इनसाइड न्यूज: जीवाजी के प्रोफेसरों ने एजूकेशनल टूर के नाम पर डकारे १ करोड़, छात्रों के हाथ न आया कुछ

उच्च शिक्षा विभाग ने विदेशों में होने वाले सेमिनारों के नाम पर मौज करने वाले प्रदेश के सभी प्रोफेसर्स पर अंकुश लगाने की तैयारी कर ली है

By: Gaurav Sen

Published: 13 Mar 2018, 08:24 AM IST

ग्वालियर। उच्च शिक्षा विभाग ने विदेशों में होने वाले सेमिनारों के नाम पर मौज करने वाले प्रदेश के सभी प्रोफेसर्स पर अंकुश लगाने की तैयारी कर ली है। अब उन्हें विदेश यात्रा से पहले प्राचार्य के माध्यम से आयुक्त को मंजूरी के लिए आवेदन भेजना होगा। यहां से अनुमति मिलने के बाद ही वह विदेशों में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने जा सकेंगे।

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यह कवायद इसलिए की जा रही है ताकि छात्रों के पैसे का दुरुपयोग न हो। सूत्रों के अनुसार १० साल में पूरे प्रदेश से सैकड़ों की संख्या में प्रोफेसर्स किसी न किसी बहाने से विदेशों में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने के लिए गए। जिसमें करीब ४० करोड़ रुपए का खर्च आया है। इसमें एक करोड़ २२ लाख का खर्च केवल ग्वालियर अंचल के प्रोफेसर्स है। इतने बड़े स्तर पर रुपयों की बर्बादी का पता चलने पर अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। उच्च शिक्षा मंत्रालय के आदेश के बाद विभाग ने आनन-फानन में गाइड लाइन जारी की है। जिसके अनुसार अब विदेश यात्रा से पहले आयुक्त से अनुमति लेना अनिवार्य है।

"अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का पूरा खर्च संबंधित संस्था उठाएगी। उच्च शिक्षा मंत्रालय किसी प्रकार का फंड जारी नहीं करेगा।"

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नई गाइड लाइन की शर्तें

  • विदेशों में होने वाले कार्यक्रम में जाने की अनुमति किसी भी प्रोफसर को साल में सिर्फ एक बार मिलेगी। उन्हें कुछ सवालों के जवाब देना होंगे।
  • सेमिनारों में जाने से पहले उसकी छात्रों के लिए क्या उपयोगिता है, इसके बार में संबंधित प्रोफेसर को स्पष्टीकरण देना होगा।
  • सेमिनार के लिए कम से कम ५ दिन और अधिक से अधिक १० दिन की अनुमति दी जाएगी। इसके बाद प्रोफेसर्स को
  • इन दिनों में छूटी कक्षाओं की भरपाई के लिए, विदेश से लौटने के बाद अतिरिक्त कक्षाएं लेनी होंगी।

सेमिनार की आड़ में शिक्षक घूमने का करते रहे काम
विदेशों में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में भाग लेने के लिए अंचल से भी सैकड़ों प्रोफेसर्स गए, लेकिन उसका लाभ छात्रों को नहीं मिला। ये यात्राएं सिर्फ दिखावे के लिए की जाती रहीं। असल में अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों की आड़ में शिक्षक अपने निजी काम के लिए विदेश जाया करते थे। जिसकी कई बार शिकायत भी की गई। लेकिन, कार्रवाई के नाम पर आज तक किसी के खिलाफ कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया गया।

 

विदेशों में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों का लाभ छात्रों को मिले, इसलिए प्रोफसरों को वहां भेजा जाता है। अब छात्रों के लिए उपयोगी सेमिनारों में ही शिक्षक को पूरी जांच के बाद भेजा जाएगा।
नीरज मंडलोई, आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग

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