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बार—बार हो जाता है गर्भपात तो इन 10 तरीकों से पाएं छुटकारा

विटामिन्स एवं अन्य पोषक तत्वों की कमी से भ्रूण के विकास में आती है बाधा

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हर औरत का सपना मां बनना होता है। वो अपने अंश को इस दुनिया में लेकर आना चाहती है, लेकिन कई बार शाररिक कमी एवं अन्य कारणों से उनका ये ख्वाब पूरा नहीं हो पाता है। जिसके चलते उनका बार—बार गर्भपात हो जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

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गर्भपात की समस्या को कम करने के लिए जौ बहुत फायदेमंद होता है। इसमें लेक्टिक एसिड, सैलिसिलिक एसिड, फास्फोरिक एसिड, पोटेशियम और कैल्शियम मौजूद होता है। इसका सेवन करने से न सिर्फ शरीर को कई पोषक तत्व मिलते हैं। 12 ग्राम जौ के आटे को 12 ग्राम काले तिल और 12 ग्राम मिश्री के साथ पीसकर इसमें शहद मिलाकर रोज चाटने से बार बार होनेवाला गर्भपात रुक जाता है।

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ढाक का पत्ता भी गर्भ गिरने की समस्या को कम करता है। गर्भधारण करने से एक महीने पहले ढाक के पत्ते को पीसकर आधा चम्मच चूर्ण एक गिलास दूध में मिलाकर पीने से गर्भ ठहरता है। ये प्रक्रिया आपको नौ महीनों तक करनी होगी। हालांकि इसका सेवन रोज नहीं बल्कि तीन—चार दिन छोड़कर करना होगा।

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शिव जी को चढ़ाया जाने वाला धतूरा गर्भपात रोकने के भी काम आता है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार जिस स्त्री को बार बार गर्भपात होता हो उसकी कमर में धतूरे की जड़ का चार ऊँगली का टुकड़ा ऊनी धागे से बाँध दे। इससे गर्भपात नहीं होगा। महिला को ये जड़ नौ महीनों तक बांधकर रखनी होगी।

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अनार से भी गर्भपात की समस्या कम होती है। इसके लिए महिला को रोज 100 ग्राम अनार के ताजे पत्ते पीसकर उसका रस पिलाना चाहिए। साथ ही इसके पिसे हुए पत्तों को कमर के नीचे वाले हिस्से पर लेप की तरह लगाना चाहिए। इससे गर्भपात में होने वाला रक्त स्त्राव रुक जाएगा।

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अगर गर्भपात होने का भय हो तो तुरंत चौथाई चम्मच पीसी हुई फिटकरी को एक कप कच्चे दूध में डालकर पी लें। इससे गर्भपात रुक जाएगा। इस तरीके का प्रयोग करने से गर्भपात में होने वाला दर्द और खून का बहना भी थम जाता है।

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जिन स्त्रियों को बार—बार गर्भपात होता है उन्हें गर्भधारण के बाद रोज 62 ग्राम सौंफ और 31 ग्राम गुलकंद पीसकर पानी मिलाकर दिन में एक बार पीना चाहिए। ऐसा करने से गर्भ स्थिर रहता हैं

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सौंठ और मुलहठी भी गर्भ गिरने से रोकता है। इसके लिए गर्भवती स्त्री को रोज एक गिलास दूध में आधा चम्मच सौंठ और एक चौथाई चम्मच मुलहठी उबालकर पीना चाहिए। इससे गर्भ स्थिर रहता है और प्रसव पीडा भी कम होती है।

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गर्भपात का एक और कारण होता है वो है शरीर में विटामिन्स की कमी। इस समस्या को दूर करने के लिए गर्भवती स्त्री को गर्भावस्था में अंकुरित दालें, बादाम, पिस्ता, किशमिश और अन्य सूखे मेवे बढ़िया खाने चाहिए। इससे शरीर को विटामिन ए एवं ई भरपूर मात्रा में मिलते हैं। इससे भ्रूण का विकास सही से होता है।

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गर्भ गिरने की समस्या से बचने के लिए शिवलिंगी के बीज भी बहुत लाभकारी होते हैं। इसके लिए गर्भवती स्त्री को शिवलिंगी और पुत्रजीवक गिरी को मिलाकर आधा चम्मच चूर्ण रोज सुबह खाली पेट लेना चाहिए। आप इसे रात के भोजन के एक घंटे के बाद भी ले सकते हैं। इसे गाय के दूध के साथ लेना फायदेमंद होता है।