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अयोध्या के सरयू तट के किनारे होंगे भारत और दक्षिण कोरिया की साझा सांस्कृतिक के दर्शन

रामनगरी अयोध्या के सरयू तट के किनारे जिस स्थान पर रानी सूरीरत्ना का भव्य स्मारक बनाने की योजना तय की गई है

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अनूप कुमार

अयोध्या : सदियों पुराने एक रिश्ते को नया रूप आकार देने के लिए दक्षिण कोरिया सरकार और भारत सरकार के साझा प्रयास से राम नगरी अयोध्या में एक ऐसा भव्य पार्क बनने जा रहा है जिसमें भारत और दक्षिण कोरिया की साझा सांस्कृतिक विरासत के दर्शन होंगे .भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के प्रयासों से भारत और दक्षिण कोरिया के 2000 साल पुराने संबंधों को जीवंत करते हुए दक्षिण कोरिया की रानी सुरी रत्ना का एक भव्य स्मारक रामनगरी अयोध्या के सरयू तट के किनारे बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगने वाली है . इस बड़ी योजना के लिए दक्षिण कोरिया सरकार 8.60 लाख डॉलर की धनराशि का सहयोग देगी .बताते चलें कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साल 2015 में दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान ही अयोध्या में भव्य स्मारक बनाने के प्रस्ताव पर बातचीत शुरू हुई थी जो अब एक अहम मोड़ पर आ गई है .

रामनगरी अयोध्या के सरयू तट के किनारे जिस स्थान पर रानी सूरी रत्ना का भव्य स्मारक बनाने की योजना तय की गई है

रामनगरी अयोध्या के सरयू तट के किनारे जिस स्थान पर रानी सूरी रत्ना का भव्य स्मारक बनाने की योजना तय की गई है . उस स्थान का कोरिया से आए विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व में निरीक्षण कर लिया है और स्मारक बनाने के लिए जगह का चयन किया जा चुका है . बताते चलें कि अयोध्या में सरयू तट के किनारे पहले से ही कोरियाई पार्क मौजूद है ,जिसके बाद उसी स्थान से सटी हुई भूमि पर रानी सुरी रत्ना का भव्य स्मारक बनाने की योजना है . जिस पर भारत सरकार और कोरिया सरकार प्रयास कर रही है और सब कुछ ठीक रहा तो बहुत जल्द यह योजना धरातल पर उतरेगी . जिसके बाद राम नगरी अयोध्या में भगवान राम की परंपरा और उनके गौरवशाली इतिहास के साथ भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्तो की मधुर सौगात के रूप में दोनों देशों की साझा संस्कृति की तस्वीर भी सरयू तट के किनारे देखने को मिलेगी .

आखिर क्या है अयोध्या और कोरिया के बीच का ये रिश्ता

13 वी शताब्दी के कोरियाई ग्रंथ सम्युक युसा में लिखी गई बातों के मुताबिक आज से करीब 2000 साल पहले अयोध्या की राजकुमारी सुरी रत्ना जलमार्ग के जरिए कोरिया गई थी . जहां उन्होंने 48वीं ईस्वी में राजा सुरो से विवाह कर लिया था . इस विवाह के बाद रानी सूरी रत्ना का नाम रानी हॉ हॉक ओके हो गया था .कोरिया की करीब 8 फ़ीसदी आबादी आज भी राजकुमारी सुरी रत्ना और किम सुरों को अपना पूर्वज मानते हुए खुद को उनका वंशज मानती है . प्रतिवर्ष किम वंश के लोग इस रिश्ते को जीवंत करने के लिए अयोध्या आते हैं और सरयू तट के किनारे बने रानी हो के स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं . भारत सरकार और कोरिया सरकार की यह योजना भी उसी का एक हिस्सा मानी जा रही है .

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