29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Bal Shram : बचपन को बोझ से नहीं, शिक्षा से सजाएंगे, बाल मित्र गांवों ने लिया संकल्प

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर विराटनगर के ग्रामीण अंचलों में बाल अधिकारों की एक नई जागृति देखने को मिली। बाल आश्रम और सत्यार्थी मूवमेंट फॉर ग्लोबल कम्पैशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रमों के तहत बागावास अहीरान, बनीपार्क, छीतौली और सुरजपुरा सहित बाल मित्र गांवों में बाल श्रम को समाप्त करने के लिए सामूहिक शपथ दिलाई गई।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Murari

Jun 13, 2025

- 'विश्व बाल श्रम निषेध दिवस' पर विराटनगर में बदलाव की शुरुआत

- ईंट भट्टों और मूर्तिकला कारखानों ने भरे शपथ पत्र, किया बाल श्रम समाप्ति का वादा

जयपुर। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर विराटनगर के ग्रामीण अंचलों में बाल अधिकारों की एक नई जागृति देखने को मिली। बाल आश्रम और सत्यार्थी मूवमेंट फॉर ग्लोबल कम्पैशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रमों के तहत बागावास अहीरान, बनीपार्क, छीतौली और सुरजपुरा सहित बाल मित्र गांवों में बाल श्रम को समाप्त करने के लिए सामूहिक शपथ दिलाई गई। इन कार्यक्रमों में न केवल ग्रामीण जन बल्कि ईंट भट्टों के मालिक, मूर्तिकार और कारखाना संचालक भी आगे आए और शपथ पत्र भरकर बच्चों से श्रम न करवाने का वादा किया।

बाल सरपंच की अगुवाई में जागरूकता की अलख

बाल सरपंच तनीषा नारवाल की अध्यक्षता में हुए आयोजनों ने ग्रामीणों को यह समझाया कि बच्चों का स्थान स्कूल है, मजदूरी नहीं। बाल आश्रम की सह-संस्थापिका सुमेधा कैलाश के मार्गदर्शन में छीतौली गांव में मूर्तिकारों ने कार्यस्थलों पर बाल श्रम न कराने का निर्णय लिया जबकि बनीपार्क गांव में विशेष रूप से ईंट भट्टों पर युवा मंडल के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर मालिकों को बाल श्रम के दुष्परिणाम समझाए। परिणामस्वरूप कई भट्टा मालिकों ने मौके पर ही शपथ पत्र भरकर संकल्प लिया कि वे कभी किसी बच्चे से काम नहीं करवाएंगे।

नोबेल विजेता की प्रेरणा से बनी ये पहल

कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को बताया कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने विश्व मंच पर बाल श्रम के खिलाफ जो लड़ाईछेड़ी थी यह उसी का परिणाम है कि 12 जून को पूरा विश्व इस बुराई के खिलाफ एकजुट होता है। अंतर्राष्ट्रीयश्रम संगठन (आईएलओ) द्वारा पारित कन्वेंशन-182 और संयुक्त राष्ट्र की सक्रियता से इस दिवस को वैश्विक मान्यता मिली।

वास्तविक पहल से बढ़ी जागरूकता

ग्रामीणों ने इस अभियान में न केवल भाग लिया बल्कि इसे आगे बढ़ाने की भी शपथ ली। अब इन गांवों में 'बालश्रम मुक्त गांव' की ओर वास्तविक कदम उठाए जा रहे हैं। यह पहल बताती है कि बदलाव केवल शहरों से नहीं, गांवों से भी शुरू हो सकता है। जहां बाल श्रम के खिलाफ केवल बातें नहीं जमीनी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

Story Loader

बड़ी खबरें

View All

जयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग