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जयपुर

चार वर्ष में 319 करोड़ खर्च… फिर भी शहर की हवा नहीं साफ, शोपीस बनी छह एंटी स्मॉग गन

राजधानी जयपुर की हवा सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल एयर कंट्रोल प्रोग्राम (एनकैप) के तहत तीन वित्तीय वर्ष में 300 करोड़ रुपए से अधिक दिए। लेकिन, दोनों शहरी सरकारों ने अब तक एक भी काम ऐसा नहीं किया, जिससे प्रदूषण कम होता।

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राजधानी जयपुर की हवा सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल एयर कंट्रोल प्रोग्राम (एनकैप) के तहत तीन वित्तीय वर्ष में 300 करोड़ रुपए से अधिक दिए। लेकिन, दोनों शहरी सरकारों ने अब तक एक भी काम ऐसा नहीं किया, जिससे प्रदूषण कम होता।

इतना ही नहीं, इस प्रोग्राम के तहत खरीदी गई छह एंटी स्मॉग गन में से चार का अभी तक उपयोग ही नहीं किया गया। जबकि दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।

शोपीस बनी एंटी स्मॉग गन
– 06 मशीनों की एनकैप के तहत हुई थी वर्ष 2019 में खरीद
– 20 मीटर ऊपर पानी फेंकने की क्षमता है इन मशीनों की
– 02 हजार लीटर पानी संग्रहण की क्षमता है प्रत्येक मशीन की
(पानी की बौछार करने से वातावरण में मौजूद मिट्टी के कण नीचे आ जाते हैं।)

जिम्मेदार बोले
डिमांड पर भेजते मशीन
मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी की मांग पर एंटी स्मॉग गन भेजते हैं। दिवाली के बाद इनको चलाया था। अभी चुनाव की वजह से नहीं चल रही हैं।
– बलराम मीणा, एक्सईएन, गैराज शाखा (हैरिटेज निगम)


तीन माह का बनाएंगे रूट चार्ट
अभी मशीनें नहीं चलाई जा रही हैं। दिसम्बर से फरवरी तक का रूट चार्ट बनाएंगे और उसी के आधार पर इनका संचालन होगा। जहां ट्रैफिक का दबाव अधिक होता है। वहां इन मशीनों का उपयोग करते हैं।
– अतुल शर्मा, उपायुक्त, गैराज शाखा (ग्रेटर निगम)


सामंजस्य की कमी

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नियमित रूप से प्रदूषण स्तर की निगरानी करते हुए रिपोर्ट तैयार करते हैं। शहरी सरकार यदि इन अधिकारियों के साथ सामंजस्य कर आगे बढ़े तो शहरवासियों को राहत मिल सकती है।

ऐसे मिला एनकैप के तहत बजट

वित्तीय वर्ष राशि
2020-21 165
2021-22 90.35
2022-23 64.50

(राशि करोड़ रुपए में)


बजट का ऐसे हुआ उपयोग
– एनकैप के तहत जो पैसा केंद्र सरकार से मिला, उसका ज्यादातर उपयोग खुले क्षेत्र को पक्का करने, डिवाइडर के सौंदर्यीकरण, पार्किंग क्षेत्र को विकसित करने में खर्च किया गया।
– सड़कों से मिट्टी हटाने जैसे छोटे काम भी शहरी सरकारें सही से नहीं करवा पा रहीं।
– गलियों को रि-डिजायन कराने के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। यहां न तो पैदल चलने के लिए जगह है और न ही साइकिल चलाने वालों के लिए कोई रास्ता है।


अभी प्रदूषण का स्तर ये
जयपुर में दिवाली के बाद वायु प्रदूषण का स्तर बढऩा शुरू हुआ। 14 नवम्बर को वायु प्रदूषण का स्तर 280 एक्यूआई तक पहुंच गया था। मंगलवार को हल्की बारिश होने से वायु प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई। लेकिन, सोमवार को ज्यादातर स्टेशन पर वायु प्रदूषण का स्तर 200 एक्यूआई आया।