों की होगी। इसलिए भगवान ने उनके शीष के साथ एक पत्थर बांधकर पांडवों की ओर घुमा दिया। इन्हें पानी की दिक्कत न हो इसलिए भीम ने यहाँ अपनी हथेली को गाड कर एक झील बना दी।k

kamrunaag jheel

इस झील को लेकर कईं मान्यताएं है। कहा जाता है कि ये झील देवताओं का है। इसमें उनका खजाना दबा हुआ है। वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार ये झील सीधे पाताल लोग तक जाती है।

kamrunaag jheel

इस झील में अपार धन—दौलत होने के बावजूद कोई इसे चुरा नहीं सकता है। कहते हैं कि इसकी रक्षा कमरुनाग के प्रहरी करते है। इस झील के पास एक नाग—सा दिखने वाला वृक्ष है। बताया जाता है कि जो कोई व्यक्ति इस खजाने को चुराने की कोशिश करता है या बुरी नजर डालता है तब ये पेड अपने असली रूप यानि नाग देवता के रूप में आ जाता है।

kamrunaag jheel

मान्यता है कि जो कोई इस झील में सोना चांदी या रुपए चढ़ाता है उसकी मनोकामनाएं पूरी होती है। लोग यहां खुद के पहने हुए गहने भी इसमें डाल देते हैं।

kamrunaag jheel

जून के महीने में यहां एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें श्रद्धालू दूर—दूर से हिस्सा लेने आते हैं। वे सोना—चांदी, हीरे, जवाहरात आदि चढ़ाते हैं। इस झील के पास लोहड़ी पर भी भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है।