खाप से भी खतरनाक है ये समाज, दहेज मांगने पर करता है ये काम

खाप जैसी क्रूरता तो नहीं की लेकिन समाज व्यवस्था को सदियों से बनाये रखा है

By: Lalit kostha

Published: 10 Feb 2018, 12:41 PM IST

जबलपुर। खाप पंचायतें पूरे देश में अपने बयानों और निर्णयों तथा सजा को लेकर बदनाम हो चुकी हैं। उनके द्वारा प्रेमियों को सजा देने से लेकर समाज से बहिष्कृत तक कर दिए जाने के मामले हाईकोर्ट होते हुए देश की राजधानी तक पहुंच गए। हम आज एक ऐसे समाज की बात कर रहे हैं जिसने खाप जैसी क्रूरता तो नहीं की लेकिन समाज व्यवस्था को सदियों से बनाये रखा है और ये आज भी एकरूपता को कायम रखे हुए है।

आज जहां पूरे देश में शासन, प्रसाशन व सरकारें दहेज मुक्त और बेटी बचाओ की लोगों से अपील कर रहे हैं। वहीं संस्कारधानी जबलपुर सहित देश के विभिन्न कोनों में बसा एक ऐसा समाज भी है, जो इन कुरीतियों और बेटियों से भेदभाव जैसी घृणित मानसिकता से कोसों दूर है। यही नहीं यहां दहेज के दानव को सदियों पहले ही दफन कर दिया गया था, जो आज तक दोबारा सिर नहीं उठा पाया है। जी हां, हम बात कर रहे हैं, शहर के कोष्टा-कोष्टी समाज की। इस समाज में दहेज की मांग करने वाले को समाज से बहिष्कृत तक कर दिया जाता है।

कोष्टा यानि कोई भेद नहीं
अन्य समाजों में जहां कई जातियों का समावेश होता है, जिससे वे अलग-अलग वर्ग में बंटे होते हैं। उनमें छोटे-बड़े और ऊंच नीच का भेद भी होता है, लेकिन कोष्टा समाज में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। यहां कोष्टा यानि कोष्टा ही माना जाता है। फिर वह सम्पन्न हो या मध्यम परिवार का। रिश्ते जोडऩे में कोई भेद नहीं देखा जाता है।
कांग्रेस नेता एवं समाज के वरिष्ठ टीकाराम कोष्टा ने बताया कि कोष्टा समाज का मुख्यालय जबलपुर का कोष्टी मंदिर है। बुजुर्गों ने कभी भी समाज में ऊंच-नीच का भेद पैदा नहीं होने दिया है। यही वजह है कि शादी-विवाह में आज तक छोटे-बड़े का भेद नहीं आया है।

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नहीं है दहेज मांगने की प्रथा
समाज के बुजुर्ग कामता प्रसाद कोष्टा ने बताया कि कोष्टा समाज में दहेज मांगने की प्रथा कभी शुरू ही नहीं हुई और न ही वैवाहिक लेन-देन करने की इजाजत दी गई है। यहां आज भी लगुन का सगन लगुन पत्रिका के भीतर रखकर दिया जाता है। इसमें पहले सौ-दो सौ रुपए दिए जाते थे, जो अब अधिकतम हजार रुपए तक पहुंच गए हैं। वहीं खुले थाल में पैसे रखकर देने का चलन नहीं है।

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समाज से बहिष्कार
पूर्व अध्यक्ष नारायण प्रसाद कोष्टा ने बताया कि दहेज या अन्य किसी भी प्रकार की मांग करने वाले वर पक्ष को समाज से बाहर करने की सजा का प्रावधान बहुत पहले बनाया गया था, जो अब भी लागू है। ऐसे में लोग चाहकर भी दहेज नहीं मांग पाते हैं। शहर में ऐसे कुछ परिवार अब भी मौजूद हैं जो समाज विरोधी कार्यों के चलते समाज से बहिष्कृत हैं। इन परिवारों को कोई भी रिश्तेदार अपने यहां कार्यक्रमों में नहीं बुलाता है। इसके अलावा सामाजिक मामला पंचायत या बुजुर्गों की मौजूदगी में सुलझाने की व्यवस्था है।

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परिचय सम्मेलन का आयोजन
11 फरवरी रविवार को कोष्टा समाज का युवक युवती परिचय सम्मेलन एवं समूहिक विवाह समारोह का आयोजन कृषि उपजमंडी में किया जा रहा है। इस सम्मेलन में देशभर से कोष्टा समाज के लोग एवं विवाह योग्य युवक युवतियां शामिल होने जबलपुर पहुंच रहे हैं। इसके अलावा कोष्टा समाज विकास समिति द्वारा वैवाहिक पत्रिका का विमोचन, प्रतिभा सम्मान एवं सामूहिक विवाह का आयोजन किया जाएगा। सचिव मनीष कुमार कोष्टा, गुलाब कोष्टा, राकेश गढ़वाल, कुंजीलाल कोष्टा, राजेंद्र प्रसाद कोष्टा ने स्वजातीय बंधुओं से कार्यक्रम में शामिल होंगे।

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Lalit kostha Desk
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