script सब्जी के रूप में बिक रहा हरा मटर ! रेट जानकर हो सकते हैं परेशान | Green peas being sold as a vegetable! You may get worried after knowing the rate | Patrika News

सब्जी के रूप में बिक रहा हरा मटर ! रेट जानकर हो सकते हैं परेशान

locationइंदौरPublished: Dec 11, 2023 08:52:55 am

Submitted by:

Ashtha Awasthi

7 प्रोसेसिंग यूनिट लेकिन क्षमता बहुत कम......

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Green peas

जबलपुर। शहर में मटर के प्रसंस्करण इकाइयों की कमी से किसानों को हरा मटर की बेहतर उपज नहीं मिल पा रही है। यही कारण है कि 90 प्रतिशत मटर कद्मचे माल के रूप में बिक जाता है। अभी सात इकाइयां हैं, उनकी क्षमता भी महज 16 हजार मीट्रिक टन है। अभी जैसे ही खेतों से मटर टूटता है, उसके दो से तीन घंटे बाद ही मंडी में बिक्री के बाद बाहर चला जाता है।

4 लाख मीट्रिक टन क्षमता

जिले में मटर की पैदावार 4 लाख मीट्रिक टन के करीब है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके प्रसंस्करण में कितनी क्षमता है। यदि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा मिलता तो इन उद्योगों को मटर के रूप में भरपूर कद्मचा माल मिलता वहीं किसानों को भी घाटा नहीं उठाना पड़ता।

दो से तीन गुना हो जाती है कीमत

पूरे सीजन में हरा मटर औसतन 10 से लेकर 30 रुपए किलो थोक में बिकता है। फुटकर में कीमत 40 से 50 रुपए मिलता है। दूसरी तरफ फ्रोजन मटर की कीमत की बात करें तो यह 120 से लेकर 180 रुपए किलो तक रहती है। कभी-कभी बाजार में कीमत बहुत निचले स्तर पर पहुंच जाती है।

इस साल चार उद्योगों की स्थापना

जिले में तीन मटर प्रसंस्करण इकाइयां संचालित हो रही थीं। इनमें सबसे बड़ी ग्राम खैरी के पास निजी क्षेत्र की कंपनी है। आसपास दो और इकाइयां चलती हैं। चार इकाइयों की स्थापना इस साल हुई है। सातों इकाइयों में अभी केवल 10 हजार 200 मीट्रिक टन का प्रसंस्करण किया जा सकता है।

गन्ना की मिल रही कीमत, यहां कुछ नहीं

प्रदेश में गन्ना का उत्पादन कई गुना बढ़ गया है। लेकिन किसानों को उपज बेचने के लिए शुगर मिलें मौजूद है। मटर के मामले में ऐसा नहीं है। यही हाल ङ्क्षसघाडा को लेकर है। उसकी इकाइयां कम है। जबकि सिहोरा की ङ्क्षसघाडा मंडी एशिया की सबसे बड़ी मंडियों में शामिल है।

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