इंडिया रेटिंग्स ने घटाई GDP की रफ्तार, चालू वित्त वर्ष में 6.7 फीसदी रहने का अनुमान

इंडिया रेटिंग्स ने घटाई GDP की रफ्तार, चालू वित्त वर्ष में 6.7 फीसदी रहने का अनुमान

Shivani Sharma | Updated: 29 Aug 2019, 09:37:25 AM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

  • 2019-20 में जीडीपी वृद्धि दर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान
  • इंडिया रेटिंग्स ने जारी की रिपोर्ट

नई दिल्ली। इंडिया रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ रेट का अनुमान 7.3 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया। खपत मांग में कमी, विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर में नरमी को देखते हुए एजेंसी ने ग्रोथ रेट का अनुमान घटाया है। रेटिंग एजेंसी ने इससे पहले जीडीपी ग्रोथ रेट 7.3 फीसदी रहने की उम्मीद जताई थी।


कम होगी जीडीपी की रफ्तार

इंडिया रेटिंग्स के प्रधान अर्थशास्त्री सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि लगातार तीसरे साल आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी रहेगी। उन्होंने कहा कि तिमाही आधार पर, अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट धीमी होकर 5.7 फीसदी रहने की उम्मीद है। इससे पिछली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 5.8 फीसदी रही थी।


इंडिया रेटिंग्स ने दी जानकारी

इंडिया रेटिंग्स ने रिपोर्ट में जानकारी देते हुए कहा,'हमने 2019-20 में देश की सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी ) की वृद्धि दर को 7.3 फीसदी से घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया। यह छह साल का न्यूनतम स्तर है।'


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ये हैं प्रमुख कारण

इसमें कहा गया है कि खपत से जुड़ी मांग में नरमी, मानसून में देरी, विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि में गिरावट, समयबद्ध तरीके से मामलों को सुलझाने में दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता सहिंता के नाकाम रहने से चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट रहने की आशंका है। इसके साथ ही वैश्विक मोर्चे पर व्यापार तनाव बढ़ने से निर्यात भी प्रभावित होगा।


सरकार द्वारा उठाए गए परिणाम देखने में लगेगा समय

सिन्हा ने कहा कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के वास्ते वाहन, एमएसएमई और वित्तीय क्षेत्रों के लिए सरकार की ओर से उठाए कदमों के बेहतर परिणाम दिखने में समय लगेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वाहन, लघु उद्योगों और वित्तीय क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने के लिये सरकार ने जिन उपायों की घोषणा की है उनका परिणाम सामने आने में कुछ समय लगेगा।


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भविष्य में बढ़ेगी रफ्तार

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा रफ्तार से 2024-25 तक देश को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाजार मूल्य पर आधारित जीडीपी वृद्धि दर 12 फीसदी होनी चाहिए।

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