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देश के 10 ऐसे खुफिया खजाने जिनका भेद खुलते ही मच जाएगी तबाही

कहीं नाग कर रहे हैं अकूत दौलत की रक्षा तो कहीं खजाने तक पहुंचना है नामुमकिन

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भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था, लेकिन गुजरते समय के साथ यहां मौजूद धन—दौलत आज दुनिया के लिए रहस्या बन गया है। देश में कई ऐसे खुफिया खजाने हैं जिनके बारे में कोई नहीं जानता है। आज हम आपको ऐसे ही 10 रहस्मयी खजानों के बारे में बताएंगे जिनका राज खुलने से तबाही मच सकती है।

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बिहार के राजगीर की एक बड़ी चट्टान में मौजूद सोनभद्र की गुफाएं आज भी सबके लिए रहस्य बनी हुई हैं। यहां दो गुफाएं हैं। यहां पश्चिमी शिलालेख होने से इन्हें ईसा पूर्व तीसरी व चौथी सदी में का माना जाता है। बताया जाता है कि गुफा का एक रास्ता सम्राट बिंबिसार के सरंक्षित खजाने की ओर जाता है। अंग्रेजों ने इस गुफा को तोप से उड़ाने का असफल प्रयत्न किया, मगर वो असफल रहे थे। तब से खजाने को खोलने की हिम्मत किसी ने नहीं की।

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केरल के तिरूवनंतपुरम में बना श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर भी काफी रहस्यों से भरा हुआ है। यहां कई शाही खजाने हैं। एक तहखाने में मिले खजाने की अंतर्राष्ट्रीय कीमत करीब 22 अरब डॉलर आंकी गई थी। जबकि अभी भी मंदिर का दूसरा खजाना नहीं खोला गया है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार दूसरे तहखाने में और भी बड़ा खजाना है, जिसकी रक्षा ‘नाग’ करते हैं। इस खोलने से भारी तबाही हो सकती है।

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राजस्थान के अलवर जिले में स्थित अलवर के किले में भी खुफिया खजाना मौजूद है। बताया जाता है कि मुगल सम्राट जहांगीर ने अपने निर्वासन के समय यहां शरण ली थी और अपना खजाना छुपाया था। इसके अलावा मुगल साम्राज्य से पहले भी अलवर राज्य बेहद संपन्न था। यहां के कप पन्ने जैसे बेशकीमती नगों से बनाए जाते थे। किले में मौजूद अतुल्य खजाने को आज तक किसी ने निकालने की हिम्मत नहीं की है।

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ईरानी आक्रमणकारी नादिर शाह ने सन् 1739 में भारत पर हमला किया था। उसने अपने सैनिकों के साथ यहां जमकर लूटपाट और नरसंहार किया था। लूट इतनी बड़ी थी कि नादिर का खेमा वापस जाते समय 150 मील लंबा था। नादिर शाह ने करोड़ों सोने के सिक्के, हीरे-जवाहरात से भरी बोरियाँ, पाक तख्त-ए-तौर (जो अब ईरान में हैं) और विख्यात, कोहीनूर हीरा लूटा था। ये कोहिनूर अब ब्रिटिश घराने के राजमुकुट में हैं।

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आंध्र प्रदेश के कोल्लुर में कृष्णा नदी है। ये नदी हीरों के खनन के लिए सबसे उम्दा स्थान है। बताया जाता है कि सदियों पहले से यहां हीरे की बड़ी खेप मौजूद है। इसी जगह से कोहिनूर हीरे की भी उत्पत्ति हुई थी। मगर यहां के हीरों पर कोई अपनी कूदृष्टि नहीं डाल सकता है।

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हैदराबाद के चारमीनार और गोलकुंडा को जोड़ने वाली सुरंग भी काफी रहस्यमयी है। बताया जाता है कि यहां बहुत बड़ा खजाना छुपा है। इस सुरंग का निर्माण सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने शाही परिवार के लिए करवाया था। तब से वहां खजाना मौजूद है, लेकिन यहां तक जिसने भी पहुंचने की कोशिश की उसे मुसीबतों का सामना करना पडा है।

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हैदराबाद में ही एक और खजाना है जिसे मीर अली उस्मान का बताया जाता है। वो हैदराबाद के आखरी निजाम थे। उन्होंने इंग्लैंड के बराबर राजस पर हुकुमत की है। 2008 में फोर्ब्स मैगजीन ने उन्हें 210 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के सर्वकालिक सबसे धनी लोगों में पाँचवे पायदान पर रखा। हालांकि उनकी संपत्ति का असल हिसाब या आंकलन किसी के पास नही है।

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जयपुर का इतिहास भी काफी रोचक है। यहां भी कई रहस्यमयी खजाने हैं। इन खजानों में से एक है जयपुर के राजा मान सिंह का खजाना। वो मुगल सम्राट अकबर के सेनापति थे। बताया जाता है कि सन् 1580 में अफगान को जीतने के बाद मान सिंह ने अकबर को लूट का हिस्सा नहीं दिया और सारी दौलत को जयगढ़ के किले में छुपा दिया था। काफी अरसे बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल के समय खजाने की खोज का आदेश दिया था।

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कर्नाटक के श्री मोक्कमबिका मंदिर में भी खुफिया खजाना है। इस मंदिर की सालाना आय 17 करोड़ है। जबकि खजाने में अकूत दौलत मौजूद है। हालांकि इसे निकालने की किसी ने कोशिश नहीं की क्योंकि इस मंदिर की रक्षा स्वयं नाग देवता कर रहे हैं। इस पर बुरी नजर डालने से संकट आ सकता है।