
एमपी में ये शिक्षक आखिर तेंदू पत्ता एकत्र कर क्यों गुजारा करने को हैं मजबूर
गुना। किसी भी समाज ने शिक्षक को सबसे उच्च स्थान दिया है। कोई भी राष्ट्र जब भी विपत्ति में फंसा तो शिक्षकों ने आगे आकर हर विपरीत परिस्थितियों से समाज को उबारा। लेकिन वर्तमान समाज में शिक्षक पर ही आफत के काले बादल छाए हुए हैं। मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षकों का तो सबसे बुरा हाल है। घर-परिवार का पेट पालने के लिए तमाम अतिथि शिक्षक मजदूरी को विवश हैं। कोई तेंदू पत्ता एकत्र करने का काम कर रहा तो कोई दूसरे छोटे-मोटे काम से अपनी आजीविका चला रहा।
एमपी के अतिथि शिक्षकों का अप्रैल में सत्र पूरा हो चुका है। सत्र पूरा होने के बाद ये बेरोजगार होकर दूसरे काम-धंधे कर अपना पेट पालने को मजबूर हैं। बेरोजगार होने के बाद हजारों अतिथि शिक्षक मजदूरी करके और तेंदू पत्ता तोड़कर गुजारा कर रहे हैं।
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अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार बताते हैं कि सरकार को अन्य राज्यों की तरह नीति बनाकर भविष्य सुरक्षित करने एवं मई जून का मानदेय दिलवाने के लिए मुख्यमंत्री को कई पत्र संगठन की ओर से लिख चुके हैं। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जिससे अतिथि शिक्षक आर्थिक संकट से लगातार जूझ रहे हैं।
कई विधायक अतिथि शिक्षकों की दशा पर लिख चुके पत्र
अतिथि शिक्षकों की खराब दशा को नीति बनाकर सुधारने के लिए प्रदेश के कई विधायक समर्थन में शासन को पत्र लिखा है। विधायक डॉ. हीरालाल अलावा, निलय विनोद डागा, अर्जुन सिंह काकोडिया, ब्रम्हा भलावी, शिवनारायण सिंह, प्रणय प्रभात पांडे, प्रताप ग्रेवाल, सुभाष रामचरित्र, पांचिलाल मेढ़ा, देवीलाल धाकड़, विशाल जगदीश पटेल, प्रहलाद लोधी एवं हरदीप सिंह सहित लगभग तीस विधायक समर्थन में मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं। फिर भी स्थिति नहीं सुधर रही है।
Published on:
31 May 2020, 2:45 PM IST
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