scriptwoman was in city, took eight years police find her | शहर में ही थी महिला, पुलिस को तलाशने में लग गए आठ साल | Patrika News

शहर में ही थी महिला, पुलिस को तलाशने में लग गए आठ साल

locationजबलपुरPublished: Dec 24, 2023 09:34:16 pm

Submitted by:

shyam bihari

- 2015 में परिवार से नाराज होकर गई थी, जबलपुर जिले के संजीवनीनगर थाने में दर्ज थी गुमशुदगी

 

 

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टीआइ और थानेदार रहे नाकाम, फाइल मिली तो हेडकांस्टेबल ने 70 दिन में खोजा

जबलपुर। परिवार किसी सदस्य के गुम होने या नाराज होकर चले जाने पर थाने में इसलिए गुमशुदगी दर्ज कराता है कि पुलिस अपने नेटवर्क से उसे तलाश देगी। साथ ही किसी अनहोनी से भी वह महफूज रखेगी। लेकिन जबलपुर पुलिस को शहर में ही रह रही गुमशुदा महिला को खोजने में आठ साल लगा दिए। इतने लम्बे समय में बहुत कुछ बदल चुका है, उसके पति ने दूसरी शादी कर ली और उससे दो बच्चे हैं।
यह कहानी पुलिस की पेशेवराना रवैये को लेकर बड़े सवाल खड़े करती है, जो शुरू होती है 2015 से।

संजीवनीनगर की प्रियंका(बदला नाम) का विवाह 2015 में बरेला निवासी कमल(बदला नाम) के साथ हुआ था। वह कुल जमा ससुराल में पांच महीने ही रही। पति की कथित प्रताडऩा से तंग आकर बिना किसी को कुछ बताए मायके आ गई। चिंतित माता-पिता ने समझौता कराने की कोशिश की और इस प्रयास में रहे कि बेटी का घर बसा रहे। पर बात नहीं बनी तो माता-पिता को भविष्य को लेकर चिंता होने लगी। इससे प्रियंका परेशान हो गई और बिना कुछ बताए मायके को भी छोडकऱ निकल गई। पहले तो उन्होंने अपने स्तर पर तलाश की, जब नाकाम रहे तो संजीवनीनगर थाने में गुम इन्सान की रिपोर्ट दर्ज करा दी। तब पुलिस ने उसे खोजने का वादा करके परिवार को शांत करा दिया।

पांच किमी दूर पहुंचने में लगे आठ साल
आठ साल बाद पुलिस ने प्रियंका को खोज निकाला और परिवार से मिला दिया। लेकिन जो कहानी सामने आई वह फिल्मी पटकथाओं से भी अधिक रोचक है। प्रियंका शहर छोडकऱ गई ही नहीं थी। वह ब्यूटी पॉर्लर का कोर्स कर चुकी थी। सबसे पहले अपने लिए काम खोजा और नौकरी कर ली। फिर बिना बताए मायके को छोड़ दिया। वह आठ साल से तिलवारा में ही रह रही थी। जब पुलिस उस तक पहुंची तो तो वह खुद का बिजनेस चालू कर चुकी थी।

छह टीआइ, थानेदार मिलकर नहीं खोज पाए

बताया गया है कि प्रियंका की गुमशुदगी की रिपोर्ट आने के बाद से संजीवनीनगर थाने में आधा दर्जन से अधिक टीआइ बदले, कई थानेदारों को उसकी फाइल मिली पर आठ साल में उसे नहीं खोज पाए। इसी बीच प्रधानआरक्षक अभिषेक शिंदे को फाइल मिली तो उन्होंने मायके संजीवनीनगर से लेकर बरेला ससुराल तक भागदौड़ कर 73 दिन में महिला को खोज निकाला।


पति कर चुका दूसरा विवाह
पुलिस ने महिला को परिवार से मिलाया, वह खुश हुई पर आगे भी अकेले रहने का फैसला किया और शास्त्रीनगर अपने किराए के मकान में चली गई। उधर, पुलिस ने बताया कि जांच मे पता चला कि पत्नी के जाने के बाद पति कमल की जब मिलने की उम्मीद खत्म हो गई थी तो उसने दूसरा विवाह कर लिया और उससे दो बच्चे हैं।

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