
पत्रिका में समाचार प्रकाशित होने पर जल संसाधन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर देखी स्थिति
नहर को जांचने पहुंचे नहरी महकमे के अफसर, पत्रिका में समाचार प्रकाशित होने पर जल संसाधन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर देखी स्थिति
-दो दिन के भीतर कटाव के पास पक्का स्ट्रक्चर तैयार कर समस्या का स्थाई समाधान करने का दावा
-पत्रिका में समाचार प्रकाशित होने पर जल संसाधन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर देखी स्थिति
हनुमानगढ़. भाखड़ा सिंचाई प्रणाली की केसएसपी नहर के टूटने की शिकायत के बाद जल संसाधन विभाग के अफसरों की टीम शुक्रवार को गांव में पहुंची। टीम ने जहां से नहर टूट रही है, वहां का मौका मुआयना करवाकर तत्काल सुधार की कार्रवाई शुरू कर दी। जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता शिवचरण रैगर ने बताया कि वर्ष 2020 में नहर के पुनरोद्धार का कार्य हुआ था। इसके बाद पहली बार 25 जनवरी को नहर टूटी। इसके बाद कटाव को दुरुस्त करवा दिया गया। प्रभावित किसानों को सिंचाई पानी की बारी का लाभ दिलाने को लेकर नहर में फिर पानी चलाया तो जहां दोबारा कटाव आ गया, वहां फिर दिक्कत शुरू हो गई। अब फिर से जहां से कटाव आया था, वहां पर एक-दो तीन में पक्का स्ट्रक्चर बनाकर समस्या का स्थाई समाधान करवाने का प्रयास रहेगा। इससे नहर में कटाव की स्थिति दूर हो सकेगी। अधीक्षण अभियंता ने बताया कि आठ फरवरी से इस नहर में फिर से रेग्यूलेशन प्रभावी होगा। इससे पहले नहर को दुरुस्त करवा दिया जाएगा। जिससे निर्बाध रूप से नहर में पानी प्रवाहित हो सके।
कलक्टर ने मांगी रिपोर्ट
राजस्थान पत्रिका के दो फरवरी 2024 के अंक में ‘बार-बार टूट रही केएसपी नहर, अफसर नहीं दे रहे ध्यान’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया। इसमें किसानों को नहर टूटने से हो रही परेशानी का जिक्र किया गया। इसके बाद जिला कलक्टर कानाराम ने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर समस्या निस्तारण का निर्देश दिया। इसकी रिपोर्ट भी विभाग से मांगी। इस तरह अब विभागीय टीम ने मौका निरीक्षण करके राहत कार्य शुरू करवा दी है। इससे भविष्य में किसानोंं को राहत मिलने के आसार हैं।
नहर टूटने का यह कारण
जल संसाधन विभाग के अफसरों का कहना है कि नहर में कटाव आने का प्रमुख कारण जानवरों के बड़े-बड़े बिल का होना है। पटड़े के आसपास बड़े बिल होने के कारण से केएसपी नहर के आरडी 23.228 के पास करीब 45 फुट में नहर में दरार आ गई थी। इस कारण से नहर में पानी का प्रवाह बंद किया गया था। बाद में कटाव को बंद करके जब पानी प्रवाहित किया गया था तो फिर से नहर में रिसाव आ गया था। इस वजह से किसानों के खेतों में जल भराव की स्थिति बन गई थी।
Published on:
03 Feb 2024 10:47 am
