मौत से पहले सविता यह नहीं समझ पा रही थी आखिर किस तरह परिवार को खत लिखे इसलिए उसने चिटठी की शुरुआत ही क्या लिखूं और कैसे लिखूं यह समझ में नहीं आ रहा है पक्तियों से की है। लेकिन फिर दिल को गुबार को निकलते हुए लिखा है मैने तुम सबको बहुत परेशान किया है। सबसे ज्यादा परेशानी महेश (पति) और बेटे अमय को हुई है। अमय तो सोच रहा होगा एेसी मां किसी को नहीं मिले। लेकिन अब किसी को परेशान नहीं करुंगी। संसार छोड़ कर जा रही हूं। मुझे नहीं पता यह खत तुम्हे कब मिलेगा। लेकिन जब भी मिले इस पर अमल जरुर करना। मैने घर से भागकर जो फैसला लिया था उसने मेरे लिए सब दरवाजे बंद कर दिए हैं। एेसे में मरने के सिवा कोइ्र्र रास्ता नहीं है। लेकिन अपना जीवन बर्वाद करने वालों को मैं आसानी नहीं छोडूंगी। उनकों दंड मिले इसलिए उनके घर में ही फांसी लगाकर मरना चाहती हूं। तुम लोग भी कुछ करो जिससे कम से कम दोषियों को 10 साल की सजा हो। शोभा और उसकी भाभी को सजा होगी तब मेरी आत्मा को शांति मिलेगी। दूसरों का जीवन बर्वाद करने वाली औरते जेल में होना चाहिए। मेरा कोई सामान इनके पास नहीं रहे। कपडे, मेकअप , चप्पल ओर जेवरात उनसे लेना। एटीएम और पिन नंबर वाटसएप पर भेज दुंगी। पते के साथ एटीएम कार्ड भेजना रिस्की है। पीएफ में उदय को मैने उत्तराधिकारी बनाया है। सब पैसे निकला लेना। यशु, साक्षी, पार्थ, गार्गी, मनु और हर्ष के लिए मेरे एसबीआई और आईसीआईसीआई की सेविंग यूज करो।