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इन 10 तस्वीरों से देखें अटल बिहारी वाजेपयी के संघर्ष की कहानी

कांग्रेस नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था अटल एक दिन बनेंगे पीएम

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atal bihari vajpayee

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस वक्त एम्स अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। ऐसी जंग उन्होंने अपनी जिंदगी में भी लड़ी है। उन्होंने बहुत मेहनत और संघर्ष से दुनिया में अपना मुकाम बनाया था। आज हम आपको ऐसे ही महान शख्स की 10 ऐसी खास तस्वीरें दिखाएंगे, जिन्हें शायद ही किसी ने देखा होगा।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी का जन्म 25 दिसंबर सन् 1924 में ग्वालियर में हुआ था। उन्होंने वहां के सरस्वती शिशु मंदिर से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने विक्टोरिया कॉलेज, लक्ष्मी बाई कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया।

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इसके बाद उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से पॉलिटिकल सांइस में एमए किया। उन्होंने इसमें फस्र्ट क्लास डिग्री हासिल की है। अटल बिहारी वाजपेयी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि वह हमेशा से एक पत्रकार बनना चाहते थे, लेकिन गलती से वह राजनीति में आ गए हैं।

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पत्रकारिता के प्रति उनका लगाव पहले भी देखने को मिला है। वो स्टडी पूरी करने के बाद वो दीन दयाल उपाध्याय के एक मासिक पत्रिका राष्ट्र धर्म में कार्य करने लगें। इसके अलावा उन्होंने एक साप्ताहिक दैनिक अखबार पंचजन्य, डेलीज स्वदेश और वीर अजुर्न में बतौर पत्रकार कार्य किया है।

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उनके व्यक्तित्व से पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भी प्रभावित थे और उन्होंने कहा था कि अटल एक दिन भारत के प्रधानमंत्री जरूर बनेंगे। साल 1984 में उन्होंने ग्वालियर में प्रचार के दौरान लोगों से कांग्रेस को वोट देने की आपील की थी। ये एक मात्र चुनाव था जो वह ग्वालियर से हारे थें। इस चुनाव में उनके विरुद्ध माधवराव सिंधिया थें।

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राजनीति में आने से पहले उन्होंने आर्य कुमार सभा ग्वालियर के यंग जनरेशन ग्रुप से शुरुआत की। वो सन् 1994 में इसके जनरल सेक्रेटरी बनें। उन्होंने सन् 1939 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भी ज्वाइन किया। वो उस दौरान अधिकारियों के ट्रेनिंग कैम्प अटेंड किया करते थे।

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अटल बिहारी वाजपेयी ने 90 के दशक में बीजेपी को स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाई थी। उनके प्रयास से दूसरे दल भी बीजेपी में शामिल हो गए थे।

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राजनीति में वाजपेयी की शुरुआत 1942-45 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में हुई। उन्होंने कम्युनिस्ट के रूप में शुरुआत की, लेकिन हिंदुतत्व के लिए खड़े होने वाले आरएसएस में शामिल होने की वजह से उन्होंने समान्यवाद छोड़ दिया।

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अटल बिहारी वाजपेयी का असली राजनीतिक करियर सन् 1951 में शुरू हुआ था। उन्होंने सन्1955 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन इसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 1957 में वह सांसद बनें। वो करीब 10 बार लोकसभा के सांसद रह चुके हैं। वो सन् 1962 और 1986 में राज्यसभा के भी सांसद रहे हैं।

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वाजपेयी सन् 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने थे लेकिन पूर्ण बहुमत न होने से उनकी सरकार महज 13 दिन ही चल पाई थी। इसके बाद सन् 1999 की शुरुआत में भी स्थायी बहुमत न होने के चलते 13 महीने बाद उनकी दोबारा सरकार गिर गई थी।