
किसानों को धान पर एमएसपी देने मामले में सरकार ने खींचे हाथ, अब पराली जलाने पर मिलेगा आर्थिक दंड
हनुमानगढ़. किसानों को फसलों का एमएसपी देने में सरकार आनाकानी कर रही है। अभी तक धान व मूंग सहित अन्य फसलों पर एमएसपी देने को लेकर सरकार ने किसी तरह का निर्णय नहीं लिया है। इस स्थिति में जिले के किसान पसोपेश की स्थिति में हैं। अब सरकार ने धान अवशेष (पराली) जलाने पर किसानों पर अर्थ दंड लगाने का फरमान जारी कर दिया है। इससे किसान चिंतित हैं। इस वर्ष जिले में लगभग 52000 हैक्टेयर में धान फसल की खेती की गई है। इससे अनुमानित 35-40 लाख क्विंटल पराली का उत्पादन हुआ है। कृषकों में धान की फसल कटाई के तुरंत बाद खेत खाली कर गेहूं की बिजाई की जाती है। इसलिए कृषकों की धान फसल अवशेष (पराली) को जलाने की प्रवृत्ति है। जिला कलक्टर कानाराम ने किसानों को धान फसल कटाई उपरांत फसल अवशेष (पराली) को नहीं जलाने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही फसल अवशेष प्रबंधन के लिए तकनीकी जानकारी देने के लिए कहा है। ताकि पर्यावरण प्रदूषित नहीं हो। कृषकों को जागरूक करने के लिए धान उत्पादक क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर पर किसान गोष्ठियों का आयोजन भी किया जा रहा है। यह गोष्ठियां नौ अक्टूबर तक चलेगी। किसान गोष्ठियों में फसल अवशेष (पराली) के समुचित प्रबंधन के लिए फसल अवशेष को पशुओं के चारे के रूप में उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पराली की गांठ बनाकर बायोमास आधारित पावर प्लांटों में उपयोग में लेने एवं गौशालाओं में चारे के रूप में उपयोग में लेने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाएगा। संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) योगेश कुमार वर्मा ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बोर्ड, नई दिल्ली द्वारा जारी आदेशों में दो एकड़ क्षेत्रफल तक फसल अवशेष जलाने पर 2500 रुपए, 2 से 5 एकड़ क्षेत्रफल तक 5 हजार रुपए तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फसल अवशेष जलाने पर 15 हजार रुपए तक पर्यावरण क्षति पूर्ति के रूप में जुर्माना राशि वसूलने का प्रावधान है। इसलिए कृषकों से अपील की जाती है कि धान फसल कटाई उपरांत फसल अवशेष (पराली) जलाने की बजाय उचित प्रबंधन करें। ताकि पशुओं के लिए चारे की कमी भी ना हो सके एवं पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
इसलिए नहीं लगाएं आग
खेत में आग लगाने पर जमीन के अंदर निवास करने वाले मित्र कीट भी मरते हैं। इससे भूमि की उपजाऊ क्षमता भी घटती है। ऐसे में जरूरी है कि किसान पराली की कुछ मात्रा को खेत में ही दबा दें। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी। इसके अलावा पराली की गांठ बनाकर इसे पॉवर प्लांट या फोडर प्लांट से संपर्क करके वहां भी बेच सकते हैं। इससे किसानों को कुछ आमदनी भी होगी।
Updated on:
05 Oct 2024 11:19 am
Published on:
05 Oct 2024 11:18 am
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