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पूरी दुनिया में सिर्फ यहां मिली है एक साथ तीन तिरंगा लगाने की छूट, वजह बेहद दिलचस्प

सिर्फ बेंगलुरु को मिला है तिरंगा बनाने का लाइसेंस, पूरे देश में यही से होती है सप्लाई

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पूरी दुनिया में सिर्फ यहां मिली है एक साथ तीन तिरंगा लगाने की छूट, वजह बेहद दिलचस्प

नई दिल्ली। हर देश की आन-बान और शान उसका राष्ट्रीय ध्वज होता है। भारत के लिए भी तिरंगा बेहद महत्वपूर्ण है। इसीलिए आम नागरिक से लेकर देश के वीर जवान तक सभी तिरंगे के सम्मान में अपने प्राण तक न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं। इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर हम आपको भारतीय राष्ट्र ध्वज से जुड़े कुछ ऐसे पहलुओं के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में शायद ही आपको पता होगा।

1.यूं तो पूरे देश में ध्वजारोहण के समय एक ही तिरंगा फहराने का नियम है, लेकिन भारत में एक ऐसी भी जगह है जहां एक नहीं बल्कि तीन तिरंगे एक साथ फहराए जाते हैं। ये जगह कहीं और नहीं बल्कि हमारा संसद है। ध्वज संहिता के अनुसार संसद भवन ही एक ऐसी जगह है जहां तीन तिरंगे एक साथ लगाए जा सकते हैं।

2.देश के राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास भी बहुत दिलचस्प रहा है। इसे बनाने के लिए कई बार संशोधन किया गया है। बताया जाता है कि पहले इसमें अशोक चक्र की जगह महात्मा गांधी के चरखे का निशान हुआ करता था।

3.मगर बाद में राष्ट्रीय ध्वज से चरखे के चिन्ह को हटाकर अशोक स्तम्भ कर दिया गया। ऐसा करने पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी नाराज भी हो गए थे।

4.देश के राष्ट्रीय ध्वज के और भी कई किस्से हैं। इसके तहत रांची का पहाड़ी मंदिर भारत का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां लाल पताके की जगह राष्ट्र ध्वज फहराया जाता है। ये देश का सबसे ऊंचा झंडा भी है। इसकी ऊंचाई करीब 493 मीटर है।

5.तिरंगे को लेकर संविधान में कई नियम भी बनाए गए है। इसके तहत राष्ट्रध्वज को फहराने से लेकर उसके नष्ट करने तक के सबके प्रावधान दिए गए हैं। अगर इनमें से किसी में गलती होती है तो कठोर सजा का भी नियम बनाया गया है।

6.'फ्लैग कोड ऑफ इंडिया'(भारतीय ध्वज संहिता) कानून के तहत तिरंगा हमेशा सूती, सिल्क या खादी का होना चाहिए। प्लास्टिक का झंडा मान्य नहीं है।

7.तिरंगे का निर्माण हमेशा रेक्टेंगल शेप में होना चाहिए। जिसका अनुपात 3:2 होगा और बीच के अशोक चक्र में 24 तीलियां होंगी।

8.तिरंगे को लेकर बनाए गए नियम के तहत इसे फहराते समय इसका एक भी हिस्सा जमीन को नहीं छूना चाहिए। क्योंकि ये देश की शान है इसलिए राष्ट्रध्वज हमेशा उपर होना चाहिए।

9.तिरंगे को कभी भी जमीन में या कूड़ेदान में नहीं फेंकना चाहिए। न ही इस पर कुछ लिखना चाहिए या खराब करना चाहिए। अगर इनमें से कोई भी गलती करते हैं तो तीन साल की सजा का प्रावधान है।

10.भारत में तिरंगा बनाने का आधिकारिक लाइसेंस महज हुबली को ही है। ये जगह बेगलुरु से करीब 420 किमी दूर स्थित है।