
MP HIGH COURT 17 years of quarrel, wife also filed 10 cases, finally husband ended the dispute by giving 6.15 lakhs
हाईकोर्ट की युगल पीठ में तलाक का एक अनोखा मामला आया है। पति-पत्नी एक दूसरे के खिलाफ 17 साल तक न्यायालय में लड़े। पत्नी ने पति, उसके परिवार के ऊपर अलग-अलग 10 केस भी लगाए। इन केसों के आधार पर पति को कुटुंब न्यायालय शिवपुरी से तलाक भी मिल गया, लेकिन पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी। हाईकोर्ट के समझाने पर दोनों आपसी सहमति से तलाक के लिए तैयार हो गए। सहमति से हुए तलाक के लिए पति ने पत्नी को स्थायी भरण पोषण के रूप में 6.15 लाख रुपए दिए हैं। पति-पत्नी के बीच जो कानूनी विवाद चला, उस विवाद के चलते पति ने संन्यास लिया और बाबा बन गए।
दरअसल गजेंद्र (परिवर्तित नाम) का विवाह वर्ष 2005 में नीता(परिवर्तन) से हुआ था। विवाह के दो साल साथ रह सके। 2007 में पत्नी ने घर छोड़ दिया। पति, उसके परिवार के ऊपर केस दर्ज करा दिए। केस दर्ज होने के बाद दोनों के बीच विवाद और बढ़ गया। इसको लेकर पति ने कुटुंब न्यायालय शिवपुरी में तलाक के लिए परिवाद दायर किया। पति ने कोर्ट के समक्ष उन सभी केसों को रखा, जिसे पत्नी ने दर्ज कराया था। हालांकि न्यायालय में सभी केस झूठे निकले। पत्नी ने जो झूठे केस दर्ज कराए, उसे कुटुंब न्यायालय ने क्रूरता माना। इसी आधार पर पति के पक्ष में 29 जून 2015 को तलाक की डिक्री पारित कर दी। इस डिक्री के खिलाफ नीता ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। यह अपील 2015 से लंबित थी। बुधवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों को बुलाया। अलग रहते हुए दोनों को काफी लंबा समय बीत गया। कोर्ट ने अलग होने की सलाह दी। पत्नी 6.15 लाख रुपए लेकर आपसी सहमति से तलाक के लिए तैयार गई। पति ने 6.15 लाख रुपए का भुगतान पत्नी को कर दिया। कोर्ट ने तलाक को मंजूर कर दिया। गजेंद्र का कहना है कि 17 साल केसों का सामना कर रहा हूं। इस कारण बाबा भी बन गया हूं।
Published on:
11 Apr 2024 11:16 am
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