
Gajesndrasingh shekhawat
जयपुर. भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व राजस्थान में प्रदेशाध्यक्ष पद के लिए गजेन्द्र सिंह शेखावत का नाम तय कर चुका है। वह न तो इससे पीछे हटेगा, न ही मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की सहमति के बिना नाम घोषित करेगा। भले ही लम्बा समय लग जाए, वह राजे की सहमति का इन्तजार करेगा। इसके लिए कई बड़े नेता सहमति बनाने के प्रयासों में जुटे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार १६ अप्रेल को अशोक परनामी के इस्तीफे के बाद से राजे दिल्ली के बड़े नेताओं से लगातार सम्पर्क बनाए हुए हैं। अप्रेल में ही वह दिल्ली गई थीं लेकिन आलाकमान ने साफ कह दिया था कि संगठन शेखावत का नाम तय कर चुका है। संगठन को सर्वाेपरि रखते हुए स्वीकार कर लेना चाहिए। हालांकि तब भी शेखावत के नाम पर सहमति नहीं बन पाई थी। फिर पिछले दिनों राजे लगातार ५ दिन तक दिल्ली में डेरा डालकर अमित शाह, राजनाथ सिंह, ओमप्रकाश माथुर से मिलीं लेकिन न तो आलाकमान शेखावत के नाम से पीछे हटा, न राजे ने सहमत दी। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा फिर टल गई।
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चुनाव हैं, नहीं चाहिए विवाद
पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में भाजपा की सरकार है। मार्च में उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशियों की बुरी तरह हार हुई थी। एंटी इंकम्बेंसी का स्तर काफी बढ़ चुका है। सरकार को जगह-जगह विरोध झेलना पड़ रहा है। पार्टी की स्थिति पहले से खराब है। एेसे में आलाकमान नहीं चाहता कि प्रदेश में संगठन में ही नया विवाद खड़ा हो जाए। इसलिए आलाकमान सहमति बनने तक प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा टाल रहा है।
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संघ की भी पसन्द हैं गजेन्द्र
पार्टी सूत्रों के अनुसार केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भी पसंद हैं। पश्चिमी राजस्थान में किए कार्यों के बूते वह संघ की पसंद बनते गए। ऐसे में भाजपा चुनाव के मद्देनजर संघ को भी नाराज नहीं करना चाहती।
Published on:
20 Jun 2018 02:04 pm

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