नवजात शिशु को कुछ हुआ तो धरने पर बैठे परिवार पर होगी कार्रवाई
– ढाणी के लिए रास्ता देने की मांग को लेकर धरने पर बैठी विवाहिता की समझाइश
– नवजात को लेकर आठ दिन से महिला धरने पर, बाल कल्याण समिति ने सुनी पीड़ा
हनुमानगढ़. ढाणी के लिए रास्ता उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर पक्का सारणा के चक 23 एलएलडब्ल्यू में अस्थाई झोंपड़ी बनाकर अपने 11 दिन के बच्चे एवं परिवार के अन्य सदस्यों संग विवाहिता लगातार आठवें दिन शुक्रवार को धरने पर डटी रही। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष जितेन्द्र गोयल ने मौके पर पहुंच परिवार की पीड़ा सुनी। उनको समस्या समाधान में सहयोग करने का भरोसा दिलाया। साथ ही परिवार को समझाया कि नवजात बच्चे की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की लापरवाही ना बरती जाए। इसके लिए उनको पाबंद किया गया कि यदि बच्चे के साथ कोई अनहोनी होती है तो परिवार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने बताया कि यह मामला रेवेन्यू कोर्ट में विचाराधीन है। लम्बे समय से यह परिवार ढाणी बनाकर रह रहा है। रास्ते के लिए परिवार डीएलसी दर से दोगुना अधिक रकम देने को तैयार है। जमीन के बदले जमीन देने की बात भी कह रहा है। इसके बावजूद अब तक मामले का निपटारा नहीं हो सका है। इस संबंध में जिला कलक्टर एवं एसडीएम से बात कर प्रयास किया जाएगा कि यह परिवार इस तरह खुले में ना रहे।
क्या है मामला
पक्का सारणा के चक 23 एलएलडब्ल्यू में ढाणी बना कर रहने वाले इंद्राज की पत्नी को 20 मार्च को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल जाने के लिए एम्बुलेंस को बुलाया गया। ढाणी जाने का रास्ता नहीं होने के कारण महिला को ढाणी से एम्बुलेंस तक चारपाई पर लाया गया। इसके बाद 24 मार्च को प्रसूता एवं नवजात को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। एम्बुलेंस ने जहां से उनको बैठाया था, उसी जगह पर छोड़ दिया। इसके बाद प्रसूता अपने नवजात शिशु को लेकर चारपाई पर वहीं अस्थाई झोंपड़ी बनाकर धरने पर बैठ गई। हालांकि सूचना मिलने पर एसडीएम अवि गर्ग तथा संबंधित पटवारी आदि महिला व उसके परिवार से मिलने पहुंचे थे। समझाइश कर उनको एवं दूसरे पक्ष को 27 मार्च को अपने कार्यालय में वार्ता के लिए बुलाया था। मगर अब तक मामले का निपटारा नहीं हो सका है।