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सीएजी ऑडिट : पुलिस विश्वविद्यालय की एक मंजिल ही खा गए अधिकारी

प्रदेश के पहले पुलिस विश्वविद्यालय सरदार पटेल पुलिस सुरक्षा एवं दाण्डिक न्याय के निर्माण में बड़ा घोटाला सामने आया है। विवि दो मंजिला बनना था जिसमें एक भू-तल (ग्राउण्ड फ्लोर) और उसके ऊपर प्रथम तल शामिल था लेकिन निर्माण एजेंसी आरएसआरडीसी व उसके ठेकेदार ने केवल ग्राउण्ड फ्लोर बनाकर विवि प्रशासन को इमारत सौंप दी। विवि प्रशासन ने भी आंख मूंदकर भवन ले लिया। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ओर से विवि की ऑडिट में इसका खुलासा हुआ है। भवन निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 30 करोड़ मंजूर किए थे, जिसमें से केवल 14.78 करोड़ रुपए का ही उपयोगिता प्रमाण पत्र पेश किया गया, शेष 15.22 करोड़ की राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं है

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जोधपुर. प्रदेश के पहले पुलिस विश्वविद्यालय सरदार पटेल पुलिस सुरक्षा एवं दाण्डिक न्याय के निर्माण में बड़ा घोटाला सामने आया है। विवि दो मंजिला बनना था जिसमें एक भू-तल (ग्राउण्ड फ्लोर) और उसके ऊपर प्रथम तल शामिल था लेकिन निर्माण एजेंसी आरएसआरडीसी व उसके ठेकेदार ने केवल ग्राउण्ड फ्लोर बनाकर विवि प्रशासन को इमारत सौंप दी।
विवि प्रशासन ने भी आंख मूंदकर भवन ले लिया। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ओर से विवि की ऑडिट में इसका खुलासा हुआ है। भवन निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 30 करोड़ मंजूर किए थे, जिसमें से केवल 14.78 करोड़ रुपए का ही उपयोगिता प्रमाण पत्र पेश किया गया, शेष 15.22 करोड़ की राशि का कोई हिसाब-किताब नहीं है।

कोरोना के कारण दबी रही सीएजी रिपोर्ट

सीएजी ने वर्ष 2012 से लेकर 2019 के दरम्यान पुलिस विवि के लेखों की जांच करके कई गंभीर अनियमितताएं निकालकर अनुच्छेद बनाए हैं। रिपोर्ट में विवि के नवनिर्माणाधीन भवन के निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग का अभाव बताया है। सीएजी के अनुसार केवल ग्राउण्ड फ्लोर बनाकर दे दिया गया। देरी से भवन कब्जे में लेने को लेकर भी सवाल उठाए।

जिम्मेदार जवाब देने के लिए तैयार नहीं

इस संबंध में पुलिस विवि के कुलपति डॉ आलोक त्रिपाठी को दो दिन तक फोन लगाया गया। उन्होंने रीसिव नहीं किया। उनके निजी सचिव से बात करके भी इस संबंध में कुलपति की प्रतिक्रिया चाही गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। विवि में रजिस्ट्रार और वित्त नियंत्रक का पद भी लंबे समय से खाली है।

वर्ष 2015 में मिले थे 30 करोड़

प्रदेश में वर्ष 2012 में पुलिस विवि की स्थापना की गई। वर्ष 2013 से इसे दईजर स्थित ग्रामीण पुलिस लाइन के अस्थाई भवन में संचालित किया गया। वर्ष 2017 तक इमारत बनकर तैयार हो गई, पर सुविधाओं के अभाव में पुलिस विवि ने इसे हस्तांतरित नहीं की। तब भी विवि ने इसमें एक मंजिल गायब होने को गंभीरता से नहीं लिया। जनवरी 2020 में इसे पुलिस विवि को सौंप दिया। सौंपने के समय इसमें प्रथम मंजिल नहीं थी।

अब आरएसआरडीसी से पूछ रहे, पहले कहां थे

सीएजी की रिपोर्ट के बाद पुलिस विवि ने आरएसआरडीसी को पत्र लिखकर इस संबंध में सूचना मांगी थी, लेकिन पुलिस विवि के अनुसार आरएसआरडीसी ने सूचना नहीं दी। एक मंजिल नहीं होने के बावजूद पुलिस विवि ने इसका कब्जा ले लिया। वर्ष 2017 में भवन बनकर तैयार हो गया था लेकिन तीन साल तक इसमें देरी की गई।