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सविता नहीं चाहती थी जेल में भी साथ रहें  ननद-भाभी

मुंबई से सविता राणे भले शुभा से दोस्ती के भरोसे घर परिवार छोड़कर आई हो लेकिन मरते वक्त उसके दिल में शुभा और सीमा के लिए बेहद नफरत थी। मौत से पहले परिवार को लिखे आखिरी खत में उसने ननद भाभी के प्रति गुस्सा हो जाहिर किया है।

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monu sahu

May 02, 2016

gwalior news hindi, mp news hindi

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ग्वालियर।
मुंबई से सविता राणे भले शुभा से दोस्ती के भरोसे घर परिवार छोड़कर आई हो
लेकिन मरते वक्त उसके दिल में शुभा और सीमा के लिए बेहद नफरत थी। मौत से
पहले परिवार को लिखे आखिरी खत में उसने ननद भाभी के प्रति गुस्सा हो जाहिर
किया है। मराठी में लिखे खत में सविता ने लिखा है सीमा और शुभा उसकी मौत की दोषी है। दोनों को कम से कम से दस साल की सजा होना चाहिए। दोनों जेल में सडे़ यहीं उसकी तमन्ना हैं। लेकिन जेल भी दोनों को साथ नहीं रहने दिया जाए। वहां भी यह अपनी प्रेम कहानी शुरु कर देंगी। दोनों को अलग ररखा जाए। इन्हें एहसास होना चाहिए दूसरों को घर तुडवाने का मतलब क्या होता है। जिस तरह मैने 8 से 10 साल का रो धोकर कर गुजारा है। इनका समय भी वैसा ही निकलना चाहिए। खत के अंत में सविता ने लिखा है सीमा और शुभा को सजा दिलाने के लिए उसके पास एक प्वाइंट है। 1997-98 में दोनों जबलपुर भाग कर गईं थीं। इसमें शुभा पर एफआईआर भी हुई थी। शुभा और सीमा उर्फ मोना को सजा होना चाहिए। सविता राणे ने ननद-भाभी से परेशान होकर एम्बीऐंस हॉटल में 18 अप्रैल को फांसी लगाकर दी थी जान।

क्या लिखूं, कैसे लिखूं

मौत से पहले सविता यह नहीं समझ पा रही थी आखिर किस तरह परिवार को खत लिखे इसलिए उसने चिटठी की शुरुआत ही क्या लिखूं और कैसे लिखूं यह समझ में नहीं आ रहा है पक्तियों से की है। लेकिन फिर दिल को गुबार को निकलते हुए लिखा है मैने तुम सबको बहुत परेशान किया है। सबसे ज्यादा परेशानी महेश (पति) और बेटे अमय को हुई है। अमय तो सोच रहा होगा एेसी मां किसी को नहीं मिले। लेकिन अब किसी को परेशान नहीं करुंगी। संसार छोड़ कर जा रही हूं। मुझे नहीं पता यह खत तुम्हे कब मिलेगा। लेकिन जब भी मिले इस पर अमल जरुर करना। मैने घर से भागकर जो फैसला लिया था उसने मेरे लिए सब दरवाजे बंद कर दिए हैं। एेसे में मरने के सिवा कोइ्र्र रास्ता नहीं है। लेकिन अपना जीवन बर्वाद करने वालों को मैं आसानी नहीं छोडूंगी। उनकों दंड मिले इसलिए उनके घर में ही फांसी लगाकर मरना चाहती हूं। तुम लोग भी कुछ करो जिससे कम से कम दोषियों को 10 साल की सजा हो। शोभा और उसकी भाभी को सजा होगी तब मेरी आत्मा को शांति मिलेगी। दूसरों का जीवन बर्वाद करने वाली औरते जेल में होना चाहिए। मेरा कोई सामान इनके पास नहीं रहे। कपडे, मेकअप , चप्पल ओर जेवरात उनसे लेना। एटीएम और पिन नंबर वाटसएप पर भेज दुंगी। पते के साथ एटीएम कार्ड भेजना रिस्की है। पीएफ में उदय को मैने उत्तराधिकारी बनाया है। सब पैसे निकला लेना। यशु, साक्षी, पार्थ, गार्गी, मनु और हर्ष के लिए मेरे एसबीआई और आईसीआईसीआई की सेविंग यूज करो।

बेटे पति की गुनाहगार, माफ करना

सविता ने खत में लिखा है बेटे अमय और पति महेश की गुनाहगार है। बेटे से उसने कहा है तेरी मां इतनी खराब नहीं है। उसका समय खराब था इसलिए उससे एेसा पाप हो गया। मेरा तिरस्कार मत करना। मेरा तिरस्कार मत करना। सुहागन मानकर अंतिम संस्कार किया जाए। महेश की पत्नी रहते हुए मरी हूं। उसकी पत्नी मानकर अंतिम संस्कार किया जाए। यह मेरी इच्छा है। लेकिन यह महेश को मान्य हो तो। सबसे क्षमा मागंती हूं। सब प्रेम से रहो। मेरे जैसा जीवन किसी का न हो।


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