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SP साहब को पता ही नहीं और दफ्तर से ट्रांसफर हो गए 71 लाख रुपए, बड़ा घोटाला उजागर

locationग्वालियरPublished: Feb 07, 2024 09:48:55 pm

Submitted by:

Faiz Mubarak

एसपी ऑफिस में एसपी साहब की नाक के नीचे एक आरक्षक ने करीब 71 लाख रुपए का घोटाला किया है। फिलहाल, मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है।

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SP साहब को पता ही नहीं और दफ्तर से ट्रांसफर हो गए 71 लाख रुपए, बड़ा घोटाला उजागर

सरकार की तमाम सख्तियों के बावजूद मध्य प्रदेश में घोटालों के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला सूबे के ग्वालियर से सामने आया है। यहां कहीं और नहीं, बल्कि जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय से लाखों के घोटाले की खबर सामने आई है। घोटाले का आरोप एसपी ऑफिस के आरक्षक पर लगा है। बताया जा रहा है कि आरोपी आरक्षक ने बीते 5 सालों के दौरान सरकारी बिलों में गड़बड़ी कर करके थोड़े बहुत नहीं बल्कि 71 लाख रुपए की गड़बड़ी की है।


अबतक की जांच में सामने आया है कि दफ्तर में पदस्थ सिपाही ने 17 लाख रुपए अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर किए थे। कोष एवं लेखा ने सिस्टम की ऑनलाइन मॉनिटरिंग के बाद पुलिस अधीक्षक दफ्तर में ये गड़बड़ी पकड़ी है। मामले में प्रथम दृष्टया क्लर्क को दोषी मानते हुए मामले की जांच शुरु कर दी है।

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पत्नी के अकाउंट में डाले 17 लाख

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एसएसपी दफ्तर के साल 2018 से जुलाई 2023 के बीच के बिल भुगतान की जांच ट्रेजरी मुख्यालय ने की। जिसमें सामने आया कि यहां पर 77 खातों में 71 लाख रुपए का संदिग्ध भुगतान किया गया है। मामले में बिल क्लर्क (सिपाही) अरविंद सिंह भदौरिया का नाम सामने आया। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि बिल क्लर्क ने 17 लाख रुपए का भुगतान पत्नी नीतू के एसबीआई के बैंक खाते में ट्रांसफर किए हैं। मामले की सूचना वरिष्ठ पुलिस अफसरों को दे दी गई है।


कमेटी करेगी मामले की जांच

पुलिस मुख्यालय ने मामले के लिए एक कमेटी गठित कर दी है। इसका नेतृत्व संयुक्त संचालक कोष कर रहे हैं। टीम में 4 सदस्य रखे गए हैं. इनमें उपसंचालक अर्चना त्रिपाठी, विवेक सक्सेना और नरेंद्र सिंह को शामिल किया गया है। हालांकि जांच में घोटाले की राशि कम ज्यादा होने की भी संभावना है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से पुराने बिलों की डिटेल्स मांगी गई है। कोष एवं लेखा अधिकारियों के मुताबिक पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ये गड़बड़ी 2018 से लेकर जुलाई 2023 के बीच हुई है। इससे पहले पीएचई में भी 81 करोड़ रुपए का संदिग्ध भुगतान पकड़ा जा चुका है। मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। उक्त गड़बड़ी की जांच अभी धीमी चल रहा है, क्योंकि विभाग से भुगतान से जुड़े दस्तावेज मिल नहीं पा रहे हैं। वहीं जांच टीम ने साल 2011 से लेकर 2018 तक के दस्तावेज मांगे हैं।

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