न्यू यार्क जैसी बन रही ये सड़क, होंगी इतनी खूबियां लोग खिंचे आएंगे

कटंगा से ग्वारीघाट तक हो रहा शहर के पहले नॉन मोटराइज्ड ट्रांजिट का निर्माण, ३ महीने में एनएमटी पर दौड़ेंगी साइकिलें, पैदल टै्रक भी हो जाएगा तैयार

By: Lalit kostha

Published: 20 Jan 2018, 12:30 PM IST

जबलपुर. अमेरिका के न्यू यॉर्क शहर की सड़कों को दुनिया की सबसे अच्छी सड़कों में गिना जाता है। इन सड़कों पर पैदल चलने वालों, साइक्लिंग करने वालों के साथ साथ अन्य वाहनों के लिए अलग-अलग ट्रेक होते हैं। यही नहीं हरियाली भी इनकी खूबसूरती बढ़ाती है। कुछ ऐसी ही ड्रीम रोड का निर्माण मप्र के जबलपुर में किया जा रहा है। जिसके बनने के बाद ये सड़क सबसे खूबसूरत व व्यवस्थित होगी।

कटंगा से ग्वारीघाट तक बन रहे नॉन मोटराइज्ड ट्रांजिट (एनएमटी) पर अगले तीन महीने में साइकिल दौडऩे लगेगी। साथ ही पैदल चलने वालों के लिए पैदल ट्रैक की सौगात भी मिल जाएगी। जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा ४.३२ करोड़ रुपए से बनाए जा रहे पहले एनएमटी का काम तेजी से कराया जा रहा है।
बंदरिया तिराहे तक हुई टायरिंग
कटंगा से बंदरिया तिराहे तक २.५० मीटर चौड़े एनएमटी की टायरिंग का काम लगभग पूरा हो गया है। शेष काम एक सप्ताह में पूरा करने का दावा किया जा रहा है। एनएमटी में कुछ जगह पेवर ब्लॉक भी लगाए जा रहे हैं। फुटपाथ के निर्माण का काम भी जारी है। सड़क से सटकर बनाए जा रहे नॉन मोटराइज्ड ट्रांजिट पर सड़क के वाहन न पहुंचे, इसके लिए ग्रिल डिवाइडर लगाने के साथ ही लैंड स्केपिंग व कर्व स्टोन भी लगाए जा रहे हैं। एनएमटी पर केवल साइकिल और नॉन मोटराइज्ड वीकल ही चलाए जा सकेंगे। इसमें बैटरी से चलने वाली साइकिल व वाहन चलाने की छूट रहेगी। कटंगा से ग्वारीघाट तक सड़क के दोनों ओर ५.५-५.५ किमी लंबे एनएमटी के निर्माण की शुरुआत तीन महीने पहले पिछले साल १६ अक्टूबर को हुई थी।

कटंगा से ग्वारीघाट तक नॉन मोटराइज्ड ट्रांजिट का निर्माण अप्रैल तक पूरा हो जाएगा। जहां भी अवरोध हैं, उनका हल निकाला जाएगा।
- अजय शर्मा, कार्यपालन यंत्री


सकरी सड़क, अतिक्रमण का रोड़ा
स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारी अप्रैल तक एनएमटी तैयार होने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन कई जगह संकरी सड़क, पुल और अतिक्रमण बाधक बन सकते हैं। खंदारी नाला, शाहनाला पुल, बादशाह हलवाई मंदिर के सामने की बावड़ी के ऊपर से एनएमटी का निर्माण होना है। कटंगा से बंदरिया तिराहे तक हरे-भरे पेड़ों की कटाई का विरोध पहले भी हो चुका है।

Lalit kostha Desk
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