scriptRebels on 10 out of 66, BJP-Congress had to fight with their own rebels | Mp election 2023: 66 में से 10 पर बागी, भाजपा-कांग्रेस को अपने ही बागियों से करना पड़ा संघर्ष, प्रत्याशी कर रहे जोड़-घटाव | Patrika News

Mp election 2023: 66 में से 10 पर बागी, भाजपा-कांग्रेस को अपने ही बागियों से करना पड़ा संघर्ष, प्रत्याशी कर रहे जोड़-घटाव

locationइंदौरPublished: Nov 24, 2023 07:43:30 am

Submitted by:

Ashtha Awasthi

इंदौर। मालवा-निमाड़ की 66 में से 10 सीटों पर भाजपा-कांग्रेस को अपने ही बागियों से संघर्ष करना पड़ा। आठ जगह त्रिकोणीय तो दो जगह चतुष्कोणीय मुकाबला रहा।

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मान-मनौव्वल के बावजूद भी कोई मानने को तैयार नहीं हुआ। मतगणना से पहले दोनों पार्टियों के साथ प्रत्याशी जोड़-घटाव कर रहे हैं। दोनों दलों के गणित बागियों वाली सीटों पर गड़बड़ा रहे हैं। भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों के साथ बागी भी जीत का दावा कर रहे हैं। कुछ जगह बागियों की स्थिति काफी अच्छी है।

एक नजर बगावत वाली सीटों पर

महू: यहां भाजपा से उषा ठाकुर और कांग्रेस से रामकिशोर शुक्ला हैं, लेकिन कांग्रेस के पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार बागी होकर चुनाव लड़े। जिला और जनपद पंचायत के कई सदस्य उनके मददगार रहे।

देपालपुर: भाजपा के मनोज पटेल और कांग्रेस के विशाल पटेल के अलावा भाजपा के बागी राजेंद्र पटेल भी मैदान में हैं। हिंदूवादी नेता होने के साथ उन्हें नाराज भाजपाइयों का भी समर्थन था।

धार: यहां चतुष्कोणीय मुकाबला हुआ। भाजपा से नीना वर्मा तो कांग्रेस से प्रभा गौतम के साथ भाजपा के बागी राजू यादव व कांग्रेस के बागी कुलदीप बुंदेला भी मैदान में थे। भाजपा और कांग्रेस के नाराज नेता उनके साथ थे।

बुरहानपुर: भाजपा से अर्चना चिटनीस तो कांग्रेस से सुरेंद्र सिंह शेरा के अलावा भाजपा के बागी हर्षवर्धन चौहान मैदान में थे। उनके पिता खंडवा के सांसद रहे तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।

जोबट: भाजपा के विशाल रावत व कांग्रेस से सेना पटेल के अलावा भाजपा के बागी व पूर्व विधायक माधौ सिंह डावर निर्दलीय चुनाव लड़े। उपचुनाव में सुलोचना रावत विधायक बनी थीं।

राजनीतिक हलकों में बगावत वाली सीटों पर अनुमान लगाया जा रहा है कि कौन-कितना नुकसान पहुंचाएगा।

2018 में दिखाया दम : स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़े सुसनेर से विक्रमङ्क्षसह राणा, बुरहानपुर से सुरेंद्र सिंह शेरा तो भगवानपुरा से केदार डाबर ने चुनाव में जीत दर्ज कराई थी। बदनावर से भाजपा के बागी राजेश अग्रवाल की वजह से पार्टी प्रत्याशी भंवर सिंह शेखावत तीसरे नंबर पर रहे। नेपानगर में धन सिंह भी भाजपा से बागी हुए, जिससे प्रत्याशी मंजू दादू हार गए।

मल्हारगढ़: भाजपा से जगदीश देवड़ा तो कांग्रेस से परशुराम सिसोदिया के अलावा कांग्रेस के बागी श्यामलाल जोकचंद भी मैदान में हैं। उनसे सिसोदिया को नुकसान की आशंका है।

आलोट: भाजपा से पूर्व सांसद चिंतामण मालवीय तो कांग्रेस से मनोज चावला चुनाव लड़े। कांग्रेस के बागी पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू भी मैदान में हैं। विधानसभा में उनकी पकड़ मजबूत है।

बडऩगर: भाजपा से जितेंद्र पंड्या और कांग्रेस से मुरली मोरवाल के अलावा कांग्रेस के बागी राजेंद्र सोलंकी भी मैदान में हैं। कांग्रेस ने पहले सोलंकी के टिकट की घोषणा की, लेकिन संशोधित सूची में मोरवाल को टिकट दिया। सोलंकी ने प्रतिष्ठा का सवाल मानकर चुनाव लड़ा।

जावद: भाजपा से राजेंद्र पंड्या व कांग्रेस से समंदर पटेल के अलावा भाजपा के बागी पुरणमल अहीर चुनाव लड़ रहे हैं। पार्टी नेताओं के मनाने के बावजूद वे नहीं माने और चुनाव मैदान में उतरे।

सुसनेर: भाजपा से विक्रम सिंह राणा व कांग्रेस से भेरू सिंह बापू मैदान में हैं। भाजपा से पूर्व विधायक रहे संतोष जोशी और कांग्रेस के जितेंद्र पाटीदार बागी होकर चुनाव लड़े।

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