scriptराजस्थान का यह जिला कन्या भ्रूण हत्या के लिए था बदनाम, पर अब यहां बेटियां बढ़ा रही मान | Hanumangarh district of Rajasthan was infamous for female foeticide, but now daughters are increasing Rashtrapati Bhavan | Patrika News
हनुमानगढ़

राजस्थान का यह जिला कन्या भ्रूण हत्या के लिए था बदनाम, पर अब यहां बेटियां बढ़ा रही मान

Rajasthan News : कभी जो जिला कन्या भ्रूण हत्या और घटते कन्या लिंगानुपात के लिए बदनाम था, आज वहां बेटियां अपने ज्ञान की बदौलत सबका मान बढ़ा रही हैं।

हनुमानगढ़Jun 06, 2024 / 03:39 pm

Omprakash Dhaka

Hanumangarh district
Hanumangarh News : कभी जो जिला कन्या भ्रूण हत्या और घटते कन्या लिंगानुपात के लिए बदनाम था, आज वहां बेटियां अपने ज्ञान की बदौलत सबका मान बढ़ा रही हैं। बेटियों का विज्ञान का ज्ञान उनको राष्ट्रपति भवन और विदेश यात्रा तक का अवसर मुहैया करवा रहा है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान की ओर से हर साल देश भर से श्रेष्ठ साठ बाल वैज्ञानिकों का चयन किया जाता है।
इन बाल वैज्ञानिकों को अपने विज्ञान मॉडल की प्रदर्शनी राष्ट्रपति भवन में लगाने का मौका मिलता है। जिले से पिछले सात-आठ साल में चार विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शनी के लिए हो चुका है। खास बात यह है कि चयनित चारों बाल वैज्ञानिक बेटियां हैं। कभी कन्या भ्रूण हत्या के लिए बदनाम रह चुके हनुमानगढ़ जिले के लिए बेटियों की यह कामयाबी बहुत मायने रखती है और सबको कई सबक सिखाती है।

इको फ्रेंडली रस्सी

टाउन की आफरीन प्लास्टिक की खाली बोतलों से पतली रस्सी बनाने का मॉडल बनाकर अपना हुनर दिखा चुकी है। उनके मॉडल से प्लास्टिक की बोतलों से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिलती है। इसमें बोतल को विशेष मशीन से पतले मजबूत धागों में काटा जाता है। इन धागों को कुर्सी, रस्सी, चारपाई आदि बनाने में नायलॉन की जगह काम लिया जा सकता है। आफरीन का बाल वैज्ञानिकों के साथ जापान जाने के लिए भी चयन हो चुका है।

विदेश यात्रा को चयन

ढोलनगर के राउमावि की छात्रा खुशवीर कौर ने एडजेस्टेबल कूलर स्टैंड बनाया है। खुशवीर के पिता गुरतेज सिंह मजदूरी करते हैं और माता स्वर्णजीत कौर गृहिणी है। उसके मार्गदर्शक शिक्षक नरेश सोनी बताते हैं कि जब खुशवीर ने अपना मॉडल जिला स्तर पर प्रदर्शित किया था तो वह 13 वर्ष की थी। उसका बाल वैज्ञानिक के तौर पर जापान यात्रा के लिए भी चयन हो गया था। मगर आयु 15 वर्ष से कम होने के कारण वह जापान नहीं जा सकी थी।

स्वत: बंद होने वाला चूल्हा

टाउन के रूपनगर स्थित निजी स्कूल की छात्रा पिंद्रपाल कौर ने गृहिणियों की सुरक्षा के लिए ऐसा गैस चूल्हा बनाया है जो खाना या अन्य कोई तरल पदार्थ गिरने से जैसे ही बंद होगा, वैसे ही सिलेंडर से गैस की सप्लाई बंद हो जाएगी। इससे आग बुझने तथा गैस सप्लाई बंद नहीं होने से आग लगने के जो हादसे गृहिणियों के साथ होते हैं, उन पर अंकुश लग सकेगा। बिजली सप्लाई से एक डिवाइस चूल्हे से अटैच की गई। गैस चूल्हा बंद होने पर गैस सप्लाई का बटन स्वत: मुड़ जाता है।

बह रही बदलाव की बयार

वर्ष 2011 की जनगणना में जिले का कन्या लिंगानुपात 869 आया था। मगर इसके बाद विभिन्न दिशा में किए गए प्रयासों तथा कारणों से हालात बदले हैं। गत एक दशक में जो संस्थागत प्रसव हुए हैं, उनमें कन्या लिंगानुपात साढ़े नौ से भी ज्यादा आया है। बालिका शिक्षा का ग्राफ भी बढ़ा है।

थेपड़ी बनाने वाली मशीन

राउमावि लखासर की छात्रा अनुष्का पुत्री आत्माराम कलवानिया ने गोबर के उपले बनाने की मशीन का मॉडल बनाया। इसमें गोबर व पानी डालकर घुमाया जाता है। नीचे लगे स्टैंड को पैरों से दबाने पर गोबर प्लेट स्टैंड के सहारे सांचे में जाकर उपले के आकार में निकलता है। पहियों के सहारे इस मशीन को एक से दूसरी जगह पर आसानी से ले जाया जा सकता है।

कई स्तर पर चयन

प्रदेश भर के टॉप साठ बाल वैज्ञानिकों का चयन कर उनको अपने मॉडल की प्रदर्शनी राष्ट्रपति भवन में लगाने का मौका मिलता है। पहले जिला स्तर, फिर राज्य स्तर पर और बाद में राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनी लगती है। राष्ट्रीय स्तर पर नई दिल्ली में जो प्रदर्शनी लगती है, उसमें से ही श्रेष्ठ साठ का चयन राष्ट्रपति भवन में लगने वाली प्रदर्शनी के लिए किया जाता है।

प्रोत्साहन का प्रमाण

हनुमानगढ़ जिला पिछले कई बरस से इंस्पायर अवार्ड पंजीयन में अच्छा प्रदर्शन करता रहा है। यहां से बालिकाओं का राष्ट्रीय प्रदर्शनी के लिए चयन इस बात का प्रमाण है कि जिले में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में सार्थक प्रयास हुए हैं। यह प्रयास निरंतर जारी रहे ताकि बाल वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन मिलता रहे।

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