31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

2011 से परिचालक के रूप में काम कर रहे 552 कर्मियों को राहत, नहीं हटाए जाएंगी

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2011 की भर्ती के तहत नौकरी कर रहे रोडवेज के 552 परिचालकों को राहत दी है। कोर्ट ने इन्हें नौकरी में बनाए रखने का आदेश दिया है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Jameel Ahmed Khan

•

Updated: 20 Sep 2018, 2:26 PM IST

roadvej

Rajasthan Roadways

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2011 की भर्ती के तहत नौकरी कर रहे रोडवेज के 552 परिचालकों को राहत दी है। कोर्ट ने इन्हें नौकरी में बनाए रखने का आदेश दिया है। न्यायाधीश अशोककुमार गौड़ ने प्यारेलाल ढाका व अन्य की याचिकाओं को निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया है। प्रार्थीपक्ष की ओर से कहा गया था कि हाईकोर्ट ने 2011 की भर्ती के तहत परिचालक पद के लिए चालक के टेस्ट से छूट दे दी थी। उसके स्थान पर लिखित परीक्षा के अंक ढाई गुणा करने का आदेश दिया था। एकलपीठ ने तब तक कोर्ट आने वालों को ही इसका लाभ देने को कहा लेकिन हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने आदेश का लाभ सभी को देने के निर्देश दिए। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर 6032 चयनित अभ्यर्थियों का लाभ देने का आदेश हो गया।

हड़ताल ने सबकुछ बदल दिया : अवमानना याचिका के जरिए मुकदमेबाजी का दूसरा दौर शुरू हुआ तो रोडवेज प्रशासन हरकत में आया और 552 परिचालकों को नौकरी से बाहर करने का निर्णय किया। प्रभावित परिचालक हाईकोर्ट पहुंचे तो खण्डपीठ ने खाली पदों पर समायोजित करने को कहा। इसी बीच कोर्ट ने रोडवेज के प्रबन्ध निदेशक से खाली पद भरने की योजना पूछी तो शपथपत्र आया कि 400 करोड़ रुपए का घाटा है इसलिए भर्तियां नहीं की जाएंगी।

लेकिन, अब रोडवेज कर्मियों ने हड़ताल की तो प्रबन्धन ने खाली पद जल्द भरने का लिखित समझौता कर लिया। इससे रोडवेज प्रबन्धन फंस गया और कोर्ट ने इस समझौते को ध्यान में रखते हुए 552 परिचालकों को नौकरी से निकालने का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने यह भी माना कि चयन के 8 साल बाद नौकरी से निकालना ठीक नहीं है। यह था कर्मियों का तर्क: अधिवक्ता अनूप ढण्ड ने 552 परिचालकों की ओर से कोर्ट को बताया कि अब इनमें से कई नियुक्ति के लिए निर्धारित आयु पार करने के कारण पुन: आवेदन के लिए पात्र नहीं रहे हैं। ऐसे में नौकरी से हटाना उचित नहीं है। गौरतलब है कि पहले दौर की मुकदमेबाजी के कारण रोडवेज को 461 नए अभ्यर्थियों का चयन करना पड़ा था।