प्रदेश में 27 दिसंबर से शुरू होने वाली ग्रामीण विकास अधिकारी परीक्षा में ड्यूटी कटवाने के लिए शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के पास तरह तरह के प्रार्थना पत्र आ रहे हैं। कोई खुद को बीमार बताकर ड्यूटी कटवाने की गुहार लगा रहा है तो कोई घर में खुद को अकेला बताकर लाचारी दिखा रहा। कई महिला शिक्षिकाओं ने गर्भवती होने की दलील दी है। हालांकि अधिकारी भी पूरी सख्ती दिखाते हुए ड्यूटी काटने से इंकार कर रहे हैं।
Rakhi Hajela
ग्रामीण विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में ड्यूटी करने से बचना चाहते हैं शिक्षक
27 और 28 दिसंबर को होनी है परीक्षा
25 दिसंबर से शुरू हो रहा है शीतकालीन अवकाश
जयपुर।
सर, मेरे बेटा पहली बार इंडिया से बाहर जा रहा है, मेडिकल कॉलेज में उसका एडमिशन हुआ है, उसके जाने की तैयारी करनी है, फिर उसे एयरपोर्ट तक ड्रॉप करने दिल्ली भी जाना है। मजबूरी है इसलिए प्लीज मेरी ड्यूटी कैंसिल कर दीजिए। साहब अभी कोरोना से ठीक हुआ हूं, कमजोरी अधिक है, इस बार ड्यूटी दी कहीं ऐसा ना हो कि फिर से बीमार पड़ जांऊ। इस पर तो घर पर ही इलाज हो गया अब तो कोविड का नया वेरिएंट आ गया है ज्यादा खतरनाक है कहीं ऐसा ना हो कि अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाए। मेरी ड्यूटी तो आप काट ही दो। ये कुछ बहाने ऐसे हैं जो कि आजकल शिक्षा संकुल में शिक्षा अधिकारियों के कक्ष में आमतौर पर सुनने में आ रहे हैं।
प्रदेश में 27 दिसंबर से शुरू होने वाली ग्रामीण विकास अधिकारी परीक्षा में ड्यूटी कटवाने के लिए शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के पास तरह तरह के प्रार्थना पत्र आ रहे हैं। कोई खुद को बीमार बताकर ड्यूटी कटवाने की गुहार लगा रहा है तो कोई घर में खुद को अकेला बताकर लाचारी दिखा रहा। कई महिला शिक्षिकाओं ने गर्भवती होने की दलील दी है। हालांकि अधिकारी भी पूरी सख्ती दिखाते हुए ड्यूटी काटने से इंकार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से 27 और 28 दिसंबर को ग्रामीण विकास अधिकारी परीक्षा के 3896 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा का आयोजन चार चरणों में होना है जिसमें केवल जयपुर जिले में ही तकरीबन सात हजार शिक्षकों की ड्यूटी बतौर वीक्षक लगाई गई है,साथ ही पर्यवेक्षक आदि भी लगाए गए हैं। विभाग ने शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का काम तकरीबन पूरा कर लिया है लेकिन अब शिक्षक अपनी ड्यूटी कटवाना चाहते हैं और वह येनकेन प्रकारेण उपाय लगाने में जुटे हैं। महिला शिक्षक ड्यूटी से बचने के लिए शीतकालीन अवकाश में अपने ससुराल जाने की अपील दे रही हैं तो पुरुष शिक्षकों और कार्मिकों के आवेदनों में बीमारी या घर में होने वाले पूजा पाठ का उल्लेख है। कुछ ने तो इसलिए ड्यूटी करने से मना किया है कि उन्हें खांसी जुखाम हो रहा है जो कोविड भी हो सकता है।
जुगाड़ करने में लगा रहे दिमाग
हालात यह है कि कई शिक्षक सिर्फ और सिर्फ ड्यूटी कटाने के एक सूत्रीय कार्यक्रम में जुटे हुए हैं। इसके लिए वह शिक्षा संकुल में चक्कर लगाते हुए नजर आ रहे हैं। कई तो ऐसे भी हैं जो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उच्चाधिकारियों पर दबाब तक डलवाने के प्रयास में लगे हुए हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि छुट्टी के लिए आवेदन करने वाले सभी शिक्षक झूठ बोल रहे हैं कुछ तो वाकई बेहद परेशान हैं और उनकी स्थिति परीक्षा ड्यूटी देने की नहीं है।
यह है ड्यूटी नहीं करने की असली वजह
दरअसल ड्यूटी से बचने की असली वजह है शीतकालीन अवकाश जो 25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक हैं। इसी अवकाश के बीच कर्मचारी चयन बोर्ड यह परीक्षा करवा रहा है। ऐसे में जिन शिक्षकों की ड्यूटी परीक्षा में लग गई है उनके पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम चौपट हो गए हैं। किसी ने परिवार के साथ बाहर जाने का प्लान बनाया था कोई दूसरे जिलों में अपने परिवार के पास जाना चाहता था लेकिन अब वह ऐसा नहीं कर पाएंगे। यदि वह अपने परिवार के पास जाते भी हैं तो दो दिन बाद ही उन्हें 26 दिसंबर की रात तक वापस आना ही होगा।
इनका कहना है
हमारे पास ऐसे आवेदन आए हैं जिसमें शिक्षक अपनी ड्यूटी कटवाना चाहते हैं लेकिन किसी भी शिक्षक की ड्यूटी ऐसे नहीं काटी जा सकती अगर कोई वाकई में जरूरतमंद होगा तो ही उसकी ड्यूटी कैंसिल की जाएगी।
जेएन मीणा, डीईओ प्रारंभिक