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स्पीड ब्रेकर को ‘सुरक्षा का रंग’ दे रहा रिफ्लेक्टर मैन

सॉफ्टवेयर इंजीनियर दे रहा राहत का मंत्रकई बड़ी कंपनियों और साउथ फिल्मों में कर चुके कामसडक़ हादसों से लोगों को बचाने के लिए दो पहिया वाहन पर रंग लेकर करते हैं सफर

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इंदौर

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Ramesh Vaidh

Mar 13, 2024

स्पीड ब्रेकर को ‘सुरक्षा का रंग’ दे रहा रिफ्लेक्टर मैन

इंदौर. सडक़ों पर वाहनों की रफ्तार कम कर हादसों में कमी लाने के लिए स्पीड ब्रेकर बनाए जाते हैं, लेकिन कई बार ये सडक़ों पर नजर ही नहीं आते और हादसे हो जाते हैं। दूर से स्पीड ब्रेकर नजर आए, जिसके लिए एक जुनूनी शख्स ने देशव्यापी मुहिम चला रहा है। राह चलते जब भी बिना मार्किंग के स्पीड ब्रेकर मिलते हैं, वे उन पर सफेद रंग पोत देते हैं ताकि दूर से ही चालकों को नजर आ जाए।

राम नाम लिखने निकले... स्पीड ब्रेकर की ठोकर ने बढ़ा दी एक और जिम्मेदारी
अम्बिका प्रसाद दुबे सागर के रहने वाले हैं। उन्होंने आर्मी स्कूल से पढाई की है। उनके पिता सेना में थे। दुबे ने कई वर्षों तक देश की नामी कम्पनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी की और 8 वर्ष तक साउथ की फिल्म में काम किया, लेकिन 22 जनवरी को श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के वक्त देशभर में बने राम मय माहौल से वह प्रेरित हो गए और एक करोड़ घरों के बाहर राम नाम लेखन का प्रण लेकर निकल पड़े। इस दौरान कई बार उन्हें सडक़ पर स्पीड ब्रेकर नजर नहीं आए और वह हादसे का शिकार हो गए, लेकिन उन्होंने अपना सफर नहीं रोका। बल्कि राम नाम लेखन के साथ-साथ स्पीड ब्रेकर पर रिफ्लेक्टर के लिए रंग लगाने का काम शुरू कर दिया। दुबे पिछले सात दिनों से शहर में ही थे और अब तक प्रदेश के हजारों स्पीड ब्रेकर पर रिफ्लेक्टर लगा चुके हैं। दुबे के इस काम के कारण अब उन्हें लोग रिफ्लेक्टर मैन के नाम से पुकारने लगे हैं।

जुनून... लोगों को हादसे से बचाना
सागर के अम्बिका प्रसाद दुबे ने देशभर में हादसों को कम करने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है। दुबे विभिन्न शहरों में भ्रमण कर स्पीड ब्रेकर को रंग रहे हैं, ताकि वह वाहन चालकों को दूर से ही नजर आ सके और हादसे होने से बच सके। वह दो पहिया वाहन से देशभर के अलग-अलग शहरों में घूम रहे हैं। वे रिफ्लेक्टर के लिए उपयोग होने वाले रंग को भी साथ में ही लेकर चलते हैं। जहां भी उन्हें ऐसे स्पीड ब्रेकर मिलते हैं, वह अपना काम शुरू कर देते हैं।

दर्द भी छलका: रहवासियों ने खास सहयोग नहीं दिया
दुबे ने पत्रिका से चर्चा में अपनी पीड़ा भी जाहिर कर दी। उन्होंने कहा, लोगों को हादसे से बचाने के लिए यह काम निरंतर करते रहेंगे। हालांकि अब तक किसी भी शहर में वहां के रहवासियों का कोई खास सहयोग नहीं मिला है, जबकि में यह काम निस्वार्थ कर रहा हूं और करता रहूंगा।

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