जीवन रक्षा कौशलों का प्रशिक्षण पाना जरूरी

जीवन रक्षा कौशलों का प्रशिक्षण पाना जरूरी
-किम्स निदेशक डॉ. रामलिंगप्पा अंटरतानी ने कहा
हुब्बल्ली

जीवन रक्षा कौशलों का प्रशिक्षण पाना जरूरी
हुब्बल्ली
किम्स के निदेशक डॉ. रामलिंगप्पा अंटरतानी ने कहा है कि किम्स में प्रतिदिन 6 0-70 मरीज आपात चिकित्सा विभाग में दर्ज होते है। किम्स के चिकित्सकों के लिए जीवन रक्षा कौशल प्राप्त करने की जरूरत है।
डॉ. अंटरतानी किम्स के गोल्डल जुबली सभाभवन में मंगलवार को सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन की ओर से आयोजित दो दिवसीय क्रिटिकल केयर कार्यशाला का उद्घाटन कर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि ङ्क्षजदगी और मौत के बीच संघर्ष करने वाले अस्पताल में आने पर उनके स्वास्थ्य समस्या को जानकर सही इलाज देनी की जरूरत है। इस बारे में चिकित्साकों के ज्ञान को बढ़ाने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। चिकित्सा कौशल का सदुपयोग कर अपडेट होकर मरीजों की जान बचानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंौजूदा 1200 बेड के किम्स में शीघ्र ही बेड की संख्या बढ़कर 1800 होगी। बाद में राज्य के बड़े अस्पताल की ख्याति पाएगा। किम्स अस्पताल में दो एक्सल-1000 मशीनों को हार्मोन एनेलाइजर सेवा उपलब्ध है। फिलहाल अस्पताल में 65 वेंटिलेटर हैं और तीस वेंटिलेटर शीघ्र ही लगाए जाएंगे। फिलहाल किम्स के आईसीयू में 120 बेड हैं, जिनकी संख्या बढ़ानी है।

डॉ. अंटरतानी ने कहा कि प्रसव के दौरान होने वाली मृत्यु दर को कम करने के लिए जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए। दक्षिण भारत के राज्यों में कर्नाटक में प्रसव के दौरान मृत्यु दर बढ़ी है। फिलहाल राज्य में एक लाख में 62 जनों की प्रसव के दौरान मृत्यु हो रही है। इसे कम करने की कार्रवाई करनी चाहिए। अमरीका तथा आस्टे्रलिया से संसाधन व्यक्ति क्रिटिकल केयर के बारे में व्याख्यान देने के लिए आए हैं। शहर के चिकित्सकों को उनके अनुभवों को सुनना चाहिए।

आपात चिकित्सा चुनौती

किम्स निदेशक डॉ. अंटरतानी ने कहा कि हादसे तथा अन्य आपात मौकों पर इलाज प्राप्त करने के लिए आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इस दौरान इलाज करना ही चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती है। आपात मौकों पर कैसे उचित चिकित्सा देनी चाहिए इस बारे में युवा चिकित्सकों को नई जानकारियां समझने की जरूरत है। इस लिए जीव रक्षा के बारे में कार्यशाला आयोजित की गई है।
किम्स चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि किम्स में ही पढ़ाई कर विदेश में चिकित्सा सेवा सौंपने वाले चिकित्सकों की ओर से यहां जीव रक्षा कौशल कार्यशाला आयोजित करना सराहनीय है।
आस्ट्रेलिया के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. भीमसेनाचार्य प्रसाद ने एयरवे मैनेजमेंट के बारे में बताया कि जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे व्यक्ति को अस्पताल लाने पर ऑक्सीजन (प्राणवायु) के बारे में विशेष ध्यान देना चाहिए। नियमित तौर पर ऑक्सीजन आपूर्ति करना चाहिए। इससे मात्र शरीर में स्थित तीन ट्रिलियन जैवकोशों को सक्रिय बनाना संभव होगा। हवा शरीर के बाहर तथा भीतर, खून पूरे शरीर में परिवहन कह रहा है इसकी पुष्टि करनी चाहिए। अधिक ऑक्सीजन जीवन के लिए खतरा ला सकता है।
अमरीका के चिकित्सक डॉ. कृष्णा अपरंजी ने मानीटरिंग ऑक्सीजन बैलेंस एण्ड एसिड बेस स्टेटस के बारे में व्याख्यान दिया। कार्यशाला में किम्स के प्राचार्य डॉ. एमसी चंद्रु, डॉ. राजेश्वरी जैनापुर, डॉ. ईश्वर हसबी, डॉ. एएस अक्कमहादेवी, डॉ. बीएस पाटील उपस्थित थे।

Zakir Pattankudi
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