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दिमागी कमजोरी (डिमेंशिया) का 9 साल पहले पता लगाएगा नया टेस्ट

यूके के शोधकर्ताओं ने एक नया परीक्षण विकसित किया है जो डिमेंशिया का निदान होने से नौ साल पहले ही उसकी भविष्यवाणी कर सकता है।
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Dementia prediction test

Dementia prediction test

यूके के शोधकर्ताओं ने एक नया परीक्षण विकसित किया है जो डिमेंशिया का निदान होने से नौ साल पहले ही उसकी भविष्यवाणी कर सकता है। यह खोज महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि डिमेंशिया से दुनिया भर में 55 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित होते हैं।

क्वींस मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नया परीक्षण सामान्यतया इस्तेमाल होने वाले स्मृति परीक्षणों या मस्तिष्क के सिकुड़ने के मापन की तुलना में 80 प्रतिशत अधिक सटीक है।

यह परीक्षण कार्यात्मक एमआरआई (fMRI) स्कैन के विश्लेषण पर आधारित है और मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (DMN) में होने वाले परिवर्तनों का पता लगाता है, जो मस्तिष्क के विभिन्न क्षेत्रों को विशेष संज्ञानात्मक कार्य करने के लिए जोड़ता है।

DMN वह पहला न्यूरल नेटवर्क है जो अल्जाइमर रोग से प्रभावित होता है।

क्वींस मैरी के वोल्फसन इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन हेल्थ के चार्ल्स मार्शल ने इस पूर्वानुमानिक परीक्षण को "मस्तिष्क कोशिकाओं की अपरिवर्तनीय हानि को रोकने के लिए उपचार विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण" बताया है, जो डिमेंशिया के लक्षणों का कारण बनता है।

शोधकर्ताओं ने 1,100 से अधिक स्वयंसेवकों के fMRI स्कैन का उपयोग करके डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क के दस क्षेत्रों के बीच प्रभावी कनेक्टिविटी का अनुमान लगाया।

जर्नल नेचर मेंटल हेल्थ में प्रकाशित निष्कर्षों के अनुसार, मॉडल ने आधिकारिक निदान से नौ साल पहले तक डिमेंशिया के शुरुआत की सही भविष्यवाणी की और 80 प्रतिशत से अधिक सटीकता के साथ की।

जिन मामलों में स्वयंसेवकों में डिमेंशिया विकसित हुआ, उनमें भी मॉडल ने दो साल के मार्जिन की त्रुटि के भीतर सही भविष्यवाणी की कि निदान होने में कितना समय लगेगा।

इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने पाया कि अल्जाइमर के लिए आनुवंशिक जोखिम DMN में कनेक्टिविटी परिवर्तनों के साथ दृढ़ता से जुड़ा हुआ था।

उन्होंने यह भी पाया कि सामाजिक अलगाव DMN में कनेक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है और डिमेंशिया के जोखिम को बढ़ा सकता है।

(आईएएनएस) -

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।