नए नियम ने तोड़ा डॉक्टर बनने का सपना,दो हजार से ज्यादा छात्र नीट देने से पहले ही दौड़ से बाहर

नए नियम ने तोड़ा डॉक्टर बनने का सपना,दो हजार से ज्यादा छात्र नीट देने से पहले ही दौड़ से बाहर

Arjun Richhariya | Publish: Feb, 15 2018 10:06:25 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

प्राइवेट परीक्षार्थी नहीं कर पा रहे आवेदन, जताया विरोध

नीट के नए नियम ने तोड़ा डॉक्टर बनने का सपना

इंदौर. मेडिकल कोर्सेस में एडमिशन के लिए होने जा रही नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) के लिए सीबीएसई ने इस साल नियमों में बड़े बदलाव कर दिए। इस कारण कई ऐसे छात्र नीट के आवेदन ही नहीं कर पा रहे है, जो पिछले दो साल से मेडिकल कोर्स में एडमिशन की तैयारियों में जुटे थे। इस बार से सिर्फ वे ही छात्र नीट दे सकते है, जिन्होंने नियमित बारहवीं में फिजिक्स और
कैमिस्ट्री के साथ बायोलॉजी की पढ़ाई की हो।

6 मई को होने जा रही नीट के लिए ऑनलाइन आवेदन 9 मार्च तक हो सकेंगे। नीट की तैयारी के लिए प्रदेश के कई शहरों के छात्र इंदौर में रह रहे है। इनमें से ज्यादातर छात्र ऐसे है, जिन्होंने तैयारी में पूरा समय देने के लिए बारहवीं किसी स्कूल में नियमित पढऩे के बजाय प्राइवेट (स्वाध्यायी) फॉर्म जमा किए। अब तक इन सभी को नियमित परीक्षार्थियों की तरह प्रवेश परीक्षा देने का मौका मिलता था। लेकिन, नीट में इस बार से बारहवीं की परीक्षा प्राइवेट देने वालों को अपात्र कर दिया। इससे शहर में ही तैयारी कर रहे दो हजार से ज्यादा छात्र नीट देने से पहले ही दौड़ से बाहर हो गए। इनके अलावा एक और महत्वपूर्ण बदलाव ने भी कुछ छात्रों के अरमानों पर पानी फेर दिया। एक्सपर्ट डॉ. कमल शर्मा ने बताया, नियमों में बदलाव से कई होनहार छात्र प्रभावित हुए है।

गणित के साथ बायोलॉजी पढऩे वाले भी हुए अपात्र

पहले नीट के लिए बारहवीं में बायोलॉजी विषय अनिवार्य था। कई छात्र ऐसे है, जो मैथ्स और बायोलॉजी दोनों विषय की पढ़ाई करते है। फिजिक्स और कैमिस्ट्री के साथ वे इनमें से कोई एक विषय की परीक्षा अतिरिक्त विषय में देते थे। इससे वे मेडिकल के साथ-साथ इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा के लिए भी पात्र हो जाते है। मगर, इसी बार से बायोलॉजी पहला विषय जरूरी किया है।

छात्रों की मांग, 2020 से लागू हो नियम
नीट में अचानक नियम बदले जाने को लेकर छात्रों में नाराजगी है। उनका कहना है कि नए नियमों की जानकारी कम से कम दो साल पहले दी जाना चाहिए, ताकि दसवीं के बाद छात्र सही निर्णय ले सकें। अगर परीक्षा का मकसद बारहवीं में प्राइवेट परीक्षार्थियों के बजाय नियमित वालों को मौका देना है तो 2020 से ये नियम लागू हों।

उम्रसीमा के बंधन से भी घटे दावेदार : सीबीएसई ने नीट देने के लिए अधिकतम उम्रसीमा घटाकर 25 साल कर दी है। इससे भी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के दावेदारों की संख्या कम हो जाएगी। पिछले साल तक 30 साल तक के आवेदन नीट देने के लिए पात्र रहते थे।

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