
कोई भी चोर जब पकड़ा जाता है तो लोग सोचते हैं ये बचपन से ही चोरी कर रहा है। चोरी करना इसकी आदत में शुमार है, लेकिन क्या आपको पता है चोरी की लत लगना किसी बुरी संगति का नहीं बल्कि एक बीमारी की वजह से भी हो सकता है। तो कौन-सी है ये बीमारी और कैसे करें बचाव आइए जानते हैं।

मन में चोरी का भाव लाने और एक अपराधी बनाने वाली इस बीमारी को क्लेप्टोमेनिया कहते हैं। इसके तहत व्यक्ति के दिमाग में सेरोटोनिन नामक न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर कम हो जाता है। जिससे व्यक्ति सही—गलत में फर्क नहीं कर पाता है और चोरी करने से अपने को नहीं रोक पाता है।

वैसे तो सामान्यत: व्यक्ति के मन में आ रहे विचारों एवं आवेग को मस्तिष्क में मौजूद ओपिओइड सिस्टम नियंत्रित करता है। मगर क्लेप्टोमेनिया रोग के चलते ये सिस्टम प्रभावित हो जाता है जिससे माइंड पर कंट्रोल खत्म हो जाता है।

इस बीमारी के तहत व्यक्ति के मन में चोरी छिपे काम करने की भावना विकसित होती है। दिमाग व्यक्ति की इंद्रियों को ऐसा चुनौतीपूर्ण काम करने को कहता है जिसे उसने पहले कभी न किया हो। भावनाओं के इसी असंतुलन के चलते लोगों में चोरी करने की भावना जन्म लेती है।

इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति खुद की नजरों में उठने के लिए ऐसा साहसिक काम करने की कोशिश करता है जिससे वो रातों-रात फेमस हो जाए। इसके चलते वो सार्वजनिक जगहों व किसी के घर से सामान चुराता है। ऐसा करने पर व्यक्ति को आत्म-संतुष्टि मिलती है।

मगर जब तक वो चोरी नहीं कर लेते हैं तब तक उनका मन बेचैन रहता है। इस दौरान इन पर गुस्सा करने या चिल्लाने से इनके मस्तिष्क की क्रिया और ज्यादा प्रभावित हो जाती है, जिसके चलते ये आवेश में आकर कोई गलत कदम उठा लेते हैं। ये तैश में आकर किसी पर प्रहार भी कर सकते हैं।

क्लेप्टोमेनिया नामक बीमारी से ग्रसित व्यक्ति का अपने मन और मस्तिष्क पर नियंत्रण नहीं होता है। इसलिए जब तक वो चोरी की घटना को अंजाम नहीं दे देता है तब तक वो रिलैक्स नहीं होता है, लेकिन जैसे ही वो कुछ चुरा लेता है तब उसके मस्तिष्क में डोपेमिन नामक केमिकल उत्पन्न होता है। जो उसे खुशी का एहसास कराता है।

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति बेचैन रहता है। उसे ठीक से नींद न आने, एकाग्रता भंग होने और डर लगने जैसी समस्याएं होती है। क्लेप्टोमेनिया के चलते ऐसे लोग दूसरों से बातचीत करने में भी कतराने लगते हैं।

क्लेप्टोमेनिया बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को अन्य रोग होने का भी खतरा रहता है। जिसके तहत उसे बाइपोलर डिसआॅर्डर हो सकता है। इस बीमारी के तहत व्यक्ति हमेशा उदास रहता है। उसके मन में नकारात्मक विचार आते है। साथ ही वो एक साथ कई कामों को करना चाहता है।

इस बीमारी से ग्रसित लोग चोरी की गई वस्तु को रखते नहीं है, बल्कि ये फेंक देते हैं, दूसरों को दे देते हैं व उसी व्यक्ति को दे देते हैं जिसका सामान उसने चुराया था। चूंकि ये लोग डिप्रेशन में रहते हैं इसलिए इनमें आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। इससे छुटकारा पाने के लिए मनोचिकित्सक से परामर्श लें और इनमें खुद के प्रति यकीन पैदा करें।