राजधानी की स्मार्ट सिटी और बहुमंजिला इमारतों की मौजूदा दौड़ को छोड़कर जब हमने शहर की पहली हाईराइज बिल्डिंग के हाल जाने तो हकीकत चौंकाने वाली निकली। हाउसिंग बोर्ड और पूर्व मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल व उनके भाई विद्याचरण शुक्ल से जुड़ी न्यू मार्केट जैसे पॉश क्षेत्र में स्थित 50 साल पुरानी हाईराइज बिल्डिंग गंगोत्री वीरान पड़ी है। बेसमेंट में संचालित हो रही चार दुकानों को छोड़ दें तो पूरे छह मंजिला भवन में खामोशी के सिवा कुछ नहीं है। जब तक यहां पासपोर्ट कार्यालय रहा, लोगों की आवाजाही रही, लेकिन तीन साल पहले यह कार्यालय एमपी नगर शिफ्ट होने के बाद यह भी खत्म हो गई है। परिसर में स्थित चार दुकानों को छोड़ दें तो बाकी भवन में सन्नाटा है।
40 लाख का तो सिर्फ कलर ही होगा
गंगोत्री के केयर टेकर व शुक्ल परिवार से जुड़े अतुल त्रिपाठी का कहना है कि इस साल अंत तक हम इसका रिनोवेशन शुरू करेंगे। गंगोत्री को पुरानी साख लौटाना हमारी प्राथमिकता है। इतनी बड़ी बिल्डिंग है कि कलर करें तो ही 40 लाख रुपए खर्च हो जाएं।
चालीस साल हाउसिंग बोर्ड के कब्जे में रही
यह बिल्डिंग 2010 तक हाउसिंग बोर्ड के कब्जे में रही। इसे लेकर शुक्ल परिवार और हाउसिंग बोर्ड के बीच लंबी कानूनी लड़ाई चली। शुक्ल परिवार के केस जीतने के बाद यह खाली होना शुरू हुई और अब वीरान होने की स्थिति में आ गई।
शहर में इन चार भवनों की शान रही
नवाबकालीन दौर के भवनों को छोड़ दें तो आधुनिक भोपाल की शुरुआत में गंगोत्री के साथ बेतवा अपार्टमेंट, पंचाननभवन और जीटीबी कॉम्प्लेक्स ही भोपाल की शान रहे। बाकी तीन भवनों में आज भी आम आदमी की आवाजाही है।